ब्रह्म मुर्हुत में श्रृद्धालुओं ने बाणगंगा में लगाई आस्था की डूबकी, बाणगंगा पर लगा मेला - Shivpuri News

शिवपुरी। मकर संक्रांति आज बड़े उत्साह और उमंग के साथ मनाई जा रही है। आज सूर्य का मकर राशि में आगमन हुआ है। इस अवसर पर शहर से लगभग 3 किमी दूर प्राचीन बाणगंगा मंदिर पर मेला लगाया गया है। 

जहां सुबह से ही ब्रह्म मुर्हुत में स्नान करने के लिए शहर सहित ग्रामीण अंचल के लोग पहुंचे और उन्होंने भगवान सूर्य को अर्द्ध देने के साथ बाणगंगा कुंड में डुबकी लगाई और ईश्वर का ध्यान किया। बाणगंगा मंदिर पर भगवान राधा कृष्ण की पूजा अर्चना की। शहर में भी लोग काफी उत्साहित दिखाई दिए। 

जगह.जगह खिचडी का वितरण किया गया। मंदिरों पर साधु संतों के प्रवचन हुए तो वहीं लोग घरों पर पूजा करने के बाद दान पुण्य करते देखे गए। सुबह भीषण सर्दी के बावजूद भी लोगों का उत्साह कम नहीं हुआ और बाणगंगा पर लोगों का हुजूम लगा रहा। 

सुबह से ही मंदिर क्षेत्र में मेला सज गया और लोग आस्था के साथ मंदिर पर पहुंचने शुरू हो गए। जहां बच्चों के लिए झूलों के साथ.साथ खान.पान की वस्तुएं विकती रही। महिलाओं ने भी बढ चढ़कर हिस्सा लिया। 

बाणगंगा शिवपुरी से 3 किमी दूर एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। इस स्थल पर 52 कुंड बने हुए हैं। किवदंती है कि पांडव अज्ञातवास के दौरान बाणगंगा पर आए थे। यहां बड़े भाई युद्धिष्टर को प्यास लगी थीए लेकिन आस पास कोई कुआ या बाबड़ी नहीं था। 

इस पर अर्जुन ने जमीन पर गांडीव से प्रहार किया था और जिसके कारण भूमि से जल की धारा बह निकली थी। जिससे अर्जुन ने अपने बड़े भाई युद्धिष्टर को पानी पिलाया था। बाद में पांडवों ने इस स्थान पर 52 कुंडों का निर्माण किया। 

जिनमें मुख्य कुंड में स्नान का विशेष महत्व है और पूरे सालभर कुंड का पानी एकसा रहता है। कुंड में स्नान कर व्यक्ति की सर्दी गायब हो जाती है। स्नान करने के बाद उसी परिसर में भगवान शिव और राधा कृष्ण का मंदिर बना हुआ हैए जहां लोग धर्म आराधना के लिए प्रतिदिन पहुंचते हैं। 

मकर संक्राति पर बाणगंगा के कुंड में स्नान का विशेष धार्मिक महत्व है और कहा जाता है कि मकर संक्रांति पर इन कुंडों में स्नान करने से पापों से मुक्ति मिलती है। इसी कारण लोहा पीटा जाति के लोग जो सालभर स्नान नहीं करते। जो आज के दिन स्नान करने बाणगंगा के कुंड में पहुंचे। 

बाणगंगा के कुंड में स्नान करने वालों में शहरी लोगों से अधिक ग्रामीण क्षेत्रों के लोग मौजूद थेए जो अपनी आस्था के साथ दूर.दूर से बैलगाडियोंए ट्रेक्टरोंए बाइकों और साइकिलों से सुबह.सुबह ही बाणगंगा पर पहुंच गए। 

ज्योतिषियों के अनुसार आज गुरूवार को संक्रांति होने की बजह से यह नंदा और नक्षत्रानुसार महोदरी संस्कृति मानी जाएगीए जो ब्राह्मणोंए शिक्षकोंए लेखकों और छात्रों के लिए लाभप्रद और शुभ रहेगी। लोगों ने ब्रह्ममुर्हुत में स्नान आदि क्रिया से निवृत होकर दान, पुण्य की प्रक्रिया शुरू की।