शिवपुरी। कृषि प्रधान जिला शिवपुरी में रबी सीजन की कटाई से पूर्व प्रशासन ने कमर कस ली है। जिलाधीश कार्यालय के सभाकक्ष में आयोजित एक विशेष बैठक में कलेक्टर रवीन्द्र कुमार चौधरी ने जिले के किसानों, कम्बाईन हार्वेस्टर संचालकों और कृषि संगठनों के प्रतिनिधियों को दो-टूक शब्दों में नरवाई (पराली) न जलाने की हिदायत दी है।
नरवाई मुक्त जिले का विजन
कलेक्टर ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य शिवपुरी को 'नरवाई विहीन जिला' बनाना है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि रबी 2025 के सीजन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नरवाई जलाने की लगभग 750 घटनाएं सैटेलाइट के माध्यम से दर्ज की गई थीं। प्रशासन इस वर्ष इन आंकड़ों को 'शून्य' पर लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
जागरूकता और निगरानी
बैठक में निर्णय लिया गया कि नरवाई जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए केवल आदेश ही नहीं, बल्कि संवाद का सहारा लिया जाएगा और कृषि विभाग के अधिकारी उन गांवों में विशेष ग्राम सभाएं और बैठकें करेंगे जहां पिछले साल आग लगाने की घटनाएं अधिक हुई थीं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि नरवाई जलाने की घटनाओं को छिपाना मुमकिन नहीं है, क्योंकि सैटेलाइट द्वारा इनकी रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। किसानों को सुझाव दिया गया कि हार्वेस्टर से कटाई के बाद अवशेषों को जलाने के बजाय स्ट्रारीपर मशीन का उपयोग करें, जिससे न केवल नरवाई का निपटान होगा बल्कि पशुओं के लिए पौष्टिक भूसा भी तैयार होगा।
प्रशासनिक सख्ती
बैठक के दौरान यह भी साफ कर दिया गया कि समझाइश के बावजूद यदि कोई किसान या हार्वेस्टर संचालक नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पराली जलाने से न केवल वायु प्रदूषण फैलता है, बल्कि जमीन के मित्र कीट मर जाते हैं और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी खत्म हो जाती है।
प्रमुख उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर कलेक्टर दिनेश चंद्र शुक्ला, उप संचालक कृषि पान सिंह करौरिया, उद्योग विभाग के प्रबंधक अरविंद महेश्वरी सहित कृषि विभाग के सहायक संचालक, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी और लगभग 75 हार्वेस्टर संचालक एवं प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।
नरवाई मुक्त जिले का विजन
कलेक्टर ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि हमारा लक्ष्य शिवपुरी को 'नरवाई विहीन जिला' बनाना है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए बताया कि रबी 2025 के सीजन में जिले के विभिन्न क्षेत्रों में नरवाई जलाने की लगभग 750 घटनाएं सैटेलाइट के माध्यम से दर्ज की गई थीं। प्रशासन इस वर्ष इन आंकड़ों को 'शून्य' पर लाने के लिए प्रतिबद्ध है।
जागरूकता और निगरानी
बैठक में निर्णय लिया गया कि नरवाई जलाने की घटनाओं को रोकने के लिए केवल आदेश ही नहीं, बल्कि संवाद का सहारा लिया जाएगा और कृषि विभाग के अधिकारी उन गांवों में विशेष ग्राम सभाएं और बैठकें करेंगे जहां पिछले साल आग लगाने की घटनाएं अधिक हुई थीं। कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि नरवाई जलाने की घटनाओं को छिपाना मुमकिन नहीं है, क्योंकि सैटेलाइट द्वारा इनकी रियल-टाइम मॉनिटरिंग की जा रही है। किसानों को सुझाव दिया गया कि हार्वेस्टर से कटाई के बाद अवशेषों को जलाने के बजाय स्ट्रारीपर मशीन का उपयोग करें, जिससे न केवल नरवाई का निपटान होगा बल्कि पशुओं के लिए पौष्टिक भूसा भी तैयार होगा।
प्रशासनिक सख्ती
बैठक के दौरान यह भी साफ कर दिया गया कि समझाइश के बावजूद यदि कोई किसान या हार्वेस्टर संचालक नियमों का उल्लंघन करता पाया जाता है, तो उसके विरुद्ध कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। पराली जलाने से न केवल वायु प्रदूषण फैलता है, बल्कि जमीन के मित्र कीट मर जाते हैं और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति भी खत्म हो जाती है।
प्रमुख उपस्थिति
इस महत्वपूर्ण बैठक में अपर कलेक्टर दिनेश चंद्र शुक्ला, उप संचालक कृषि पान सिंह करौरिया, उद्योग विभाग के प्रबंधक अरविंद महेश्वरी सहित कृषि विभाग के सहायक संचालक, वरिष्ठ कृषि विकास अधिकारी और लगभग 75 हार्वेस्टर संचालक एवं प्रगतिशील किसान उपस्थित रहे।