इस माह फरवरी में मासिक शिवरात्रि सहित बसंत पंचमी सहित यह हैं त्यौहार और व्रतः पढिए विषेश जानकारी - Shivpuri News

शिवपुरी। नए साल का फरवरी का आज पहला दिन हैं। सनातन संस्कृति के हिन्दू धर्म को मानने वाले लोग पूरे विश्व में निवास करते हैं और हिन्दू पंचांग की बात करे तो प्रत्येक दिन तिथियो के हिसाव से लोग व्रत रखते हैं,लेकिन इस फरवरी में मासिक शिवरात्रि और बसंत पंचती सरस्वती पूजा सहित 9 दिवस विशेष हैं। आएई जानते हैं यह कौनसे दिन हैं और इस दिन कौनसी पूजा और व्रत का महत्व है।

7 फरवरी रविवारःषटतिला एकादशी व्रत

षटतिला एकादशी के दिन भगवान विष्णु का पूजन किया जाता है। कुछ लोग बैकुण्ठ रूप में भी भगवान विष्णु की पूजा करते हैं। षटतिला एकादशी पर तिल का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन 6 प्रकार से तिलों का उपोयग किया जाता है। इनमें तिल से स्नान,तिल का उबटन लगाना, तिल से हवन, तिल से तर्पण, तिल का भोजन और तिलों का दान किया जाता हैं इसलिए इसे षटतिला एकादशी व्रत कहा जाता है।

9 फरवरी मंगलवारःप्रदोष व्रत

प्रत्येक महीने की कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को त्रयोदशी मनाते है। प्रत्येक पक्ष की त्रयोदशी के व्रत को प्रदोष व्रत कहा जाता है। सूर्यास्त के बाद और रात्रि के आने से पहले का समय प्रदोष काल कहलाता है। इस व्रत में भगवान शिव कि पूजा की जाती है।

शास्त्रों के अनुसार महीने की दोनों पक्षों की त्रयोदशी तिथि में शाम के समय को प्रदोष कहा गया है। ऐसी मान्यता है कि भगवान शिव प्रदोष के समय कैलाश पर्वत स्थित अपने रजत भवन में नृत्य करते हैं। इसी वजह से लोग शिव जी को प्रसन्न करने के लिए इस दिन प्रदोष व्रत रखते हैं। इस व्रत को करने से सारे कष्ट और हर प्रकार के दोष मिट जाते हैं।

10 फरवरी बुधवारः मासिक शिवरात्रि

हिन्दू धर्म में मासिक शिवरात्रि और महाशिवरात्रि का विशेष महत्व है। हिंदू कैलेंडर के अनुसारए प्रत्येक महीने कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मासिक शिवरात्रि मनाई जाती है। मासिक शिवरात्रि वर्ष के प्रत्येक महीने में और महाशिवरात्रि वर्ष में एक बार मनाते है।

शास्त्रों में ऐसा कहा गया है कि इस दिन व्रत करने से व्यक्ति का हर मुश्किल काम आसान हो जाता है। मासिक त्योहारों में शिवरात्रि का व्रत और पूजन का बहुत महत्व होता है।

11 फरवारी गुरूवारः माघ अमावस्या 2021

हिन्दू पंचांग के अनुसार माघ माह के कृष्ण पक्ष में आने वाली अमावस्या को माघ अमावस्या या मौनी अमावस्या कहते हैं। इस दिन मनुष्य को मौन रहना चाहिए और गंगाए यमुना या अन्य पवित्र नदियोंए जलाशय अथवा कुंड में स्नान करना चाहिए।

धार्मिक मान्यता के अनुसार मुनि शब्द से ही मौनी की उत्पत्ति हुई है। इसलिए इस दिन मौन रहकर व्रत करने वाले व्यक्ति को मुनि पद की प्राप्ति होती है। माघ मास में होने वाले स्नान का सबसे महत्वपूर्ण पर्व अमावस्या ही है। इस दिन स्नान और दान.पुण्य का विशेष महत्व है।

12 फरवरी शुक्रवारः कुम्भ संक्रांति

सूर्य हर महीने अपना स्थान बदल कर एक राशि से दूसरे राशि में चला जाता है। सूर्य के हर महीने राशि परिवर्तन करने की प्रक्रिया को संक्रांति के नाम से जाना जाता है। हिन्दू धर्म में संक्रांति का समय बहुत पुण्यकारी माना गया है।

संक्रांति के दिन पितृ तर्पण, दान, धर्म और स्नान आदि का काफी महत्व है। इस वैदिक उत्सव को भारत के कई इलाकों में बहुत ही धूम.धाम के साथ मनाया जाता है।

16 फरवरीःबसंत पंचमी सरस्वती पूजा

बसंत पंचमी माघ माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी को मनाई जाती है। आज ही के दिन से भारत में वसंत ऋतु का आरम्भ होता है। इस दिन सरस्वती पूजा भी की जाती है। बसंत पंचमी की पूजा सूर्योदय के बाद और दिन के मध्य भाग से पहले की जाती है। इस समय को पूर्वाह्न भी कहा जाता है।

यदि पंचमी तिथि दिन के मध्य के बाद शुरू हो रही है तो ऐसी स्थिति में वसंत पंचमी की पूजा अगले दिन की जाएगी। हालाँकि यह पूजा अगले दिन उसी स्थिति में होगी जब तिथि का प्रारंभ पहले दिन के मध्य से पहले नहीं हो रहा हो।

यानि कि पंचमी तिथि पूर्वाह्नव्यापिनी न हो। बाकी सभी परिस्थितियों में पूजा पहले दिन ही होगी। इसी वजह से कभी.कभी पंचांग के अनुसार बसन्त पंचमी चतुर्थी तिथि को भी पड़ जाती है।

23 फरवरी,मंगलवारः जया एकादशी

जया एकदाशी के दिन भगवान विष्णु की आराधना की जाती है। पूजन में भगवान विष्णु को पुष्पए जलए अक्षतए रोली तथा विशिष्ट सुगंधित पदार्थों अर्पित करना चाहिए। जया एकादशी का यह व्रत बहुत ही पुण्यदायी होता है। मान्यता है कि इस दिन श्रद्धापूर्वक व्रत करने वाले व्यक्ति को भूत.प्रेत, पिशाच जैसी योनियों में जाने का भय नहीं रहता है।

24 फरवरी बुधवारःप्रदोष व्रत

09 फरवरी को भी प्रदोश व्रत हैं माह के 2 बार यह व्रत आता हैं। पूरी जानकारी लेख के आंरभ में दी जा चुकी हैं।

27 फरवरी शनिवार,माघ पूर्णिमा

मघा नक्षत्र के नाम से माघ पूर्णिमा की उत्पत्ति होती है। मान्यता है कि माघ माह में देवता पृथ्वी पर आते हैं और मनुष्य रूप धारण करके प्रयाग में स्नानए दान और जप करते हैं।

इसलिए कहा जाता है कि इस दिन प्रयाग में गंगा स्नान करने से समस्त मनोकामनाएं पूर्ण होती है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। शास्त्रों में लिखे कथनों के अनुसार यदि माघ पूर्णिमा के दिन पुष्य नक्षत्र हो तो इस तिथि का महत्व और बढ़ जाता है।