एक्सरे ललित मुदगल/शिवपुरी। जैसे ही कांग्रेस नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कांग्रेस को नमस्ते कहा सिंधिया समर्थक कांग्रेस नेताओ ने नमस्ते कांग्रेस अभियान शुरू कर दिया। इसी बीच अपनी स्थिती प्रकट करने के लिए कांग्रेस के नेता पोहरी के पूर्व विधायक हरिबल्लभ शुक्ला ने पुन:महल विरोध का कॉपीराईट लेकर ज्योतिरादित्य सिंधिया पर हमला कर दिया।
चार पार्टीयो का तीर्थाटन करके हरिब्ल्लभ के चरणम शरणम से लेकर अजब विरोध की गजब कहानी का एक्सरे करते हैं कि जो आरोप उन्होने सिंधिया पर लगाए वे आरोपो के सभी चार्ज उन पर भी लगे हैं,आईए इस पूरे मामले का एक्सरे करते हैंं
हरिबल्लभ शुक्ला की पूरी पत्रकार वार्ता में कम से कम शब्दो में लिखे तो यह अर्थ होता हैं कि सिंधिया जनसेवा के लिए नही बल्कि पद लालच के कारण भाजपा में गए हैं। और इस पद के लिए सिंधिया ने अपने 24 विधायको के पॉलिटिकल कैरियर को दांव पर लगा दिया। इतना ही नही सिंधिया को वायरस तक की संज्ञा दे दी।अब शुक्ला के अनुसार कांग्रेस आजाद हो गई। अब वह खुलकर भाजपा का विरोध कर सकते हैं।
हम पाठको को याद दिला दे की हरिबल्लभ शुक्ला ने कै.माधवराव सिंधिया से ही राजनीति का क, ख, ग सीखा था। बड़े महाराज की उंगली पकड हरिबल्लभ शुक्ला ने सन 1980 के विधान सभा चुनावों में कांग्रेस से पहली बार विधायक पद की शपथ ली थी। जब प्रदेश में शुक्ल बंधुओ का जलवा कायम था। हरिबल्लभ की आस्था साजातीय शुक्ल बन्धुओ की ओर अधिक हो गई और राजनीति में आगे बढ़ने की महत्वाकांक्षा से शुक्ल बंधुओ से नजदीकीया बड़ रही थी, और बड़े महराज से दूरियां।
सन् 1993 के विधानसभा चुनावों में हरिबल्लभ शुक्ला ने कांग्रेस से टिकिट पाने के लिए एडी चोटी का जोर लगाया लेकिन टिकिट मिलता ना देख अपने बड़े भ्राता स्व. रंजीत शुक्ला को निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में पोहरी विधानसभा से खड़ा किया लेकिन उन्हें यहां हार का मुंह देखना पड़ा, इस चुनाव में बैजंती वर्मा जो कांग्रेस की उम्मीदवार थी उन्हें विजयश्री प्राप्त हुई।
लगातार महल विरोध कर सुर्खियों में रहने वाले हरिबल्लभ शुक्ला को सन् 1998 में कांग्रेस से टिकिट तो मिला पोहरी का नहीं बल्कि शिवपुरी विधानसभा से यशोधरा राजे के खिलाफ। यह चुनाव ऐतिहासिक चुनाव था पूरे प्रदेश की नजर इस चुनाव पर थीं। हरिबल्लभ के शब्दवाण लगातार महल के खिलाफ चल रहे थे।
इस चुनाव में भी हरिबल्लभ शुक्ला लगभग 5 हजार वोटों से पराजित हुए। लेकिन इस चुनाव में वे यशोधरा राजे से कहीं भी कमतर नहीं दिखे। हारने के बावजूद केपी सिंह से लेकर दिग्विजय सिंह तक सब हरिबल्लभ को कंधो पर बिठाए घूमते रहे।
सन् 2003 के चुनाव में फिर पुन: पोहरी विधानसभा से कांग्रेस का टिकिट ना मिलता देख व ज्योतिरादित्य सिंधिया से मनमुटाव के चलते शुक्ला ने कांग्रेस का साथ छोड़ समानता दल का हाथ थाम समानता दल से उम्मीदवार के रूप में पोहरी विधानसभा से चुनाव लडऩे का मन बनाया। जब शुक्ला ने कांग्रेस छोड़ दी अपनी बयानबाजी से महल का विरोध करना नहीं छोड़ा और लगातार कांग्रेस और ज्योतिरादित्य सिंधिया पर अपने शब्दों के बाण चलाते रहे।
आखिरकार इस चुनाव में हरिबल्लभ शुक्ला को सफलता मिल ही गई और वह दूसरी बार विधानसभा भवन भोपाल पहुंच ही गए। इस चुनाव को जीतते ही हरिबल्लभ शुक्ला ने सीधे-सीधे ज्योतिरादित्य पर हमला करते हुए एक नारा 'श्रीमंत को कर दो तार, बैजंती की हो गई हार' देते हुए महल विरोध का कोपीराईट करा लिया।
लगातार ज्योतिरादित्य सिंधिया पर मौखिक हमले कर रहे हरिबल्लभ शुक्ला के इस प्रदर्शन को भाजपा ने बड़ी ही चतुराई से भुनाने का प्रयास किया। भाजपा ने सन् में लोकसभा चुनाव में भाजपा की ओर से शिवपुरी-गुना संसदीय क्षेत्र का प्रत्याशी बनाया। भाजपा के प्रत्याशी बनते ही हरिबल्लभ शुक्ला ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ शब्दों के बाणों का फुल पैकेज लेकर बन बैठे।
इस चुनाव में हरिबल्लभ शुक्ला को हार का सामना करना पड़ा लेकिन इस चुनाव में सबसे बड़ी बात यह देखने को आई कि सन् 2004 में भाजपा की सत्ता थी और कई जगह बूथ कैप्चरिंग का आरोप कांग्रेस ने लगाया। इस आरोप-प्रत्यारोप के चलते श्रीमंत को पहली बार शिवपुरी स्थित कलेक्ट्रेट के सामने धरने पर बैठना पड़ा।
2008 में पोहरी से भाजपा का टिकिट मांगा पर नहीं मिला तो हरिबल्लभ ने बसपा का दामन थामकर चुनाव लड़ा लेकिन यहां से जनता ने इन्हें पूरी तरह नकार दिया और यहां से भाजपा के प्रहलाद को विजय मिली। इस चुनाव के बाद जैसे हरिबल्लभ के तेवर कुछ ढीले हो गए।
2013 के मप्र के आम विधानसभा चुनावो में हरिबल्लभ शुक्ला को कांग्रेस ने पोहरी विधानसभा से अपना प्रत्याशी बनाया लेकिन वह प्रहलाद भारती से हार गए। इसके बाद 2018 में भी हरिबल्लभ शुक्ला ने पोहरी से टिकिट की मांग की,लेकिन कांग्रेस ने हरिबल्लभ शुक्ला की जगह वर्तमान विधायक सुरेश राठखेडा को अपना प्रत्याशी बनाया।अब पोहरी विधायक ने सिंधिया के समर्थन में अपने इस्तीफा देने की घोषणा कर चुके हैं।
कांग्रेस नेता पोहंरी के पूर्व विधायक हरिबल्लभ शुक्ला ने ज्योतिरादित्य सिंधिया पर आरोप लगाए हैं उन्होने जनसेवा के लिए नही बल्कि पद के लिए भाजपा ज्वाईन की हैं। कल हरिबल्लभ शुक्ला प्रेस के सामने लगातार 9 मिनिट तक बोले उसके बाद पत्रकारो से कहा कि अब आप पूछो।
प्रेस को दिए गए अपने 9 मिनिट में उन्होने सिंधिया पर सभी तरह के शब्दो के बाणो की वर्षा की। शिवपुरी समाचार डॉट कॉम किसी का समर्थन नही करता हैं लेकिन जब आप प्रेस के माध्यम से किसी पर आरोप लगाते हैं और वही दल बदलने का चार्ज आप भी लगा हो तो स्वस्थय पत्रकारता के लिए लिखना होगा।
हरिबल्लभ शुक्ला जिले के एक मात्र ऐसे नेता हैं जिन्होने अपने राजनीतिक कैरियर में चार पार्टिया का तीर्थाटन किया हैं। कांग्रेस से राजनीति की शुरूवात की,उसके बाद टिकिट के लिए समानता दल,लोकसभा में टिकिट के लिए भाजपा और फिर बसपा से होते हुए वापस कांग्रेस के हाथ को थाम लिया।
अब यह सवाल खडे हैं कि राजनीति को समाजसेवा कहते हैं। तो फिर आपने क्यो पार्टीयो का तीर्थाटन किया। आप भी टिकिट अपने फायदे के लिए के लिए दल बदलते गए। क्या बिना चुनाव लडे पद पर न रहते हुए समाजसेवा नही होती हैं,जो आरोपो का चार्ज आपने सिंधिया के लिए लगाए हैं वे सभी चार्ज आप पर स्वंय (हरिबल्लभ शुक्ला)लगते हैं। सिंधिया के दल बदलने की राजनीतिक घटना पर बयान देने से पूर्व हरिबल्लभ शुकला को भी अपने दल बदलने पर सफाई देनी चाहिए थी।
सन 2013 में सिंधिया से पोहरी का कांग्रेस का टिकिट पाने के लिए (हरिबल्लभ शुक्ला)चरणम शरणम की राजनीति शुरू कर दी। अब पोहरी अगर में उपचुनाव होता हैं तो टिकिट की कतार में सबसे पहले हरिबल्लभ का नाम होगा। पूर्व विधायक शुक्ला ने कहा कि अब कांग्रेस आजाद हो गई। अब हम खुलकर बोल सकते हैं,इससे पहले भी पूर्व विधायक शुक्ला महल की विरूद्ध् राजनीति करने वाले नेता माने जाते हैं इससे पहले भी कई बार शुक्ला सिंधिंया पर जुबानी हमले कर चुके हैं,लेकिन समय—समय पर अपने फायदे के लिए चरण भी पकडे हैं।
एक अंतिम सवाल चार पार्टीया बदलने से आपके (हरिबल्लभ शुक्ला)वोटर को क्या फायदा हुआ यह सवाल सबसे अहम हैं। अगर किसी भी पाठक या स्वंय कांग्रेस नेता हरिबल्लभ शुक्ला या उनके समर्थक को अपना कोई बयान दर्ज करना चाहते हैं तो वह कमेंट बॉक्स में अपना बयान दे सकता हैं। हम सशब्द उसे प्रकाशित करने का वादा करते हैं।

