डॉ. अर्जुनलाल, कोरोना संक्रमित समीर पर मिथ्या आरोप लगाना जरूरी था क्या | SEEDHA SAWAL

हृदय पीड़ा से भर उठा था जब आज शाम पता चला कि खनियाधाना का एक 25 वर्षीय युवक कोरोनावायरस से संक्रमित पाया गया है। इसके बाद जब समीर का वीडियो वायरल हुआ तो सिस्टम के प्रति नाराजगी भर गई लेकिन एक उम्मीद थी ऊपर बैठे अधिकारी अपने लापरवाह अधिनस्थ कर्मचारियों के खिलाफ कोई दो कदम उठाएंगे परंतु अब जब CMHO डॉक्टर अर्जुनलाल का वीडियो देखा तो रहा नहीं गया। 

मैं जानता हूं कि कलेक्टर किसी भी तरह की कार्रवाई के लिए प्रस्तावित नहीं करेंगे। कमिश्नर प्रस्ताव के अभाव में कोई कदम नहीं उठाएंगे। इन सबके लिए समीर शिवपुरी जिले की 18 लाख आबादी में से सिर्फ एक व्यक्ति है परंतु मैं समझता हूं कि ऐसे प्रयासों को हतोत्साहित किया ही जाना चाहिए। तो एक अदने से आम इंसान के नाते मैं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी महोदय से सिर्फ इतना पूछना चाहता हूं कि डॉक्टर अर्जुनलाल, कोरोनावायरस से संक्रमित होकर मौत की तरफ बढ़ रहे मासूम युवक आरोप लगाना जरूरी था क्या। 

डॉ अर्जुनलाल कृपया अपने आरोपों को प्रमाणित कीजिए 
डॉ अर्जुनलाल आपने कहा है कि समीर ने आपसे संपर्क नहीं किया था बल्कि आपने समीर को खोज निकाला था। कृपया प्रमाणित कीजिए कि आपने उसे खोज निकाला था। कोई दस्तावेज, कोई पंचनामा, मोहल्ले के गवाह, कोई फोटो, कोई वीडियो कुछ तो होगा आपके पास। 

डॉ अर्जुनलाल आपने कहा कि समीर ने खुद को होम क्वॉरेंटाइन नहीं किया बल्कि दुकान खोल दी जिसे आपने सील करवाया। कृपया सीलिंग के दस्तावेज तत्काल सोशल मीडिया पर वायरल कीजिए। बेहतर होता आप अपने वीडियो के साथ संलग्न करके भेजते। 

आपने जितने भी आरोप लगाए हैं कृपया उन सभी को प्रमाणित कीजिए। यदि आप ऐसा नहीं करते हैं तो निश्चित रूप से आपके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं होगी। कलेक्टर आप के खिलाफ कलम नहीं चला सकते। यदि आप वीडियो जारी नहीं करते तब भी आपके खिलाफ कोई कलम नहीं चलने वाली थी। आपकी ऊंची पहुंच है। आप सर्व शक्तिशाली हैं। इसीलिए तो पूछ रहा हूं 'डॉ. अर्जुनलाल, कोरोना संक्रमित समीर पर मिथ्या आरोप लगाना जरूरी था क्या?' 
बृज मोहन साहू (एक सामाजिक कार्यकर्ता)