धोखाधडी के मामले मे बैंक मैनेजर को 3 साल का कारावास,मामला फर्जी कागजो पर लोन देने का

शिवपुरी। सप्तम अपर सत्र न्यायाधीश मनोहरलाल पाटीदार ने मंगलवार को फर्जी केसीसी के आधार पर 3 लाख रुपए का ऋण देने के मामले में इलाहाबाद बैंक के मैनेजर को तीन साल के सश्रम कारावास एवं दस हजार रुपएके अर्थदंड से दंडित किया है । अर्थदंड नदेने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा । शासन की ओर से पैरवी अपर लोक अभियोजन निखिल सक्सेना ने की ।

अभियोजन के अनुसार 26 अक्टूबर 2013 को फरियादी गुरमेज सिंह ने एसपी को शिकायत दर्ज कराई गई कि उसकी जमीन पटवारी हल्का नंबर 48 लोहादेवी तहसील व जिला शिवपुरी में सर्वे नंबर 14 , कुल रकवा 6.48 हेक्टेयर हैं जो उसके,सुनीतारानी , अंगूरी बाई,विद्या,मिश्री,घनश्याम के नाम पर दर्ज है ।

इस जमीन पर 7 जनवरी 2012 को इलाहाबाद बैंक , शाखा आर्य समाज रोड शिवपुरी से केसीसी ऋण  खाता क्र .50092292301 पर 3 लाख रुपए का ऋण स्वीकृत किया गया था । इसमें उक्त खाते की भू- अधिकारी ऋण पुस्तिका फर्जी तरीके से तैयार कर एवं उक्त खातेदारों के फर्जी फोटो लगाकर सुनीता रानी के नाम पर बैंक से अज्ञात महिला ने सुनीता रानी बनकर ऋणले लिया था एवं पावर ऑफ अटॉर्नी में फर्जी खातेदारों के फोटो लगाकर फर्जी तरीके से सुनीता रानी के नाम का उल्लेख है ।

 इसमें सहमति के गवाह के रूप में बलवीर रावत व सुल्तान सिंह के हस्ताक्षर हैं ।

राजस्व विभाग ने भू अधिकार ऋण पुस्तिका को फर्जी बताया है। बैंक मैनेजर ने सही जांच न करके ऋण दे दिया। इस शिकायती आवेदन की जांच के बाद पुलिस ने बलवीर रावत पुत्र कैलाश रावत निवासी सोन चिरैया होटल के पास सहित बैंक मैनेजर ओम प्रकाश सूर्यवंशी पुत्र स्व .परशुराम सूर्यवंशी निवासी एच -19 कोर्ट एक्सटेंशन अवधपुरी के खिलाफ धारा 465,468 , 420 , 120 बी आईपीसी के तहत   प्रकरण कायम कर मामले की विवेचना उपरांत मामला न्यायालय में पेश किया था।

न्यायालय ने प्रकरण में आए समस्त तथ्यों एवं साक्ष्यों पर विचारण उपरांत आरोपी बैंक मैनेजर ओमप्रकाश सूर्यवंशी को धारा 420 आईपीसी के अपराध में 3 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 5 हजार रुपए के अर्थदंड , धारा 468 के अपराध में 3 वर्ष के सश्रम कारावास एवं 5 हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है । अर्थदंड न देने पर 3-3 माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा ।

फरार आरोपी को नहीं सुनाई सजा
न्यायालय ने मामले में फरार चल रहे आरोपी बलवीर की सजा के संबंध में टिप्पणी की है कि उसके संबंध में दंड के प्रश्न के लिए निर्णय स्थगित रहेगा । यह निर्णय व दंडादेश अभियुक्त ओमप्रकाश के संबंध में किया गया हैं, इसलिए प्रकरण के अभिलेख नष्ट न करते हुए सुरक्षित रखे जाएं।