शिवपुरी। सनातन धर्म में एकादशी का बहुत महत्व माना जाता है साल में 24 एकादशी पड़ती हैं,वहीं हिंदू धर्म में चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी का विशेष महत्व है, जिसे कामदा एकादशी के रूप में मनाया जाता है। जैसा कि इसके नाम से स्पष्ट है, कामदा का अर्थ है समस्त कामनाओं को पूर्ण करने वाली। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और भगवान विष्णु की पूजा करने से व्यक्ति के सभी पापों का शमन होता है और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
पौराणिक कथा: प्रेम और भक्ति की शक्ति
प्राचीन कथा के अनुसार भोगीपुर नगर के राजा पुण्डरीक की सभा में ललित नाम का गंधर्व गायन करता था। अपनी पत्नी ललिता के प्रति अत्यधिक मोह के कारण एक बार सभा में गाते समय उसका ध्यान भटक गया और सुर बिगड़ गए। क्रोधित होकर राजा ने ललित को राक्षस बनने का श्राप दे दिया।
पति को भयानक राक्षस रूप में देख ललिता विचलित हो उठी और विंध्याचल पर्वत पर श्रृंगी ऋषि की शरण में पहुंची। ऋषि के परामर्श पर ललिता ने चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी का व्रत पूर्ण श्रद्धा से किया और इसका पुण्य अपने पति को दान कर दिया। इस व्रत के प्रताप से ललित पुनः अपने सुंदर रूप में आ गया और अंततः दोनों को मोक्ष की प्राप्ति हुई।
कामदा एकादशी तिथि और महत्वपूर्ण समय
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 28 मार्च 2026 को सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि 29 मार्च 2026 को सुबह 7 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 29 मार्च रविवार को ही रखा जाएगा। इस दिन सूर्योदय के बाद एकादशी तिथि का प्रभाव रहेगा। व्रत पारण अर्थात व्रत तोड़ने का समय 30 मार्च सोमवार को सुबह 6 बजकर 14 मिनट से 7 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। पारण द्वादशी तिथि में ही किया जाना चाहिए। यदि द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले पारण नहीं किया गया तो व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस वर्ष शिववास योग भी बन रहा है जो मंत्र जप और साधना के लिए अत्यंत शुभ है।
शुभ मुहूर्त
29 मार्च 2026 को पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 2 मिनट से 5 बजकर 47 मिनट तक अत्यंत शुभ है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से 1 बजकर 8 मिनट तक पूजा के लिए उत्तम रहेगा। लाभ-उन्नति मुहूर्त और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त भी इस दौरान उपलब्ध होंगे। इन मुहूर्तों में पूजन करने से फल की प्राप्ति शीघ्र होती है।
पूजा सामग्री
पूजा के लिए आवश्यक सामग्री में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर, पीला वस्त्र, पीले फूल, तुलसी के पत्ते, धूप, दीपक, चंदन, अक्षत, पंचामृत, फल, मिठाई, सुपारी, लौंग, इलायची, अगरबत्ती और व्रत कथा की पुस्तक शामिल है। इन सामग्रियों को शुद्ध करके ही उपयोग करें।
पूजन की संपूर्ण विधि
व्रत रखने वाले को दशमी तिथि से ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिए,वहीं एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पीला रंग विशेष रूप से शुभ माना जाता है। घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें,गंगाजल का छिड़काव करें। एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें, हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें। भगवान को अर्घ्य अर्पित करें।
तुलसी के पत्ते अवश्य चढ़ाएं, क्योंकि वे भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। तुलसी के पत्ते एक दिन पहले तोड़कर रख लें। पीले फूल, चंदन, अक्षत, फल, पंचामृत, दूध और तिल चढ़ाएं। धूप-बत्ती और दीपक जलाएं। अगरबत्ती का उपयोग करें। भगवान विष्णु को भोग लगाएं जिसमें मिठाई, फल और तुलसी दल शामिल हों। फिर विष्णु चालीसा, विष्णु सहस्रनाम या हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करें।कामदा एकादशी की व्रत कथा अवश्य पढ़ें या सुनें। पूजन के अंत में आरती करें और भगवान से मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें,शाम को दीपदान करें। पूजन के दौरान भक्ति भाव रखें और मन को शांत रखें।
व्रत के नियम
व्रत के दौरान अनाज, चावल, दाल आदि का सेवन न करें। फलाहार या सात्विक भोजन लें। नमक का उपयोग सीमित रखें। क्रोध, झूठ और निंदा से बचें। रात में सोने से पहले विष्णु भजन सुनें। व्रत रखने वाले को दान-पुण्य अवश्य करना चाहिए। ब्राह्मणों को भोजन कराएं या दान दें। इस व्रत के लाभ अनंत हैं। इससे पापों का नाश होता है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं, स्वास्थ्य अच्छा रहता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
पारण की विधि
30 मार्च को पारण द्वादशी तिथि में ही करें। सुबह उठकर स्नान करें। भगवान विष्णु की पूजा करें। ब्राह्मण को भोजन कराएं या दान दें। फिर फल, दही या सात्विक भोजन से व्रत खोलें। पारण के समय हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करें।
एकादशी के दिन भगवान विष्णु के इन मंत्रों का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी होता है
श्री विष्णु मूल मंत्र: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" इसका अर्थ है, मैं भगवान विष्णु को नमन करती हूं, जो सर्वव्यापक हैं और समस्त जगत के आधार हैं। मंगल मंत्र: "मंगलम् भगवान विष्णु, मंगलम गरुड़ध्वजः। मंगलम् पुण्डरीकाक्षः, मंगलाय तनो हरिः॥" इसका अर्थ है, भगवान विष्णु मंगलकारी हैं, जिनका ध्वज गरुड़ है वे मंगलकारी हैं। कमल के समान नेत्रों वाले भगवान पुंडरीकाक्ष मंगलकारी हैं, वह श्रीहरि हमारा कल्याण करें।
शांति और सफलता के लिए मंत्र, शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।" इसका अर्थ है, जिनकी आकृति परम शांत है, जो शेषनाग की शय्या पर लेटे हुए हैं, जिनकी नाभि में कमल है और जो देवताओं के भी ईश्वर हैं। उन भगवान विष्णु को मैं प्रणाम करती हूं।
पौराणिक कथा: प्रेम और भक्ति की शक्ति
प्राचीन कथा के अनुसार भोगीपुर नगर के राजा पुण्डरीक की सभा में ललित नाम का गंधर्व गायन करता था। अपनी पत्नी ललिता के प्रति अत्यधिक मोह के कारण एक बार सभा में गाते समय उसका ध्यान भटक गया और सुर बिगड़ गए। क्रोधित होकर राजा ने ललित को राक्षस बनने का श्राप दे दिया।
पति को भयानक राक्षस रूप में देख ललिता विचलित हो उठी और विंध्याचल पर्वत पर श्रृंगी ऋषि की शरण में पहुंची। ऋषि के परामर्श पर ललिता ने चैत्र शुक्ल पक्ष की कामदा एकादशी का व्रत पूर्ण श्रद्धा से किया और इसका पुण्य अपने पति को दान कर दिया। इस व्रत के प्रताप से ललित पुनः अपने सुंदर रूप में आ गया और अंततः दोनों को मोक्ष की प्राप्ति हुई।
कामदा एकादशी तिथि और महत्वपूर्ण समय
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 28 मार्च 2026 को सुबह 8 बजकर 45 मिनट पर शुरू होगी। यह तिथि 29 मार्च 2026 को सुबह 7 बजकर 46 मिनट पर समाप्त होगी। उदया तिथि के आधार पर व्रत 29 मार्च रविवार को ही रखा जाएगा। इस दिन सूर्योदय के बाद एकादशी तिथि का प्रभाव रहेगा। व्रत पारण अर्थात व्रत तोड़ने का समय 30 मार्च सोमवार को सुबह 6 बजकर 14 मिनट से 7 बजकर 9 मिनट तक रहेगा। पारण द्वादशी तिथि में ही किया जाना चाहिए। यदि द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले पारण नहीं किया गया तो व्रत का पूर्ण फल नहीं मिलता। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस वर्ष शिववास योग भी बन रहा है जो मंत्र जप और साधना के लिए अत्यंत शुभ है।
शुभ मुहूर्त
29 मार्च 2026 को पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 7 बजकर 48 मिनट से दोपहर 12 बजकर 26 मिनट तक रहेगा। ब्रह्म मुहूर्त सुबह 5 बजकर 2 मिनट से 5 बजकर 47 मिनट तक अत्यंत शुभ है। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12 बजकर 19 मिनट से 1 बजकर 8 मिनट तक पूजा के लिए उत्तम रहेगा। लाभ-उन्नति मुहूर्त और अमृत-सर्वोत्तम मुहूर्त भी इस दौरान उपलब्ध होंगे। इन मुहूर्तों में पूजन करने से फल की प्राप्ति शीघ्र होती है।
पूजा सामग्री
पूजा के लिए आवश्यक सामग्री में भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर, पीला वस्त्र, पीले फूल, तुलसी के पत्ते, धूप, दीपक, चंदन, अक्षत, पंचामृत, फल, मिठाई, सुपारी, लौंग, इलायची, अगरबत्ती और व्रत कथा की पुस्तक शामिल है। इन सामग्रियों को शुद्ध करके ही उपयोग करें।
पूजन की संपूर्ण विधि
व्रत रखने वाले को दशमी तिथि से ही तैयारी शुरू कर देनी चाहिए,वहीं एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। स्वच्छ वस्त्र धारण करें। पीला रंग विशेष रूप से शुभ माना जाता है। घर और पूजा स्थल को अच्छी तरह साफ करें,गंगाजल का छिड़काव करें। एक चौकी पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं। भगवान विष्णु की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित करें, हाथ में जल, फूल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें। भगवान को अर्घ्य अर्पित करें।
तुलसी के पत्ते अवश्य चढ़ाएं, क्योंकि वे भगवान विष्णु को अत्यंत प्रिय हैं। तुलसी के पत्ते एक दिन पहले तोड़कर रख लें। पीले फूल, चंदन, अक्षत, फल, पंचामृत, दूध और तिल चढ़ाएं। धूप-बत्ती और दीपक जलाएं। अगरबत्ती का उपयोग करें। भगवान विष्णु को भोग लगाएं जिसमें मिठाई, फल और तुलसी दल शामिल हों। फिर विष्णु चालीसा, विष्णु सहस्रनाम या हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करें।कामदा एकादशी की व्रत कथा अवश्य पढ़ें या सुनें। पूजन के अंत में आरती करें और भगवान से मनोकामना पूर्ति की प्रार्थना करें,शाम को दीपदान करें। पूजन के दौरान भक्ति भाव रखें और मन को शांत रखें।
व्रत के नियम
व्रत के दौरान अनाज, चावल, दाल आदि का सेवन न करें। फलाहार या सात्विक भोजन लें। नमक का उपयोग सीमित रखें। क्रोध, झूठ और निंदा से बचें। रात में सोने से पहले विष्णु भजन सुनें। व्रत रखने वाले को दान-पुण्य अवश्य करना चाहिए। ब्राह्मणों को भोजन कराएं या दान दें। इस व्रत के लाभ अनंत हैं। इससे पापों का नाश होता है, मनोकामनाएं पूरी होती हैं, स्वास्थ्य अच्छा रहता है और परिवार में सुख-शांति बनी रहती है।
पारण की विधि
30 मार्च को पारण द्वादशी तिथि में ही करें। सुबह उठकर स्नान करें। भगवान विष्णु की पूजा करें। ब्राह्मण को भोजन कराएं या दान दें। फिर फल, दही या सात्विक भोजन से व्रत खोलें। पारण के समय हरे कृष्ण महामंत्र का जाप करें।
एकादशी के दिन भगवान विष्णु के इन मंत्रों का जाप करना अत्यंत कल्याणकारी होता है
श्री विष्णु मूल मंत्र: "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" इसका अर्थ है, मैं भगवान विष्णु को नमन करती हूं, जो सर्वव्यापक हैं और समस्त जगत के आधार हैं। मंगल मंत्र: "मंगलम् भगवान विष्णु, मंगलम गरुड़ध्वजः। मंगलम् पुण्डरीकाक्षः, मंगलाय तनो हरिः॥" इसका अर्थ है, भगवान विष्णु मंगलकारी हैं, जिनका ध्वज गरुड़ है वे मंगलकारी हैं। कमल के समान नेत्रों वाले भगवान पुंडरीकाक्ष मंगलकारी हैं, वह श्रीहरि हमारा कल्याण करें।
शांति और सफलता के लिए मंत्र, शान्ताकारं भुजगशयनं पद्मनाभं सुरेशं, विश्वाधारं गगनसदृशं मेघवर्णं शुभाङ्गम्।" इसका अर्थ है, जिनकी आकृति परम शांत है, जो शेषनाग की शय्या पर लेटे हुए हैं, जिनकी नाभि में कमल है और जो देवताओं के भी ईश्वर हैं। उन भगवान विष्णु को मैं प्रणाम करती हूं।