खुला खतः बैठक की वसूली,नही रूका कलेक्टर के प्रशासक बनने के बाद यह भ्रष्टाचार - Shivpuri news

शिवपुरी,                                                      श्रीमान कलेक्टर महोदय,जिला शिवपुरी
श्रीमान कलेक्टर महोदय, पदेन कलेक्टर  पद पिछले 1 वर्ष से नगर पालिका का प्रशासक हैं,अगर देखा जाए तो शिवपुरी नगर पालिका भ्रष्टाचार का ब्रांड के रूप में पहचानी जाती हैं। फिलहाल आपके सामने नपा की बैठक बसूली का मामला आपके संज्ञान में लाने का प्रयास कर रहे हैं।

मामला यह हैं कि नगर पालिका में पिछले 9 वर्षो से शहर में फुटपाथ पर बैठ कर व्यवसाय करने वाले एवं हाथ ठेला वालों से नगर पालिका विकास शुल्क के रूप में बैठक बसूली के नाम पर पांच रूपए की रसीद काटी जाती हैं।

जिसका विधिवत ठेका होता था लेकिन पिछले 9 वर्षों से नगर पालिका द्वारा इस बैठक बसूली का कोई ठेका नहीं किया गया। जबकि अपने पंप अटेंडर या फिर संविदा कर्मचारीए अस्थाई कर्मचारियों के सहारे नपा के रसीद कट्टे थमाकर बसूली की जा रही हैं।

नगर पालिका राजस्व शाखा से मिली जानकारी के अनुसार शहर को नगर पालिका द्वारा ही चार जोन में विभक्त किया गया हैं। जिसमें कुलदीप को शहरी क्षेत्र का जिम्मा दिया गया हैं। वहीं फरान को कमलागंज क्षेत्र का तो वहीं अशोक को पोहरी रोड़ से लेकर गुना वायपास तक काए भूपेन्द्र को पुरानी शिवपुरी क्षेत्र का यदि इन चारों कर्मचारियों पर गौर किया जाए तो एक व्यक्ति दिन भर में 100 रसीद भी काटता हैं तो नगर पालिका 400 रसीद काटी जाती हैं।

कम से कम 2000 रूपए की राशी प्रत्येक दिन नगर पालिका कार्यालय में जमा होना चाहिएए लेकिन इन बसूलीकर्ताओं द्वारा सिर्फ और सिर्फ 1500 या फिर 1000 रूपए तक प्रत्येक दिन ही जमा किए जा रहे हैं। जबकि दर्जनों हाथ ठेला संचालकों का कहना है कि नगर पालिका के कर्मचारी पैसे तो ले जाते हैं लेकिन रसीद नहीं देते हैं। जबकि इस समय जिलाधीश आप स्वयं नगर पालिका के प्रशासक हैं।

यदि प्रशासक के सामने इस तरीके का खुला भ्रष्टाचार किया जा रहा हैं। तो फिर जिले में पदस्थ शासकीय कर्मचारियों क्या कर रहे होंगे, अब सवाल तो यह उठता हैं कि नगर पालिका के अपने कर्मचारी जो की शासन से वेतन प्राप्त कर रहे हैं फिर ऐसी क्या आवश्यकता पड़ी हैं कि बहार के प्राईवेट व्यक्तियों से नपा बसूली कराने में जुटी हुई हैं।
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इस तरह नगर पालिका कार्यालय में जमा हुई बसूली
यदि नगर पालिका द्वारा की जा रही बैठक बसूली पर गौर किया जाए तो  पिछले दिसम्बर माह के एक सप्ताह में इस तरह जमा हुई बसूली की जिसमें शहर की बैठक बसूली 21 दिसम्बर को 1800 रूपए 18 दिसम्बर को 1800 रूपए 16 दिसम्बर को 1600 रूपए 14 दिसम्बर को 1200 रूपए 11 दिसम्बर को 1250, 9 दिसम्बर को 1100 रूपए एवं 7 दिसम्बर को 1000 रूपए की राशि जमा की गई हैं। वहीं सब्जी मंडी बैठक बसूली की राशि इस तरह जमा की गई जिसमें 22 दिसम्बर को 750, 23 दिसम्बर को 650 रूपए 24 दिसम्बर को 700ए 27 एवं 28 दिसम्बर को 1900 रूपए एवं 29 दिसम्बर को 697 रूपए की राशि जमा की गई हैं।

पूर्व ठेके के अनुसार 8 लाख रूपए की हो रही हैं नपा को राजस्व हानि
जबकि पूर्व समय में गौर किया जाए तो सब्जी मंडी का ठेका वर्ष 18.19 में 11 लाख 86 हजार रूपए का नगर पालिका द्वारा दिया गया था। जो कि नगर पालिका द्वारा लगाए गए कर्मचारी विनोद सक्सेना एवं राकेश कुशवाह के अनुसार जमा की जा रही प्रत्येक दिन की राशि 750 के अनुसार, 3 लाख 25 हजार  की बसूली बताई जा रही हैं।

जिससे से सीधा.सीधा 8 लाख रूपए की राजस्व हानि नगर पालिका को सिर्फ और सिर्फ मंडी बैठक बूसली से हो रही हैं। तो फिर शहर की बैठक बसूली से कितनी राजस्व हानि हो रही होगी इससे साफ अंदाजा लगाया जा सकता हैं और यह कृत लगातार वर्ष 2011.12 से अनवरत रूप से जारी हैं।

नपा की फर्जी रसीदों के सहारे शहर से की जा रही हैं बसूली
यदि सूत्रों की बातों पर भरोसा किया जाए तो में शहर प्राईवेट व्यक्तियों द्वारा नपा के फर्जी रसीद कट्टे के सहारे बसूली की जा रही हैं। जिसकी जानकारी नपा प्रशासन के पास भी हैं।

इसके बाद भी आज तक इन फर्जी रसीदों से कैसे बसूली की जा रही हैं और कौन कर रहा हैं। इस बात तक का पता लगाना नपा सीएमओ ने उचित नहीं समझा इससे साफ जाहिर होता हैं कहीं न कहीं भ्रष्टाचार बंूं इस सारे कारोबार आती नजर आ रही हैं।