ललित मुदगल @ एक्सरे शिवुपरी। शिवपुरी कृषि उपज मंडी का एक नया विवाद बीते रोज सामने आया है। इस विवाद में कृषि उपज मंडी समिति शिवपुरी के सचिव का एक जिंदा भ्रष्टाचार सामने आया है। शुक्ला एंड कंपनी किस प्रकार भ्रष्टाचार कर सरकारी खजाने को चपत लगा रही है। मामला एक व्यापारी और एक बाबू के विवाद का है। बाबू और एक आउटसोर्स कर्मचारी के खिलाफ कलेक्टर शिवपुरी अर्पित वर्मा को आवेदन दिया गया है,वही मंडी के बॉस शुक्ला जी का कहना है कि यह सरकारी कार्य में बाधा करने का मामला है हमने पुलिस को कंप्लेंट कर दी।
लेकिन सरकारी नियमों को देखे तो सबसे पहले मंडी के बॉस पर कार्यवाही होनी चाहिए किस नियम से एक बाबू को फील्ड में कार्यवाही करने की अनुमति दी। बाबू सस्पेंड और आउटसोर्स कर्मचारी नौकरी से बाहर तत्काल होना चाहिए,पब्लिक और सरकारी नियमों के अनुशरण करने वाले लोगों को कलेक्टर अर्पित वर्मा से यही उम्मीद हैं।
पहले आप पढ़े बीते रोज क्या था
फट्टे पर किसानों का माल खरीदने वाले व्यापारी शिवकुमार गुप्ता एवं सचिन गुप्ता ने कलेक्टर को एक शिकायत की है। इस शिकायत में लिखा गया है कि उपज मंडी के बाबू जायसवाल एवं दीपक पर अवैध रूप से 10 हजार रुपए की रिश्वत मांगने का आरोप लगाया है। व्यापारियों का कहना है कि हमने एक बार रुपए दे दिए, लेकिन वो फिर से जब रुपए मांगने आए तो हमने रुपए देने से इंकार कर दिया। जिसके चलते मंडी के कर्मचारियों ने उनके तौल कांटे जब्त कर लिए।
मंडी की पोल खुलते ही अपने स्टाफ को बचाने मंडी सचिव बबलेश शुक्ला ने आगे आकर देहात थाने में उक्त दोनों व्यापारियों शिवकुमार एवं सचिन के खिलाफ शिकायत की है कि यह लोग अवैधानिक रूप से किसान का माल खरीदते हैं। इतना ही नहीं उनकी दुकान पर 12 क्विंटल गेहूं का अवैध भंडारण भी पकड़ना बताया।
मामला सीधा वसूली के खेल का है
कौन कितना सत्य बोल रहा है यह तो राम जाने लेकिन मामला शुद्ध रूप से वसूली का है,मंडी से बाहर माल खरीदना अपराध है,यह अपराध शिवपुरी शहर मे 100 जगह प्रतिदिन होता हैं,कभी कभी कागजो का पेट भरने के लिए कार्यवाही भी की जाती है। शिवपुरी शहर में छोटे बड़े मिलाकर 100 से अधिक स्थानो पर रोड किनारे माल खरीदा जाता है।
अब सीधा सवाल बिना लाग लपेट के मंडी के बॉस शुक्ला से
श्रीमान शुक्ला जी आप मंडी सचिव है आपका सबसे पहला धर्म मंडी बोर्ड के नियमों का पालन करना है,इस धर्म मे मंडी का खजाना भरता है,किसानो की हित होता है। दोनो काम होते है सरकार भी खुश और किसान भी,लेकिन सवाल यह बडा है कि मंडी बोर्ड के नियम की बात करे तो एक लिपिक को मंडी के बाहर निरीक्षण करने का अधिकार मंडी बोर्ड के किस नियम से आपने दिया है। मंडी बोर्ड के नियमों की बात करे तो एक बाबू मंडी प्रांगण से बाहर निरीक्षण नहीं करता है। यह श्रीमान जायसवाल साहेब मंडी बोर्ड के किस नियम से और किसके आदेश से मंडी प्रांगण के बाहर निरीक्षण करने गए थे।
अगर बॉस आपकी अनुमति से नहीं गए तो आपको अपनी ईमानदारी की मिसाल पेश करते हुए इनको सस्पेंड कर देना चाहिए अगर अपने इनको भेजा है तो आप पर भी कार्यवाही होना चाहिए।
आपकी मेमोरी के लिए लिखना पडा रहा हैं
कार्यालय संयुक्त संचालक म०प्र० राज्य कृषि विपणन बोर्ड दीनदयाल नगर गेट नंबर-1 ग्वालियर (म०प्र०) पत्र क्रमांक /बोर्ड/स्था/18-19/8870 ग्वालियर दिनांक 28 जनवरी 2019 को समस्त सचिव सचिव कृषि उपज मंडी समिति (समस्त) जिला को लिखा गया था।
विषय: स.उ.नि. एवं मंडी निरीक्षक के स्थान पर सहायक वर्ग-03 से मंडी प्रांगण में काम लेने बाबत।
यह थी इस सरकारी पत्र की भाषा
प्रायः देखने में आया है कि संभाग की मंडी समितियों में मंडी का मैदानी कार्य मंडी के लिपिक वर्गीय कर्मचारियों तथा भृत्यो से लिया जा रहा हैं जबकि स.उ.नि. तथा मंडी निरीक्षकों को मंडी अधिनियम की धारा 22 के अंतर्गत वाहन रोकने का अधिकार है। प्रबंध संचालक महोदय के द्वारा भी इस आशय के निर्देश समय-समय पर जारी किये गये हैं कि स.उ.नि/मंडी निरीक्षक का कार्य मंडी समिति के लिपिक/भृत्य से न लिया जाये।
अतः आपको पुनः निर्देशित किया जाता है कि मंडी मैदानी कार्य लिपिक/भृत्य से न लिया जावे। यदि लिपिक/भृत्य द्वारा मंडी प्रांगण का कार्य करते हुए पाया गया तो आपके विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्यवाही की जावेगी। जिसकी जवाबदारी आप स्वयं की होगी।
अगर इस पत्र की मान तो श्रीमान शुक्ला जी आपकी कार्यप्रणाली पर सवाल खडे होते है आपको अपनी संस्था के विधान के विपरीत जाकर,मंडी के बाबू और एक आउटसोर्स कर्मचारी को मंडी प्रांगण से बाहर काम करने के लिए आदेशित किया है।
क्या दबाव बनाने की रणनीति थी
इस मामले मे अपने राम का कहना है कि शिवपुरी कृषि उपज मंडी के सचिव बालेश शुक्ला अभी नए नए शिवपुरी ट्रांसफर होकर आए है। मंडी के बहार शिवपुरी मंडी की सीमा में 100 स्थानो पर अवैध माल की खरीददारी होती है। यह कार्रवाई मंडी के बहार माल खरीद रहे व्यापारियों पर दबाव बनाने की एक रणनीति का हिस्सा थी। सभी 100 अवैध फडधारियो से वसूली और महिना बांधने का एक प्रयास था। यहां माल भी अवैध खरीदा जा रहा था। जांच करता भी अवैध तरीके से जांच कर रहा था,अवैध वसूली का खेल था। कुल मिलाकर सब कुछ अवैध था। बताया जा रहा है कि मंडी प्रांगण से बहार वसूली के इस खेल मे प्रतिदिन 10 हजार रुपए का खेल होता है। यह पूरा मामला उजागर हो गया है अब देखते है कि कलेक्टर शिवपुरी अर्पित वर्मा इस मामले को कैसे लेते है।
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