कोरोना महामारी में आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं वकील, सौपा ज्ञापन / Shivpuri News

शिवपुरी। मध्य प्रदेश में कोरोना महामारी से उत्पन्न हुए भीषण आर्थिक संकट से प्रभावित हुए वकीलों को आर्थिक राहत दिए जाने बाबत महोदय, वर्तमान में दिनांक 14/3/20 से कोविड 10 की महामारी के कारण मध्य प्रदेश में समस्त न्यायालयों के पूर्णत- बंद रहने से प्रदेश के वकीलों पर गंभीर आर्थिक संकट छा गया है।

कोविड 19 लॉकडाउन को अभी आगे तक बड़ा दिया गया है जिसके और आगे बढ़ने की संभावना पूरी पूरी नजर आ रही है । जिस कारण से आगे भविष्य में भी प्रदेश में न्यायालय कब प्रारंभ होंगे यह निश्चित रूप से नहीं कहा जा सकता है ।

प्रदेश में पिछले 4 माह की अवधि से उच्च न्यायालय एवं अधीनस्थ न्यायालय पूर्णत: बंद हैं जिस कारण से समस्त अभिभाषकगण विशेषकर कनिष्ठ अभिभाषकगण एवं अशक्त व बुजुर्ग अभिभाषकगण के सामने अपने जीवन यापन हेतु गंभीर आर्थिक संकट उत्पन्न हो गया है।

इस कारण कुछ अधिवक्ता छोटे-मोटे काम करने को भी विवश हैं जो कि उनके गरिमा के विरुद्ध हैं वहीं कई वकील भाई खुदकुशी करने या आत्महत्या जैसे विकल्पों पर विचार करने के लिए विवश हो रहे हैं। ज्ञात हो कि दिल्ली में अभिभाषक हर्ष चंद्र अग्रवाल ने आर्थिक तंगी के चलते आत्म हत्या कर ली है ।

निश्चित तौर पर ऐसी स्थिति इसलिए उत्पन्न हुई है कि सरकार ने वकीलों के वर्ग को किसी भी प्रकार की आर्थिक सहायता दिए जाने का इरादा नहीं किया है और ना ही उन्हें किसी विशेष पैकेज के दायरे में लेकर आई है।

अभी हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री जी द्वारा गोविड 19 लॉकडाउन से देश में हुई क्षति की भरपाई एवं आर्थिक रूप से दुष्प्रभावितों की सहायता हेतु 20 लाख करोड़ के पैकेज की घोषणा की है जिसके अंतर्गत केन्द्रीय वित्त मंत्री महोदय द्वारा पांच विभिन्न चरणों में विभिन्न वर्गों हेतु आर्थिक सहायता के पैकेज की घोषणा की गयी है।

लेकिन यह दुर्भाग्य की बात है कि पांचों चरणों की घोषणा में अभिभाषकगण की आर्थिक सहायता कोई प्रावधान नहीं किया गया है । जबकि वर्तमान संकट की स्थिति में प्रदेश के अभिभाषकगण की सहायता के मद्देनजर विशेष पैकेज की घोषणा करना आवश्यक है ।

अतः माननीय महामहिम राज्यपाल महोदय से निवेदन है कि समूचे प्रदेश के भाइयों के कल्याण हेतु तत्काल आर्थिक पैकेज का ऐलान किया जाए और प्रत्येक वकील से कम 10 लाख और अधिकतम रू 50 लाख विना व्याज के लोन स्वीकृत किए बराबर पैकेज की घोषणा कर इसे जल्द ही अमल में लाया जाए जिससे कानून की रक्षा करने के वर्ग खुद की रक्षा के लिए।