Shivpuri News, होलाष्टक और मलमास का साया, शिवपुरी में शहनाइयों पर लगा ब्रेक, अब आखातीज का इंतजार

Adhiraj Awasthi

शिवपुरी। अगर आप अगले कुछ दिनों में शादी-ब्याह या गृह प्रवेश की योजना बना रहे हैं, तो रुकिए! आकाश मंडल के ग्रहों की चाल बदल चुकी है। शिवपुरी सहित देश भर में फाल्गुन शुक्ल अष्टमी के साथ ही होलाष्टक का आगाज हो गया है, जिसके चलते सभी मांगलिक कार्यों पर अस्थायी रूप से ब्रेक लग गया है। 24 फरवरी से शुरू हुआ यह प्रतिबंध 2 मार्च (होलिका दहन) तक जारी रहेगा।

क्यों अशुभ माने जाते हैं ये 8 दिन?
ज्योतिषाचार्य पंडित शैलेंद्र मुडिया के अनुसार, होलाष्टक के दौरान आठ ग्रह अपने सबसे उग्र रूप में होते हैं। प्रतिदिन एक विशेष ग्रह की नकारात्मकता चरम पर होती हैं अष्टमी से पूर्णिमा तक चंद्रमा, सूर्य, शनि, शुक्र, गुरु, बुध, मंगल और अंत में राहु का प्रभाव बेहद तीव्र और प्रतिकूल रहता है। मान्यता है कि इन दिनों में शुरू किया गया कोई भी शुभ कार्य ग्रहों की उग्रता के कारण बाधाओं से घिर सकता है, इसलिए सनातन परंपरा में इन्हें वर्जित माना गया है।

मार्च में केवल 7 दिन बजेंगी शहनाइयां
होलाष्टक खत्म होने के बाद मार्च के पहले पखवाड़े में खुशियों की थोड़ी उम्मीद है। लेकिन समय बहुत कम है! मार्च महीने में विवाह के लिए केवल 7 शुभ मुहूर्त उपलब्ध हैं:

शुभ तिथियां: 3, 4, 7, 8, 9, 11 और 12 मार्च।

15 मार्च से फिर लगेगा सूर्य ग्रहण जैसा सन्नाटा
जैसे ही मार्च का आधा महीना गुजरेगा, 15 मार्च (दोपहर 1:08 बजे) से सूर्य का मीन राशि में गोचर होते ही मलमास लग जाएगा। यह स्थिति 14 अप्रैल तक बनी रहेगी। इसका सीधा अर्थ यह है कि मार्च की 12 तारीख के बाद सीधे अप्रैल के मध्य तक कोई भी बड़ा आयोजन नहीं हो सकेगा। अब शादियों का असली सीजन आखातीज (अक्षय तृतीया) से ही दोबारा रफ्तार पकड़ेगा।

भले ही शुभ कार्य वर्जित हों, लेकिन भक्ति के लिए यह समय श्रेष्ठ है। पंडितों का मत है कि इन दिनों में,भगवान विष्णु और नरसिंह भगवान की आराधना से ग्रहों का दोष शांत होता है। हनुमान चालीसा और महामृत्युंजय मंत्र का जाप संकटों से रक्षा करता है।