निजी स्कूल एसोसिएशन ने स्कूल संचालन में आ रही परेशानियों को लेकर सौंपा ज्ञापन / Shivpuri News

शिवपुरी। आज कोरोना महामारी के बाद स्कूलों की स्थिति स्पष्ट नहीं होने साथ ही फीस नहीं मिलने से परेशान प्रायवेट स्कूल एशोसिएशन के पदाधिकारीयों ने तहसीलदार को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

ज्ञापन में बताया गया है कि शिक्षा जगत को श्रेष्ठता,सार्थकता व सफलता प्रदान करने वाले अशासकीय विद्यालय के संचालन में कोविड -19 कोरोना जैसी महामारी के चलते आने वाली कठिनाइयों का समाधान निम्न विन्दुओं को संज्ञान में लेकर त्वरित निराकरण करने का कष्ट करें ,जिससे निजी स्कूल संचालक , बच्चों के हित में और अधिक मेहनत , लगन , सुगमता व समर्पण भाव के साथ कार्य कर सकेंगे ।

उन्होने उल्लेख किया है कि मार्च माह में सत्र पूर्ण होने पर ही छात्रों की सम्पूर्ण बताया शुल्क जमा होती है । किन्तु 14 मार्च से स्कूल बंद होने के कारण करीब 50 प्रतिशत फीस अभिभावकों पर शेष रह गई है । जो कि अभी तक बकाया है , जबकि स्कूलों के खर्चे निरंतर चालू रहते हैं , जैसे बिजली बिल भवन किराया . स्टाफ वेतन , परिवहन इत्यादि ।

ऐसी स्थिति में साधारण सामान्य व मध्यम स्कूलों की अर्थव्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है । जिसकी पूर्ति शासन के सहयोग से ही संभव है । निजी विद्यालयों की वर्तमान आर्थिक परिस्थितियों को देखते हुगे विगत वर्षों की निःशुल्क एवं बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम ( RTE ) के अंतर्गत शिक्षारत छात्रों की सत्र 2016--17 . 2017-18 , 2018--19 , 2019-20 आर.टी.ई. की फीस प्रतिपूर्ति शासन द्वारा अविलम्ब भुगतान मांग की है।

( RTE ) के तहत शिक्षारत छात्रों को शासकीय स्कूलों की तरह अध्ययन सामग्री , मध्यान्य भोजन एवं ड्रेस हेतु राशि अभिभावकों के खातों में जमा की जावें । जिससे कि वह बच्चे असमानता महसूस न करें ।

( RTE ) के तहत प्रवेश प्रकिया जटिल होने से विगत दो वर्षों से 50 प्रतिशत शीट रिक्त रह जाती हैं । अतः प्रवेश प्रक्रिया को सरलीकरण किया जावे । यानि कि नियमों में शिथिलता कर लेने से निर्धन गरीब पात्र बच्चों को सुनिश्चित लाभ मिल सकेगा । प्राथमिक , माध्यमिक और हायर सेकेन्ड्री स्कूलों की मान्यता पांच वर्ष के लिए नवीन एवं नवीनीकरण की जानी चाहिए ।

कोरोना सकमण काल में विद्यालय खुलने के स्थिति में विद्यार्थियों को संक्रमण से दूर रखने हेतु सैनेटाईज , थर्मल स्कैनर , मारक इत्यादि की व्यवस्था शासन द्वारा निजी विद्यालयों के लिए की जाये । जिससे निजी विद्यालयों पर अतिरिक्त भार न पड़ें , अन्यथा यह भार परोक्ष रूप से अभिभावकों पर ही पड़ेगा ।

स्कूलों में संचालित बसों को टैक्स फी व इंश्योरेंश की फिटनेश अवधि बढ़ाई जाये । बच्चों के लिए वर्तमान सत्र वाहन व्यवस्था हेतु । अतिरिक्त व्यय होगा । क्योंकि सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुये कुल संख्या से आधी संख्या के बच्चे वाहनों में आयेगें । तथा वाहन के फेरे भी बढ़ेगे । जिससे पेट्रोल डीजल अतिरिक्त खर्च होगा । अतः निजी विद्यालयों में इस अतिरिक्त होने वाले खर्च में भी शासन से सहायता की अपेक्षा है ।

स्कूलों से विद्युत बिल कॉमार्शियल के हिसाब से न लेकर किसानों की तरह रियायत रेट से ही लिया जावे । व नगर पालिका द्वारा भी भवन संम्पति कर व्यवसायिक न लेकर सामान्य दर से ही लिया जाये । इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा भी पूर्व में निर्णय दिया गया है । कोरोना -19 के चलते आगामी सत्र 2020-21 में किस प्रकार स्कूलों का संचालन किन सावधानियों के साथ किया जावें इस हेतु भी निर्देशित करने की मांग की।

कोरोना वायरस सकमण काल के चलते कुछ विद्यालयों की आर्थिक स्थिति बहुत दयनीय हो गयी है । पिछले 06 माह से किसी भी प्रकार का शुल्क न मिलने के कारण स्कूल कर्मचारी शिक्षक तथा संचालक विकट आर्थिक परिस्थितियों से जूझ रहे हैं । अतः सरकार से निवेदन है कि , निजी विद्यालयों के लिए शीघ्र ही आर्थिक पैकेज की घोषणा करने का कष्ट करें । ताकि निजी विद्यालय अपने इस राष्ट्र हित के कार्य में अग्रसर हो सकें ।

अतः प्रत्येक बच्चा इस राष्ट्र की धरोहर है अतः उसकी सुरक्षा और उसकी शिक्षा की जिम्मेदारी सरकार की है । सरकार की शिक्षा के क्षेत्र में भागीदार बने निजी विद्यालयों को भी इस संकटकाल में सरकार से सहायता की अपेक्षा है । अतः सरकार को संकट काल में अपना दायित्व निभाते हुये बच्चो , अभिभावकों , विद्यालय के शिक्षकों , कर्मचारियों , संचालकों की सहायता करने की अपील की। इस ज्ञापन के दौरान प्रायवेट स्कूल एशोसिएशन के व्लॉक कॉर्डीनेटर भास्कर झा,संजय भरद्धार,विवेक तोमर,अभिनव मंगल,अभिषेक पाण्डेय उपस्थिति रहे।