जलकुंभी की फाइल हाउस अरेस्ट ,मैडम प्रेसिडेंट ने सिंधिया के प्रयास पर फेरा पानी

Adhiraj Awasthi
Uploaded Image ललित मुदगल @ एक्सरे शिवपुरी। शिवपुरी नगर पालिका अध्यक्ष पिछले 4 दिनो से फिर अपनी कार्यप्रणाली को लेकर चर्चा में आ गई है। सबसे पहले कैशबुक का जांच के नाम पर अपहरण,मीडिया की खबरों के दबाव में फाइल को वापस किया। उसी दिन पार्षदों ने भोपाल जाकर अध्यक्ष हटाओ की राजनीति पुन:शुरू कर दी। वही सीएमओ के एक पत्र ने यह सिद्ध कर दिया है कि नगर पालिका अध्यक्ष ने शहर की विकास की फाइलों को घर का बंदी बनाकर रख लिया है। अब ऐसी फाइल के हाउस अरेस्ट का मामला सामने आया है जिसका प्रकरण हाईकोर्ट में चल रहा है। उक्त मामला शहर की सुंदरता पर ग्रहण लगा रहा है,जिससे शिवपुरी शहर के टूरिस्ट शहर की तस्वीर अपने मन में गंदे शहर की तस्वीर बनाकर जा रहे है।

शिवपुरी शहर की सुंदरता पर संकट बनी जलकुंभी को हटाने की फाइल नगर पालिका अध्यक्ष गायत्री शर्मा के घर पर कैद बताई जा रही है। जलकुंभी ने शहर के नालों, तालाबों और पर्यटन छवि पर गहरा दाग लगा दिया है। इतना ही नहीं, यह मामला हाईकोर्ट ग्वालियर तक पहुंच चुका है और अगली सुनवाई 16 अप्रैल को प्रस्तावित है। ऐसे में सवाल यह उठ रहा है कि क्या शिवपुरी की सफाई और सुंदरता भी अब फाइलों की कैद में दम तोड़ रही है?

जलकुंभी ने जकड़ा शहर का मुख्य नाला, खतरे में चांदपाठा
शिवपुरी शहर का जाधव सागर से करबला पुल तक करीब 2 किलोमीटर लंबा मुख्य नाला इन दिनों जलकुंभी से पूरी तरह पटा पड़ा है। यदि समय रहते इसकी सफाई नहीं हुई, तो बरसात में यही जलकुंभी बहकर सीधे रामसर साइट चांदपाठा झील (सख्या सागर) में पहुंच जाएगी। ऐसा हुआ तो माधव टाइगर रिजर्व प्रबंधन द्वारा चांदपाठा को जलकुंभी से मुक्त करने के लिए की गई मेहनत पर फिर पानी फिर सकता है। यानी, नगर पालिका की एक फाइल की देरी सिर्फ एक नाले की सफाई नहीं रोक रही, बल्कि शहर की सबसे अहम प्राकृतिक धरोहरों को दोबारा खतरे में डाल रही है।

शहर की सुंदरता पर लगा हरा ग्रहण
शिवपुरी की पहचान सिर्फ एक शहर के रूप में नहीं, बल्कि पर्यटन नगरी के रूप में भी है। लेकिन शहर के नालों और तालाबों में फैली जलकुंभी अब इस छवि पर हरा लेकिन बदबूदार ग्रहण बन चुकी है। पिछले चार वर्षों से शहर के नाले और तालाब लगातार जलकुंभी की चपेट में हैं। गंदे नालों में पनपने वाली यह जलकुंभी बरसात के पानी के साथ बहकर पहले जाधव सागर, फिर रामसर साइट चांदपाठा (सख्या सागर) और अब माधव लेक तक फैल चुकी है।

फाइल बनी, लेकिन दफ्तर नहीं पहुंची मंजिल तक
नगर पालिका ने नालों से जलकुंभी हटाने के लिए फाइल तो तैयार कर ली, लेकिन अब दावा यह है कि वह फाइल दफ्तर में नहीं, अध्यक्ष के घर में बंद है। इस मामले में नगर पालिका के अकाउंटेंट रविकांत झा का कहना है कि  काफी समय पहले नपाध्यक्ष महोदय ने जलकुंभी सफाई की फाइल मंगाकर अपने घर रख ली थी। इसकी लिखित शिकायत सीएमओ से भी की गई है, लेकिन अब तक फाइल वापस नहीं लौटी। इसी कारण सफाई का काम शुरू नहीं हो पा रहा,कुल मिलाकर सीधे शब्दों में लिखे जिस जलकुंभी को हटाने के लिए मामला हाईकोर्ट में पहुंच चुका है। क्षेत्रीय सांसद और केन्द्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने जलकुंभी को हटाने के लिए मशीनें लाकर दी थी उसी जलकुंभी निस्तारण की फाइल को मैडम अध्यक्ष ने हाउस अरेस्ट कर लिया हैं।  

कैशबुक के बाद अब जलकुंभी फाइल पर भी सवाल
नगर पालिका अध्यक्ष की कार्यप्रणाली पिछले कुछ दिनों से लगातार सवालों के घेरे में है। हाल ही में कैशबुक को जांच के नाम पर दफ्तर से उठाकर घर ले जाने का मामला भी सामने आया था, जिसके बाद मीडिया और जन दबाव बढ़ने पर उसे वापस किया गया। उसी बीच कुछ पार्षद भोपाल पहुंचकर अध्यक्ष हटाओ की राजनीतिक मुहिम फिर से तेज कर चुके हैं। अब सीएमओ के पत्र और अकाउंटेंट के बयान ने यह संकेत और मजबूत कर दिया है कि विकास और सफाई से जुड़ी फाइलें दफ्तर से ज्यादा घर में सुरक्षित समझी जा रही हैं।

हाईकोर्ट में मामला, 16 अप्रैल को अगली सुनवाई
जलकुंभी का यह मुद्दा अब केवल स्थानीय शिकायत भर नहीं है। हाईकोर्ट ग्वालियर में रामसर साइट चांदपाठा में जलकुंभी को लेकर प्रकरण विचाराधीन है। इस केस में कलेक्टर, माधव टाइगर रिजर्व प्रबंधन, पीएचई और नगर पालिका को पार्टी बनाया गया है। कोर्ट की ओर से सीवर प्रोजेक्ट पूरा कर गंदा पानी रोकने और जलकुंभी को पनपने से रोकने की समय-सीमा भी दी गई है। ऐसे में यदि नाले की सफाई समय पर नहीं होती, तो नगर पालिका को हाईकोर्ट में जवाब देना मुश्किल पड़ सकता है। अगली सुनवाई 16 अप्रैल को निर्धारित है।

टाइगर रिजर्व ने भी माना—नपा ही जिम्मेदार
माधव टाइगर रिजर्व के संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने साफ कहा है कि: नालों की जलकुंभी की सफाई कराना नगर पालिका की जवाबदेही है। उन्होंने एनजीटी और कोर्ट में भी कहा है कि गंदा पानी आने से रोकेंगे और जलकुंभी की सफाई करेंगे।

सीएमओ बोले-फाइल के लिए सूचना पत्र जारी करेंगे
नगर पालिका के सीएमओ इशांक धाकड़ ने कहा कि भुजरिया तालाब पर जलकुंभी हटवाने का काम कराया जा रहा है। अकाउंटेंट से पूछता हूं कि अध्यक्ष के घर से जलकुंभी सफाई की फाइल वापस क्यों नहीं आई। इसके बाद उन्हें सूचना पत्र जारी करेंगे।

शिवपुरी की सबसे बड़ी विडंबना यही है कि यहां गंदगी नालों में कम, व्यवस्था में ज्यादा बह रही है।  जब फाइलें दफ्तर छोड़कर घरों में बसने लगें तो शहर की झीलें ही नहीं, उसकी साख भी गंदी होने लगी है।