लॉकडाउन + फैक्ट्री शटडाउन + पलायन =3 हजार मजदूर और 5 सौ छात्र शिवुपरी वापस

शिवपुरी। पूरा देश लॉकडाउन के कारण घरो में कैद हैं। कोरोना से लडने का एकमात्र यही ब्राहम्स्त्र है कि कैसे भी सोशल डिस्टेंस को मैनटेन करना हैं। इस कारण ही 21 दिन का लॉकडाउन की घोषणा देश के पीएम नरेन्द्र मोदी ने की है,लेकिन इस देश में लॉकडाउन मोड में पलायन की समस्या सबसे बडी हो गई हैं।

बताया रहा हैं कि शिवुपरी जिले से हजारो मजदूर देश के अन्य राज्यो महाराष्ट्र,गुजरात,राजस्थान और उत्तर प्रदेश के कई महानगरो से मजदूरी करने गए हैं। शिवपुरी के निवासी मजदूर कही किसी फैक्ट्री मेें काम करते हैं या अन्य कोई काम। देश लॉकडाउन के जाने पर फेक्ट्रीयो में शटडाउन को गया मजूदर बेरोजगार हो गए। इस कारण खाने पीने की जुगाड फैल होती देख और अपने मातृभुमि पर आने की चाह में शिवपुरी की ओर निकल पडे। कोई किसी संसाधन से आ रहा हैं तो कोई पैदल ही चल निकला है।


इस समय देश लॉकडाउन फिर शटडाउन और अब पलायान की मोड में चल रहा हैं। इस कारण पिछले 3 दिनो में 3 हजार मजदूर व अन्य काम करने वाले लोग शिवपुरी में वापस आने की खबर हैं। शिवपुरी जिले की 2 राज्य यूपी ओर राजस्थान की सीमा से मिलते हैं। बॉर्डन पर उनके स्वास्थय परिक्षण नही हो पा रहा हैं। स्वास्थय विभाग ने बॉर्डर पर स्वास्थ्य परिक्षण की व्यवस्था नही रखी हैं।

गांवो के ग्रामीण और सचिव के कंधो पर है अब इनकी जिम्मेदारी
देश मेें कोरोना से जंग में हर आम आदमी भी अब सैनिक की भूमिका हैं। ग्रामीण भी अपने गांवो में अपने गांव के निवासियो की वापस आने की सूचना प्रशासन को दे रहे हैं। ग्रामीणो को भी चिंता है कि कई यह हमारे गांवो में कोरोना के वाहक नही वन जाए।

वही प्रशासन ने पंचायत सचिवो को इन आने वाले मजदूरो का पूरा डाटा करने की जिम्मेदारी सौंपी हैं। पंचायत सचिव भी अपने काम से जुट गए हैं ओर इन्है अपने स्तर से सोशल डिस्टेंस कितना आवश्यक हैं यह बता रहे हैं। रविवार शाम तक ऐसे मजदूरों की अधिकृत संख्या ही 3 हजार से अधिक बताई जा रही है। इनका स्वास्थय परिक्षण इनके घरो पर ही किया जाऐगा ऐसा स्वास्थय विभाग का कहना हैं।

शहर में बसेरे के लिए बनाए चार कैंप
शिवपुरी से होकर गुजरने वाले मजदूरों व शिवपुरी लौटने वाले मजदूरों को उनके गांव तक पहुंचने से पहले ठहरने और खाने की व्यवस्था प्रशासन ने की है। सीईओ जिला पंचायत एचपी वर्मा के मुताबिक शहर में चार स्थान तय किए गए हैं। इनमें मानस भवन में 100, गांधी पार्क स्थित कम्युनिटी हॉल में 25, पोहरी बस स्टैंड के रैन बसेरा में 25, पुराने बस स्टैंड के रैन बसेरा में 12 लोगों के आवास की व्यवस्था की गई है। हालांकि अधिकांश मजदूर यहां रुकने को तैयार नहीं होते और घर जाने की जिद करते हैं। बाहर से आने वाले मजदूरों के लिए पिछले दो दिन में 7 हजार से अधिक भोजन के पैकेट बांटने का दावा प्रशासन ने किया है।

सैकड़ों मजदूर चोरी छिपे पहुंचे घर
प्रशासन को बाहर से आने वाले मजदूरों की जानकारी एकत्रित करने और उनका परीक्षण कराने में खासी मशक्कत करनी पड़ रही है। बताया जाता है कि महाराष्ट्र और गुजरात से सैकड़ों मजदूर लोडिंग वाहनों मे लदे सामान के साथ चोरी छिपे शिवपुरी के ग्रामीण इलाकों में पहुंचे हैं। इनमें से कइयों ने सूचना भी नहीं दी। ऐसे में पंचायत के सचिव व सहायक सचिव के माध्यम से अब प्रशासन जानकारी जुटा रहा है।

दोहरी स्कैनिंग के बाद घर पहुंच रहे छात्र
शिवपुरी के छात्र इंदौर, भोपाल, कोटा व अन्य महानगरों से शिवपुरी पहुंच रहे हैं। हालांकि छात्रों के मामले में मजदूरों की तुलना में अधिक सजगता सामने आ रही है। छात्रों से संबंधित महानगर के नजदीकी थाने में आने से पहले आवेदन लिया जा रहा है। उनके स्वास्थ्य परीक्षण के बाद ही उन्हें शिवपुरी रवाना किया जा रहा है। इसकी जानकारी शिवपुरी पुलिस व प्रशासन को भी दी जा रही है। इसके चलते शिवपुरी आने पर भी उनकी स्क्रीनिंग की जा रही है।

यह बोले अधिकारी
जो मजदूर बाहर से आ रहे हैं, उन मजदूरों का भी स्वास्थ्य परीक्षण कराया जा रहा है। उनकी जांच के बाद उन्हें होम क्वारंटाइन में रखा जाएगा।
डॉ. एएल शर्मा, सीएमएचओ शिवपुरी।

दूसरे शहरों से आने वाले मजदूरों के लिए शहर में चार कैंप बनाए गए हैं। जिले में अब तक 3 हजार से अधिक मजदूर आए हैं, जिनको गांव भेजा गया है। उनकी जांच की जा रही है। उन्हें घर में रहने की हिदायत भी दी जा रही है।
एचपी वर्मा, सीईओ जिला पंचायत शिवपुरी।