शिवपुरी।अफसरो ने भ्रष्टाचार के सारे रिकार्ड तोड दिए। भ्रष्टाचार के कारण काम से अधिक भुगतान का मामला समाने आया हैं। मामला हैं एक सडक निर्माण का काम 2 साल मे पूरा होना था लेकिन 3 साल में निर्माण कराने वाली कंपनी केवल अर्थवर्क ही करा सकी हैं,और काम से अधिक भुगतान लेकर काम छोडकर भाग गई। अब इस सडक का पुन:निर्माण के टेंडर की प्रक्रिया शुरू होने वाली हैं।
जानकारी के अनुसार मप्र सड़क विकास निगम लिमिटेड (MPRDC) ने एक पैकेज में शामिल चार सड़कों का काम जीडीसीएल (गननो डंकर्ली एंड कंपनी लिमिटेड मुंबई) को तीन साल पहले दिया था। चारों सड़कों का काम दो साल में पूरा करना था। एक साल अतिरिक्त बीत जाने के बाद भी खुदी पड़ी सड़कों पर डामरीकरण नहीं हो पाया है। पुल व पुलियां भी अधूरी हैं।
अब बरसात शुरू हो जाने से कीचड़ की वजह से सड़कों पर बाइक या कार लेकर चलना मुश्किल हो रहा है। एमपीआरडीसी द्वारा 19 अप्रैल 2017 को एग्रीमेंट कर जीडीसीएल को चारों सड़कें दो साल के भीतर बनाने का ठेका दिया था यानी 17 मई 2019 तक सड़कों का काम पूरा करके देना था।
चारों सड़कों की कुल लंबाई 145.3 किमी है। चारों ही सड़कें अधूरी हैं। सड़क निर्माण की कुल लागत 262.60 कराेड़ है। समय सीमा में काम नहीं कर पाने की वजह से एमपीआरडीसी ने जीडीसीएल को लॉक डाउन से पहले 20 मार्च 2020 को टर्मिनेट कर दिया है।
यह हैं स्थिती सडको की,जनमानस परेशान
पडोरा से गोरा व खोड होते हुए पिछोर तक 65 किमी की सड़क तीन साल से खुदी पड़ी है। पिछोर से पडाेरा तक एक घंटे के सफर में तीन घंटे का समय लग रहा है। गर्मियों में सड़क पर उड़ती धूल से लोग परेशान रहे। अब बरसात हो जाने से सड़क कीचड़ में तब्दील हो गई है। बीच सड़क पर जगह-जगह पानी भर जाने से लोगों का चलना मुश्किल हो रहा है। कुछ यही हाल सिंहनिवास-खुरई रोड, करैरा-भितरवार रोड और पिछोर-बसई रोड का है।
पेटी ठेकेदारों का भी भुगतान अटका
जीडीसीएल द्वारा सड़कों का निर्माण पेटी कौन ट्रैक्टरों के माध्यम से कराया जा रहा था। अभी तक जो अर्थ वर्क हुआ है, उसका पेटी कान्ट्रैक्ट को भुगतान नहीं किया गया है। जबकि ठेकेदार एमपी आरडीसी से तकरीबन 50 करोड़ का भुगतान ले चुका है।
करीब 50 करोड़ का भुगतान ले चुके
वही जीडीसीएल कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर आरके शर्मा का कहना हैं कि लॉकडाउन की वजह से सारे काम बंद थे। कंपनी को 20 मार्च को टर्मिनेट कर दिया गया है। सड़क निर्माण के लिए कुछ समय और मांग रहे हैं। एमपीआरडीसी द्वारा कंपनी को सात बिलों का करीब 50 करोड़ का भुगतान हो चुका है।
काम पूरा नहीं होने पर कंपनी को टर्मिनेट किया
वही एमपीआरडीसी के ग्वालियर एजीएम राजीव श्रीवास्तव का कहना हैं कि जीडीसीएल को चार सड़कों का काम दिया गया था। दो साल में काम पूरा नहीं हुआ, इसलिए कंपनी को टर्मिनेट कर दिया है। काम के एवज में कंपनी को करीब 16 करोड़ रुपए का भुगतान जारी हुआ है।
चारों सड़कों के फिर से टेंडर होंगे, बरसात के पूरे सीजन में परेशानी होगी
चारों सड़कों के निर्माण के लिए फिर से टेंडर प्रक्रिया की कार्रवाई शासन स्तर पर चल रही है। अब दूसरे ठेकेदार से सड़कों का निर्माण कराया जाएगा। ऐसे में बरसात का पूरा सीजन परेशानी के बीच निकालना होगा। सड़कें नहीं बनने से जनता परेशान हो रही है। इस मामले में जनता लापरवाह अफसरों पर कार्रवाई की मांग कर रही है।
ठेकेदार ने कहा- 50 करोड़ भुगतान लिया एमपीआरडीसी अफसर बोले- 16 करोड़ दिए
चारों सड़कों के निर्माण के एवज में एमपीआरडीसी के अधिकारी लगभग 16 करोड़ रुपए का भुगतान होने की बात कह रहे हैं जबकि जीडीसीएल के प्रोजेक्ट मैनेजर का कहना है कि सात बिलों का करीब 50 करोड़ रुपए का भुगतान हम एमपीआरडीसी से ले चुके हैं। दोनाें के बयान में विरोधाभास है। सूत्रों के अनुसार ठेकेदार को जरूरत से ज्यादा भुगतान कर दिया है जबकि मौके पर उतना काम नहीं हुआ है।

