कुएं में इंजीनियर की मौत का सच, भाई ने खुद की जांच, पुलिस ने उसी पर दर्ज किया केस

Adhiraj Awasthi
Uploaded Image
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर निवासी और मंटेना कंपनी में कार्यरत इंजीनियर बृजेश सिंह चौहान (45) का शव 23 मार्च को ग्राम खुरई के एक कुएं से बरामद हुआ था। बताया गया कि 22 मार्च की रात वह संदिग्ध परिस्थितियों में कुएं में गिर गए थे। मामले में परिजनों ने शुरुआत से ही हत्या की आशंका जताई थी, लेकिन पुलिस ने केवल मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम कराना ही पर्याप्त समझा।

शिवपुरी। मामला शिवपुरी के पिछोर थाना सीमा से मिल रहा है। मंटेना कंपनी के इंजीनियर बृजेश की संदिग्ध मौत के मामले मे जब मृतक के भाई ने पुलिस की सुस्ती देख स्वयं ने इस मामले की जांच शुरू कर दी। मृतक के भाई ने पुलिस बनकर इस मौत के चमशदीद को फोन लगाकर तफ्तीश शुरू की तो पूरा क्राईम सीन बहार आ गया। पुलिस को यही तथ्य इस केस की बुनियाद लगे और पुलिस ने मृतक के भाई की जांच की आधार पर पिछोर पुलिस ने अजय यादव पर गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया।

अब उसी कार्रवाई से मृतक का भाई संतुष्ट नहीं है। उसका कहना है कि पुलिस ने सिर्फ एक नाम पर केस दर्ज कर मामले को सीमित कर दिया, जबकि उसके भाई की मौत के पीछे कई लोग और बड़ी साजिश शामिल हो सकती है।

जब पुलिस की जांच थमी, भाई ने खुद संभाली जांच
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर निवासी और मंटेना कंपनी में कार्यरत इंजीनियर बृजेश सिंह चौहान उम्र 45 साल का शव 23 मार्च को ग्राम खुरई के एक कुएं से बरामद हुआ था। बताया गया कि 22 मार्च की रात वह संदिग्ध परिस्थितियों में कुएं में गिर गए थे। मामले में परिजनों ने शुरुआत से ही हत्या की आशंका जताई थी, लेकिन पुलिस ने केवल मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम कराना ही पर्याप्त समझा।

यहीं से मृतक के भाई रमेश सिंह ने खुद मामले की तह तक जाने का फैसला किया। उन्होंने घटना में मौजूद बताए जा रहे रणवीर यादव को फोन लगाया और खुद को पुलिसकर्मी बताकर उससे पूरी घटना के बारे में जानकारी ली। यह कॉल रिकॉर्डिंग अब पूरे मामले का सबसे अहम मोड़ बन गई है।

भाई की कॉल रिकॉर्डिंग से सामने आया कुएं वाली रात का सच
फोन पर हुई बातचीत में चश्मदीद ने जो कहानी बताई, उसने पुलिस की जांच को नई दिशा दे दी। रिकॉर्डिंग के मुताबिक, 22 मार्च की रात ग्राम खुरई में कुएं के पास शराब पार्टी चल रही थी। वहां अजय यादव और उसके साथी मौजूद थे। इसी दौरान इंजीनियर बृजेश सिंह और अजय यादव के बीच नौकरी लगवाने को लेकर विवाद हो गया।

पहले बहस हुई, फिर गाली-गलौज और हाथापाई तक नौबत पहुंच गई। इसी दौरान, रिकॉर्डिंग के मुताबिक, बृजेश ने अजय पर दाल फेंक दी। विवाद बढ़ा तो दोनों आमने-सामने आ गए। बताया गया कि नशे की हालत में अजय यादव पीछे की ओर असंतुलित होकर कुएं में गिरने लगा, और गिरते वक्त उसने खुद को बचाने के लिए बृजेश को पकड़ लिया। इससे बृजेश भी असंतुलित होकर कुएं में जा गिरे। सबसे बड़ा सवाल यहीं से खड़ा हुआ-मौके पर मौजूद लोगों ने अजय यादव को तो कुएं से बाहर निकाल लिया, लेकिन बृजेश सिंह को क्यों नहीं बचाया? और उससे भी बड़ा सवाल-अगर यह हादसा था, तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस या ग्रामीणों को क्यों नहीं दी गई?

भाई ने जो उगलवाया, उसी पर पुलिस ने दर्ज कर दिया केस
भाई की इस रिकॉर्डिंग को आधार बनाकर पिछोर पुलिस ने ग्राम फुटेरा निवासी अजय यादव उम्र 28 साल के खिलाफ बीएनएस की धारा 105 के तहत गैर इरादतन हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस अब इस मामले की विवेचना कर रही है।

भाई बोला-एक पर केस दर्ज कर पुलिस ने पूरा सच दबा दिया
मृतक के भाई रमेश सिंह का कहना है कि पुलिस ने उनकी रिकॉर्डिंग का इस्तेमाल तो कर लिया, लेकिन उसमें छिपे पूरे घटनाक्रम और बाकी संदिग्धों की भूमिका को गंभीरता से नहीं लिया। उनका आरोप है कि यह सिर्फ हादसा नहीं, बल्कि योजनाबद्ध हत्या का मामला हो सकता है।

रमेश सिंह के अनुसार, 22 मार्च को बृजेश को पार्टी का झांसा देकर ग्राम खुरई स्थित रोहित लोधी के खेत पर बुलाया गया था। वहां पहले से मौजूद लोगों ने उनके साथ गाली-गलौज, मारपीट और दबाव बनाया। परिजनों का आरोप है कि बाद में साजिशन हत्या कर शव को कुएं में फेंका गया। परिवार ने रोहित लोधी, दीपक यादव, कृष्ण यादव, अजय यादव, रणवीर यादव सहित कुल 8 लोगों पर हत्या का संदेह जताया है और पूरे मामले की हत्या के एंगल से जांच की मांग की है।

अगर मेरे साथ कुछ हुआ, तो यही लोग जिम्मेदार होंगे
मामले को और गंभीर बनाते हुए परिवार ने दावा किया है कि होली पर जब बृजेश घर आए थे, तब उन्होंने अपने परिजनों को बताया था कि कुछ लोग उन्हें लगातार धमका रहे हैं। परिजनों के अनुसार, बृजेश ने स्पष्ट कहा था कि प्रोजेक्ट मैनेजर श्रीनिवास अप्पू, अजय यादव, रणवीर यादव, दीपक यादव और रोहित लोधी उन्हें परेशान करते हैं।

मोबाइल, चेन और पर्स गायब… शक और गहराया
परिजनों ने यह भी आरोप लगाया है कि घटना के बाद बृजेश का मोबाइल फोन, सोने की चेन और पर्स गायब मिले। इतना ही नहीं, उनका कहना है कि मौत के दूसरे दिन तक मोबाइल नंबर पर रिंग जा रही थी। यदि इंजीनियर कुएं में गिरा था, तो मोबाइल कहां गया? और अगर मोबाइल किसी के पास था, तो वह किसके पास था? यह सवाल अब जांच को और उलझा रहा है।

पुलिस को रास्ता दिखाने वाला भाई अब न्याय की मांग पर अड़ा
इस पूरे मामले में सबसे चौंकाने वाली बात यही है कि जिस पुलिस को घटना का सच एक भाई ने फोन रिकॉर्डिंग के जरिए बताया, वही पुलिस अब उसी भाई को अधूरी कार्रवाई करती नजर आ रही है।

परिजनों ने एसपी को आवेदन देकर निष्पक्ष और व्यापक जांच की मांग की है। उनका साफ कहना है कि एक व्यक्ति पर गैर इरादतन हत्या का केस दर्ज कर देने से उनके भाई को न्याय नहीं मिलेगा। जब तक घटना में शामिल हर व्यक्ति की भूमिका की जांच नहीं होगी, तब तक यह मामला अधूरा ही रहेगा।