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खुला खत: श्रीमंत जब तक स्मैक एडिक्ट को अलग से वार्ड नही तब तक मुक्त नहीं होगा नशे से शहर | SHIVPURI NEWS

सतेन्द्र उपाध्याय शिवपुरी। अभी हाल ही में शिवपुरी दौरे पर आई क्षेत्रीय विधायक और पूर्व मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में चल रही बैेठक के दौरान एसपी को निर्देशित किया कि जिले को स्मैक से मुक्त कराओ। इस मामले को मीडिया ने प्रमुखता से उठाया और पुलिस भी स्मैकचीयों पर कार्यवाही को लेकर एक्शन मूड में आ गई। लेकिन इस दौरान एक और मामला सामने आया वह बडा ही गंभीर मामला है। मामला है कि अभी तक जिले में स्मैक के नशे में लिप्त लोगों को प्राथमिक उपचार। इस मामले को लेकर पुलिस भी परेशान है।

विदित हो कि जब से शिवपुरी का प्रभार तत्कालील एसपी राजेश हिंगणकर ने संभाला था शहर सहित पूरे अंचल में स्मैक के कारोबार ने रफ्तार पकड ली। एक के बाद एक शहर में स्मैकची सक्रिय हो गए और पूरे जिले में स्मैक का कारोबार बढने लगा। 

स्कूलों में पढने बाले मासूमों से लेकर शहर के प्रतिष्ठित परिवार के मासूम इस नशे की गिरफ्त में आते रहे। इसका नतीजा यह रहा कि एक नशेलची ने महज स्मैक के लिए एक युवक की हत्या कर दी। परंतु पुलिस स्मैक के कारोबारियों पर अंकुश लगाने में पूरी तरह से फैल रही।

जब इस पर अध्ययन किया तो सामने आया कि पुलिस का फैल होने का कारण स्मैकचीयों की उपरी पहुंच नहीं अपितु इन स्मैक चियों के लिए चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं होना सबसे महत्वपूर्ण कारण है।

ऐेसे समझें
एक स्मैकची को पुलिस रंगे हाथों गिरफ्तार कर थाने लेकर पहुंचती है। वहां पहुंचकर उक्त आरोपी को लोकअप में रखा जाता है। परंतु उक्त आरोपी इसके नशे में इतना धुत्त हो जाता है कि वह अपना होस हबास खो जाता है। जिसके चलते पुलिस उक्त आरोपी को हिरासत में लेकर चिकित्सालय पहुंचती है। तो वहां इसका कोई अन्य उपचार नहीं होने से महज कुछ घण्टे रखकर इसे अस्पताल से छोड दिया जाता है।

इसमें सबसे ज्यादा परेशानी पुलिस को झेलनी पढती है उसका कारण है कि उक्त नशे में धुत्त आरोपी को अगर स्मैक नहीं मिली तो वह किसी भी हद तक जाने को तैयार हो जाता है। चाहे वह थाने में मारपीट हो या फिर तोडफोड। हिरासत में लिए स्मैकची को लेकर पुलिस भी सोचती है कि यह क्या उन्होंने अपने हाथ से अपने ही हाथ पर पत्थर मार लिया है। स्मैकची को अगर कस्टडी मे कुछ हो गया तो पुलिस जबाब भी नहीं दे पाएगी। जिसके चलते पुलिस स्मैक के आदि को उठाकर चिकित्सालय में भेज देते है।

अगर अलग से वार्ड निर्धारित हो तो लग सकता है अंकुश
विश्वनीय सूत्रों की माने तो पुलिस को इस आरोपीयों पर अंकुश लगाना बडी बात नहीं है। परंतु नशेलचीयों की थाने सहित अस्पताल की हरकतों से पुलिस सहित पूरा स्टाफ भली भांति परिचित है। अब इसका एकमात्र उपाय यह है कि जिला चिकित्सालय में या तो स्मैक के लिए अलग से वार्ड निर्धारित किया जाए। जिससे उक्त बारदातों पर विराम लग सके।

इनका कहना है
हम लगातार स्मैक को लेकर कार्यवाही कर रहे है। परंतु यहां उक्त लोगों को इलाज नहीं मिलना सबसे बडी परेशानी है। हम प्राथमिकता से स्मैक मुक्त शिवपुरी बनाने में जुटे हुए है।
राजेश सिंह चंदेल,एसपी शिवपुरी। 

इनका कहना हैं
पुलिस अगर शहर को नशा मुक्त कराना चाहती हैं और इसमे स्वास्थय विभाग की मदद चाहती है। तो मदद करने को तैयार हैं हम पांच पलग का एक वार्ड स्मेक एडिक्टो के ईलाज के लिए बना सकते है। इसमे कोई बडी बात नही हैं।
अर्जुन लाल शर्मा,सीएमएचओ शिवुपरी।