छात्रावास बनी कमाई का जरिया, पॉलिटिकल एप्रोच वाले शिक्षक बन रहे हैं छात्रावास अधीक्षक | kolaras News

कोलारस। कोलारस नगर पंचायत क्षेत्र में ही 5-6 करीब छात्रावास संचालित हैं इसी तरह ग्रामीण अंचल से सेसई सडक़ ,लुकवासा, खरई ,रन्नौद ,तेंदुआ ,सहित अनेक ग्रामों में हरिजन कल्याण विभाग द्वारा हरिजन छात्रावासों का संचालन किया जा रहा है।

हरिजन कल्याण विभाग एवं शासन द्वारा इन छात्रावासों में भारी-भरकम बजट प्रतिमाह छात्र एवं छात्राओं के ऊपर खर्च किया जा रहा हैं। लेकिन फिर भी छात्र एवं छात्रायें आए दिन इन छात्रावासों की शिकायत करने के लिए एसडीएम कार्यालय या फिर जनसुनवाई के माध्यम या फिर आदिम जाति कल्याण विभाग शिवपुरी में अपने आवेदन के खड़े दिखाई दे रहे हैं।

क्योंकि इन छात्रावासों की जिम्मेदारी जिन अधीक्षकों पर है ,वह अपने कर्तव्य को निभा नहीं रहे हैं और महीने में एक या दो बार ही आकर फर्जी कागजी कार्रवाई कर फर्मो के बिल लगाकर राशि निकालने में लगे हुए हैं। जहां प्रदेश सरकार सरकार हरिजन बालक बालिकाओं के लिए छात्रावासों का संचालन कर रही है,।

वहीं दूसरी ओर यहां पर राजनीतिक जोड़-तोड़ से शिक्षक ,शिक्षिकाएं अधीक्षक , अधीक्षकाओं के पद पर पहुंच जाते हैं, और जमकर घोटाला ,फर्जीवाड़ा ,भ्रष्टाचार करते हैं। परंतु आज तक किसी भी लापरवाह अधीक्षक-अधीक्षकओं पर कार्रवाई नहीं की गई हैं। यह बड़ा सवाल खड़ा दिखाई देता हैं।

नियमों को ताक पर रखकर पदस्थ किए गए अधीक्षक
कोलारस से लेकर ग्रामीण अंचलों में संचालित हरिजन कल्याण विभाग के छात्रावासों में जमकर फर्जीवाड़ा किया जा रहा है। नियमों को ताक पर रखकर राजनीतिक पकड़ के चलते इनको मन चाही छात्रावासों में पदस्थ कर दिया गया है। जिसके चलते भारी पैमाने पर फर्जीवाड़ा इन छात्रावासों में खुलेआम किया जा रहा हैं।

जिसकी जानकारी भी स्थानीय अधिकारियों को होने के बाद भी इनके खिलाफ कोई कार्यवाही नहीं की जाती हैं क्योंकि इसके एवज में अधीक्षकों द्वारा उनकी सुविधा शुल्क समय पर पहुंचाई जा रही हैं। जिसके चलते अधिकांश हरिजन छात्रावासों में ना तो अधीक्षक अधीक्षकआएं समय पर आते हैं और अधिकांश समय छात्रावासों से नदारद रहते हैं और फर्जी तरीके से उपस्थिति भर कर आदिम जाति कल्याण विभाग द्वारा भेजा जाने वाला बजट सांठगांठ कर ठिकाने लगाने में लगे हुए हैं।

शिक्षक-शिक्षिकाओं को अधीक्षक तीन वर्ष के लिए रखा जाता है। परंतु  कोलारस से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों के छात्रावासों में 5 से लेकर 10 वर्ष होने के बावजूद भी इन छात्रावासों पर जमे हुए हैं, नियमों के विरुद्ध इन छात्रावासों में तैनात ऐसे अधीक्षकों को हटा देना चाहिए और उनके मूल पद पर भेज देना चाहिए ,जिससे फर्जीवाड़ा भ्रष्टाचार मनमानी कुछ हद तक रुक सकती है।