फर्जी रजिस्ट्री कराने वाला गिरोह आया सामने, पिछोर तहसील से जुड रहे है तार: यह लोग है शामिल - SHIVPURI NEWS

शिवपुरी। जिले में विक्रय से वर्जित जमनी की रजिष्ट्री कराने का मामला प्रकाश में आया हैं हालाकि राजिष्टार को रजिष्ट्री करने के लिए जो कागजात आए तो वह संदिग्ध लगने पर एसडीएम आफिस भेजे गए तो वह कागजात फर्जी निकले और काण्ड के तार पिछोर तहसील में जुडते दिख रहे हैं। 

जानकारी के अनुसार पिछोर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में 19 नवंबर को ग्राम पंचायत गढोईया की जमीन रजिस्ट्री के लिए आई थी । इस जमीन का पटवारी हल्का नंबर 215 ,सर्वे नंबर 538.1 व रकबा 1.00 अर्थात 5 बीघा जमीन विक्रय होने के लिए लाई गई थी । 

दस्तावेजों में कुछ शंका होने पर रजिस्टार मानपाल सिंह रावत ने संबंधित खसरे को चेक किया तो उक्त सर्वे नंबर विक्रय से वर्जित निकला। रजिस्ट्री के लिए पेश दस्तावेज खसरा एवं ऋण पुस्तिका प ऑनलाइन से प्राप्त खसरा में भिन्नता थी, जिससे तत्काल रजिस्ट्री का पंजीयन रोककर संबंधित दस्तावेज एसडीएम को दिखाए गए।

एसडीएम केआर चौकीकर ने पूरे मामले में दस्तावेज देखने के बाद कागज फर्जी होने पर संबंधितों को कारण बताओ नोटिस जारी कर एफ आइआर दर्ज कराने की बात कही हैं। इस पूरे फर्जीवाड़े में जमीन विक्रेता गडोईया निवासी खेमराज पुत्र नंदराम जाटव से बात की तो उसने कहा कि मैंने खसरा तहसील परिसर में स्थित लोक सेवा केंद्र से 30 रुपए जमा कर प्राप्त किया था। 

इसके बाद उसे तहसील के बाहर बैठे सुखनंदन पाल एवं पूरन जाटव मिले जिन्होने कहा कि वह उसकी जमीन की रजिस्ट्री करा देंगे केवल 10 हजार रुपए अलग से देने होंगे और इसके लिए हमारी रजिस्ट्रार से बात हो गई है । खेमराज ने बताया कि चूंकि उसे जमीन बेचना थी,इसलिए वह उन दोनों की बातों में आ गया और उनको 55 हजार रुपए भी दे दिए। इसके बाद पूरे कागज उन्होंने ही तैयार कराए, लेकिन अब रजिस्ट्रार बोल रहे हैं कि उसकी जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकती । 

इस संबंध में लोक सेवा केंद्र में कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल पाल ने कहा कि हमारे यहां से जो नकल ले गया हैं, उसने खसरे की नकल में फर्जीवाड़ा किया होगा। वैसे भी बाहर बैठे अन्य लोगों के पास आइडी हैं चूंकि उसे जमीन बेचना थी , इसलिए वह उन दोनों की बातों में आ गया और उनको 55 हजार रुपए भी दे दिए । 

इसके बाद पूरे कागज उन्होंने ही तैयार कराए, लेकिन अब रजिस्ट्रार बोल रहे हैं कि उसकी जमीन की रजिस्ट्री नहीं हो सकती। इस संबंध में लोक सेवा केंद्र में कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल पाल ने कहा कि हमारे यहां से जो नकल ले गया है, उसने खसरे की नकल में फर्जीवाड़ा किया होगा । 

वैसे भी बाहर बैठे अन्य लोगों के पास आइडी हैं,इसलिए वह भी नकल निकाल लेते हैं ।नकल पर लोक सेवा गारंटी की सील लगे होने की बात पर अनिल पाल ने कहा कि यह फर्जीवाड़ा नकल प्राप्त करने वाले लोगों ने ही किया होगा। 

अब खेमराज से लेकर ऑपरेटर व तहसील के बाहर मिले सुखनंदन व पूरन सभी अपनी अपनी सफाई दे रहे हैं, जबकि किसी ने किसी ने तो खसरे की नकल में से विक्रय से वर्जित शब्द को बड़ी सफाई से हटाया हैं। कुल मिलाकर इस पूरे मामले में सुखनंदन व पूरन संदेह के घेरे में है जो बिना किसी कारण से जमीन मालिक खेमराज के साथ क्यों थे। 

इनका कहना हैं
हम पूरे मामले में जांच करा रहे हैं। जांच के बाद जिसने भी दस्तावेजों में से विक्रय से वर्जित लाइन को विलोपित कर रजिस्ट्री कराने की कोशिश की है । उसके खिलाफ पुलिस कार्रवाई करवाई जाएगी । गिरोह का भी पता करेंगे जो यह काम कर रहा है। 
केआर चौकीकर, एसडीएम पिछोर