हार्दिक गुप्ता@ कोलारस। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोलारस में बुधवार से लेकर शुक्रवार तक अव्यवस्थाओं के बीच महिलाओं की नसबंदी की गई। शासन के नियमों को ताक पर रखकर विगत तीन दिवसो मे लगभग 150 महिलाओं की नसबंदी की गई। जबकि सर्जन 1 दिन में केवल 30 ऑपरेशन ही कर सकता है लेकिन कोलारस के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में शासन के नियमों को ठेंगा दिखाकर नसबंदी का टारगेट पूरा होने के बावजूद भी कार्य जारी रखा गया।
अनियमितताओं का दौर यहां भी नहीं थमा और अस्पताल में बेड की व्यवस्थाएं न होने के चलते ऑपरेशन के बाद महिलाओं को कड़ाके की सर्दी में जमीन पर लेटा दिया गया।एक तरफ जहां सर्दी के चलते महिलाओं का बुरा हाल था तो उनके साथ आए बच्चे भी परेशान नजर आए। खाने-पीने का इंतजाम न होने से परिजनों को भी परेशान देखा गया। कुछ समय अस्पताल में रखने के बाद महिलाओं की छुट्टी कर दी गई एवं यह तक ध्यान नहीं रखा गया कि महिलाएं स्वस्थ हैं य नहीं कुछ महिलाओं की हालत छुट्टी के लायक नहीं थी। बावजूद इसके उन्हें डिस्चार्ज कर दिया गया जो रास्ते बर उल्टियां करते दिखाई दी और इन सबके बीच बीएमओ कोलारस अल्का त्रिवेदी शुक्रवार को नसबंदी ऑपरेशन के दौरान प्रभारी होने के बावजूद नदारद दिखाई दी
डॉक्टर ने किया महिलाओ के साथ अमानवीय व्यवहार
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में महिलाओं की नसबंदी ऑपरेशन जिला अस्पताल मे पदस्थ डॉक्टर आर.के.चौधरी द्वारा किया गया महिलाओं ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के वक्त दर्द होने से कराहने पर डॉक्टर नाराज होकर उनके साथ अमानवीय व्यवहार करते है महिलाओं ने डॉक्टर द्वारा उन्हें चांटा मारने तक की बात कही सूत्रों के अनुसार ऑपरेशन के वक्त फोर्टविन नामक इंजेक्शन लगाया जाता है जो सुन्न करने के काम आता है डोज की मात्रा डॉक्टरों द्वारा आधी कर दी गई जिसके कारण ऑपरेशन के वक्त महिलाओं को दर्द की शिकायत हुई।
स्वयं के खर्चे पर घर पहुंची महिलाएं
अस्पताल में एंबुलेंस होने के बावजूद भी महिलाओं को उचित साधन से नहीं भेजा गया महिलाओं ने बताया कि हम स्वयं के खर्चे पर आए हैं एवं किराए के ऑटो से ही घर वापस जाएंगे एक ऑटो में 5 से 6 महिलाओं को ठूस ठूस ले जाया गया । जिससे उन्हें धचको भरा सफर तय करना पड़ा। इस मामले को लेकर जब सीएमएचओ डॉ. एएल शर्मा से बात की गई तो उनका कहना था कि मामला गंभीर है दिखवाते हैं। लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। जो भी दोषी होगा कार्रवाई करेंगे।

