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सवाल बड़ा है: वहां नहीं पहुंचे प्रशासन के नोटिस जहां बच्चे ठूस-ठूस कर भरे बच्चे और सांस भी नही ले पाते | SHIVPURI NEWS

शिवपुरी। गुजरात के सूरत में हुए हादसे के बाद शिवपुरी प्रशासन के एक दल ने शहर की कोचिंग संस्थानो का आकस्मिक निरिक्षण किया। इस निरिक्षण में कई कोचिंगो में खामिया पाई गई। अब एसडीएम शिवपुरी ने कई कोचिंग सस्थानो को नोटिस देकर जबाब मांगा हैं। इससे कोचिंग संस्थानो में भय का वतारण निर्मित हैं,लेकिन इन नोटिसो को लेकर प्रशासन पर कई सवाल खडे हो रहे हैं।

बताया जा रहा है कि प्रशासन ने लगभग 2 दर्जन कोचिंग संस्थानो को नोटिस भेजे हैं, नोटिस ऐसे संस्थानो को गए है जो लगभग 60-90 प्रतिशत नियमो को पूरा कर रहे हैं, उकत संस्थान एक व्यवस्थित कोचिंग सस्थान चला रहे है। बडी-बडी बिल्डिंग है,पढाने के लिए पूरा पर्याप्त स्थान हैं,लेकिन प्रशासन ऐसे टूयूटरो को भूल गया तो एक कमरे में 150 से अधिक बच्चो को ठूस-ठूस कर पढा रहे हैं। पहले पढिए क्या है कोंचिंग संस्थानो के नियम  

यह है नियम कोचिंग संस्थानो के 

कोचिंग में अग्नि शामक यंत्र होना आवश्यक हैं,बॉयस और गल्स्र के अलग वाशरूम होने चाहिए,सीसीटीव्ही कैमरे,शुद्ध् पेयजल,स्वच्छ हवा और कूलर,पंखे,होना आवश्यक हैं,उचित पार्किग की व्यवस्था,टेबिल कुर्सी पर बैठक,अटेंन्डेस रजिष्टर,स्टाफ टीचर,गार्ड और सबसे महत्पूर्ण् इमजैंसी गेट,हैल्पलाईन नंबर, हैल्थ डेस्क्, हर संस्थान में महिला टीचर या एम्पलोई होना चाहिए क्यो कि किसी भी आकस्मिक परिस्थती में अपनी बात शेयर कर सके।

कहने का मतलब सीधा-सीधा हैं प्रशासन ने नांलदा ऐकेडमी, सक्सेस पोईंट, कौटिल्स अकेडमी, इंस्पायर, कोठारी इंस्टीट्यूट, इंडक्टेनस कोचिंग और स्काई इंग्लिश ऐकेडमी को नोटिस दिया। 

यह ये कोंचिग सस्थानो में कुछ न कुछ कमी पाई गई थी,शहर में लगभग 125 कोचिंग है, इनमे से लगभग 20 संस्थान ऐसे है जिनमें पूरे नियम तो नही लेकिन लगभग कई नियमो का पालन होता हैं। लेकिन बाकी संस्थानो का क्या। प्रशासन सिर्फ एक ही दिन कोचिंग सस्थानो को चैकर करने गया ऐसा क्यो। हम इन सस्थानो को दिए गए नोटिसो का विरोध नही करते हैं।

लेकिन सवाल उठ रहे हैं कि शहर में राजेश्वरी रोड सहित शहर में ऐसे टूयूटर है जो 150 फुट के कमरे में 1 सैकडा से अधिक बच्चे ठूस-ठूस लेते हैं जहां बैठना तो दूर की बात सांस लेने में भी परेशानी हैं। नियमोे की तो यह बात ही न करे तो अच्छा ही होगा। सिर्फ एक ही टूयूटर पढता हैं,न बॉसरूम है न ही पेयजल और पार्किग भी नही हैं। प्रशासन ऐसे संस्थानो पर कार्रवाई नही करता यह सवाल अब बडा होता जा रहा हैं।