स्वामी बज्रानंदजी महाराज के षोडसी पूजन एवं भंडारे में अनेक संतों ने लिया भाग / Shivpuri News

शिवपुरी। विनेगा आश्रम के प्रमुख सदगुरू देव परमहंस स्वामी बज्रानंदजी महाराज के बेकुंड गमन के पश्चात उनका षोड़सी पूजन एवं भंडारा का कार्यक्रम आश्रम में सम्पन्न हुआ। इस अवसर पर अनेक संतों ने भाग लिया।

जिनमें परमहंस आश्रम बालाजी नागौर से पधारे श्री श्री 1008 गुरुचारणानंद महाराज, श्री तुलसी बाबा परमहँस आश्रम शक्तेशगड़, श्री चन्द्रास्वामी जी महाराज परमहँस आश्रम अनुसुइया बाणगंगा शिवपुरी, श्री पहलवान बाबा परमहँस आश्रम दतिया, श्री राजूबाबा परमहँस आश्रम दो बत्ती, श्री सुखीराम बाबा परमहँस आश्रम ओसियां जिला जोधपुर, महंत परमहँस आश्रम झारोटी भरतपुर, श्री कालीबाबा परमहँस आश्रम देवखो ग्वालियर, श्री संतोषानंद महाराज परमहँस आश्रम बरकुआँ धाम करैरा शिवपुरी, श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर पुरषोत्तमदास जी महाराज बड़े हनुमान मंदिर तुलसी आश्रम कत्थामिल शिवपुरी आदि संत प्रमुख रूप से शामिल हुए।

सभी संत महात्माओं को परमहंस आश्रम विनेगा के संत पथरानंदजी महाराज द्वारा भोजन प्रसादी उपरांत दान दक्षिणा एवं अंगवस्त्र प्रदान कर विदा किया गया। षोडसी पूजन एवं उपस्थित भक्तों की भंडारा प्रसादी की व्यवस्था श्री आशुतोषानंद महाराज के निर्देशन में की गई।

विदित हो कि संत बज्रानंद जी महाराज ने लगभग 20 वर्षो तक विनेगा आश्रम के प्रमुख का कार्यभार संभाला और उनके निर्देशन में आश्रम की धार्मिक गतिविधियों में बहुत वृद्धि हुई। वहीं आश्रम का कायाकल्प भी हुआ तथा इसका एक सुंदर रूप उभरकर सामने आया।

संत बज्रानंद जी अनुशासन प्रिय थे और उनके शिष्य तथा भक्तों की संख्या काफी अधिक थी। प्रतिवर्ष उनके निर्देशन में आश्रम में 6 जनवरी को वार्षिक भंडारे का आयोजन किया जाता था। जिसमें लगभग एक लाख लोग भोजन प्रसादी ग्रहण करते थे। संत बज्रानंदजी भजन को जीवन मुक्ति का मार्ग बताते थे।

लेकिन अचानक उनका स्वास्थ्य खराब हुआ तथा पहले उन्हें इलाज के लिए एयर एंबुलेंस द्वारा दिल्ली ले जाया गया और बाद में उनका इलाज शिवपुरी के एमएम हॉस्पिटल में चला। लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।