बंद स्कूलो में ​शिक्षा विभाग के द्धवारा 11 करोड़ रूपए खर्च करने की तैयारी: घोटाला पकाने की तैयारी - Shivpuri News

शिवपुरी। कोविड-19 की वजह से आधा शिक्षण सत्र बीत जाने के बाद स्कूल ड्रेस बांटने की प्रक्रिया अपनाई जा रही है। प्रति छात्र के मान से स्कूल ड्रेस पर 11 करोड़ रुपए से अधिक खर्च होंगे। अब सरकार जागी हैं और बंद स्कूलो में ड्रेस पर भारी भरकम रूपए खर्च करने की तैयारी की जा रही हैं। 

पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभा, महिला एवं बाल विकास विभाग, नगरीय विकास एवं पर्यावरण विभाग के तहत क्रियाशील एजेंसी जैसे राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन, महिला वित्त एवं विकास निगम तथा राज्य शहरी आजीविका मिशन नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करेंगे। नोडल एजेंसी द्वारा जिला एवं राज्य शिक्षा केंद्र से गणवेश प्रदान करने समन्वय स्थापित कर समुचित कार्यवाही की जाएगी। मैप आईटी के सहयोग से एसएचजी जीविका पोर्टल तैयार किया है। 

स्कूल शिक्षा विभा या जिला स्तरीय अधिकारियों द्वारा शालावार नामांकन का सत्यापन किया जाएगा। नोडल एजेंसी पोर्टल पर पंजीयन व क्षमता सत्यापन करेगी। स्व सहायता समूह की क्षमता का निर्धारण जिला कलेक्टर करेंगे। कलेक्टर के अनुमोदन के बाद संबंधित विभाग की नोडल एजेंसी की जिला इकाई को शालावार प्रस्तावित संख्या के अनुसार स्व सहायता समूहों के माध्यम से स्टेंडर्ड साइज गणवेश तैयार करने के लिए आदेश जिला स्तर से जारी किए जाएंगे। 

समूह वार क्रय आदेश पोर्टल से जनरेट होने के बाद गणवेश प्रदाय आदेश में समूहवार, शालावार प्रदान की गई संख्या के साथ-साथ कपड़े के मापदंड, गणेश का कलर, गणेश की डिजाइन और प्रदान करने की समय सीमा का भी उल्लेख करना होगा।

पोलियस्टर की मात्रा 64 प्रतिशत से 70 प्रतिशत और कॉटन व विस्कोस की मात्रा 33 प्रतिशत होनी चाहिए। रोटो कपड़े का उपयोग नहीं होगा। डिजाइन प्राथमिक स्कूल की बालिकाओं के लिए ट्यूनिक एवं शर्ट के साथ लेगिन्स को एक जोड़ी गणवेश माना जाएगा और बालकों को हॉफ पेंट एवं हॉफ शर्ट को एक जोड़ी गणेश की श्रेणी में रखा है। मिडिल स्कूलों में बालिकाओं के लिए सलवार कुर्ता के साथ जैकिट और बालकों के लिए फुल शर्ट व फुल पेंट की एक जोड़ी गणेश रहेगी। हर बालक व बालिका को दो जोड़ी गणवेश देना अनिवार्य है।

दो ड्रेस के लिए 600 रु. सामान खरीदने 75 प्रतिशत राशि पहले मिलेगी

पोर्टल से गणना के बाद दो ड्रेस के लिए कुल 600 रु. प्रति छात्र की दर से 75 प्रतिशत की राशि संबंधित स्व-सहायता समूह को अग्रिम के रूप में कपड़ा व अन्य सामग्री खरीदने के लिए राज्य शिक्षा केंद्र द्वारा पोर्टल के माध्यम से दी जाएगी। शेष 25 प्रतिशत राशि गणवेश प्रदान करने के बाद भौतिक सत्यापन के बाद मिलेगी। 

शासन के स्पष्ट आदेश हैं कि कपड़ा सहित बटन, धागा, जिप आदि बाजार से खरीदने का पूरा अधिकारी स्व सहायता समूहों का है। इसके लिए जिला या जनपद स्तर पर कोई केंद्रीकृत निविदा आमंत्रित नहीं की जाएगी। महिलाओं के संगठन को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने के लिए उन्हें यह स्वतंत्रता दी गई है।