बेदमऊ खदान बनी अवैध उत्खनन का केन्द्र, अधिकारीयों की मिली भगत से ब्लास्टिंग कर रह रहे है अवैध उत्खनन - kolaras News

अरविंद तोमर,मोहम्मद फरहान काजी कोलारस। जिले के रन्नौद बेदमऊ,राजस्व व वन क्षेत्र की अलग ही पहचान है,यहां सफेद सोना यानि सफेद पत्थर पर खनन माफियाओं की काली नजर गढ़ी हुई है।

बेदमऊ भिलारी,सेसई,देकुआ, राजापुर, पट्टी राजापुर,चैखट ,कोलू घाट,सहित अन्य गांवों में पत्थर खदान पर माल निकालने के लिए मापदंडों को दरकिनार कर जमकर उत्खनन किया जा रहा है। साथ ही लीज भूमि के इर्द गिर्द आउट में खदान काट कर राजस्व को नुकसान पहुचा रहे साथ ही रेंज व राजस्व क्षेत्र में भारी मशीन डाल कर खुदाई जारी है।

ऐसा नहीं है कि यह ही जगह है अन्य जगहों में मैदानी क्षेत्रों को खाई में तब्दील कर दिया गया है। आलम यह है कि सैकड़ों हेक्टेयर क्षेत्र में कहीं ब्लास्टिंग तो कहीं मशीनों के जरिए उत्खनन कर उद्योगों को सप्लाई कर मोटी कमाई की जा रही है। 

मौके पर पहुंचने से ही इस बात का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि सफेद पत्थर के उत्खनन में निर्धारित मापदंडों का पालन नही किया जा रहा है। जिस प्रकार से राजस्व क्षेत्र के आसपास सफेदपोश लोगों की सालों से काली नजर है। 

अबैध खनन कर्ता मनमाने ढंग से खुदाई कर आपूर्ति की जा रही है। इधर जिला प्रशासन भी ऐसे सफेदपोश लोगों के आगे बौना साबित हो रहा है। इधर परिवहन विभाग सिर्फ छोटे.मोटे व्यापारियों पर कार्रवाई कर सफेदपोश लोगों को संरक्षण देने में जुटे हुए है।

खाई में तब्दील हो गई पहाड़ व मैदान
जानकारी के मुताबिक अंचल में पत्थर खदान के अलावा मुरूम आदि की अकूत खनिज संपदा है। इस क्षेत्र में सफेद पत्थर यानि सफेद सोना की भरमार की वजह से माफियाओं की नजरें गड़ी हुई है। 

इस क्षेत्र में कई सालों से समतल मैदान,कृषि भूमि या पहाडियों में दिन रात चल रहे उत्खनन की वजह से गहरी खाई में तब्दील हो गया है। इसके बावजूद संबंधित विभाग के अफसरों को जांच करने की भी फुर्सत नही है।

सफेदपोश लोगों की चलती है हुकुमत 
आपको बता देे कि क्षेत्र में पत्थर खदानों व क्रेशर संचालकों की मनमानी जमकर चल रही है। समूचे क्षेत्र में ऐसे हालत बने हुए है जहां सिर्फ खनन व्यवसाइयों की ही हुकुमत चलती है। कहीं हजारों डंपर पत्थर उत्खनन कर स्टोर रखा गया है तो कहीं गहरी खदान से अंचल का प्राकृतिक स्वरूप बिगडने के साथ ही असुरक्षित खदानों में मवेशियों के गिरने का अंदेशा बना रहता है।