शिवपुरी। शिवपुरी शहर के जिला कलेक्ट्रेट कार्यालय में आज मंगलवार को हुई जनसुनवाई में एक विवाहिता अपने मासूम बच्चे के साथ पहुंची,वहीं बताया जा रहा हैं कि विवाहिता पुणे की रहने वाली हैं और वह कलेक्टर से सहकारी बैंक में जमा 25 लाख रुपये की मांग करने पहुंची,जहां विवाहिता ने कहा कि मेरे दिमाग की दो नसों में क्लॉट हैं और पैसे ना होने के कारण में अपना इलाज नहीं करवा पा रही हूं,मैं बहुत परेशान हूं। जिसकी वजह से वह ठीक से बोल भी नहीं पा रही हैं, लेकिन बैंक से पैसे ना मिलता मुझे दर-दर भटकने पर मजबूर कर रही हैं।
25 लाख जमा, फिर भी इलाज के लिए मोहताज
जानकारी के अनुसार सोनिया त्रिपाठी निवासी पुणे ने बताया कि शिवपुरी जिला सहकारी बैंक में मेरी सेविंग खाते में 8 लाख रुपए और एफडी मिलाकर कुल 25 लाख रुपए जमा हैं। इतनी बड़ी राशि जमा होने के बावजूद बैंक मुझे अपना इलाज कराने के लिए पैसे नहीं दे रहा है। सोनिया ने बताया कि बैंक से जो किस्त मिलती हैं, वह इतनी कम हैं कि मेरी एक MRI तक नहीं हो पा रही है।
50 करोड़ की रिकवरी का झूठा जश्न
शिवपुरी सहकारी बैंक में करीब 100 करोड़ रुपए का घोटाला हुआ था, जिससे हजारों जमाकर्ताओं की पूंजी फंस गई। पिछले वर्ष शहर में बड़े ताम-झाम के साथ जश्न मनाया गया था और दावा किया गया था कि शिवपुरी को 50 करोड़ रुपए वापस मिल गए हैं। लोगों को उम्मीद थी कि अब उनकी मेहनत की कमाई वापस मिलेगी, लेकिन सोनिया जैसी पीड़ित महिलाओं की स्थिति बता रही है कि जमीनी हकीकत आज भी जस की तस बनी हुई है।
अब आयुष्मान कार्ड ही आखिरी सहारा
बीमार सोनिया का कहा हैं कि में बीमारी की हालत में टूट चुकी हूं,सोनिया अब प्रशासन से आयुष्मान कार्ड बनवाने की गुहार लगा रही हैं, ताकि वह अपना इलाज करा सकें। विडंबना देखिए कि जिस महिला के बैंक खाते में 25 लाख रुपए जमा हैं, उसे सरकारी मदद की भीख मांगनी पड़ रही है। इस मामले ने एक बार फिर सहकारी बैंक घोटाले के पीड़ितों के जख्मों को हरा कर दिया है।