सतनवाड़ा @राजेंद्र बाथम। शिवपुरी-ग्वालियर फोरलेन हाईवे स्थित सतनवाड़ा के सिद्ध स्थल "खेरे वाले हनुमान जी" मंदिर पर आज आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। ब्रह्मलीन श्री श्री 1008 श्री भैरों दास महाराज के आशीर्वाद और समस्त क्षेत्रवासियों के सहयोग से शुक्रवार को भव्य कलश यात्रा के साथ 9 कुंडीय श्री राम नाम महायज्ञ एवं रामलीला महोत्सव का विधिवत शुभारंभ हुआ। केसरिया रंग में रंगे सतनवाड़ा में करीब 1 किलोमीटर लंबी जल यात्रा निकाली गई, जिसमें सैकड़ों महिलाएं सिर पर मंगल कलश धारण कर शामिल हुईं।
खंडहर से सिद्ध धाम बनने की गाथा: आधी रात को आज भी सुनाई देती है दिव्य गूँज
इस स्थान का इतिहास जितना प्राचीन है, उतना ही कौतूहल पैदा करने वाला भी है। जानकारों के अनुसार, सदियों पहले यहाँ घनी बस्ती हुआ करती थी, जो कालांतर में सतनवाड़ा कला, खुर्द और श्यामपुर में विभाजित हो गई और यह मंदिर घने जंगलों के बीच सुनसान हो गया।
इस स्थान के पुनरुद्धार की कहानी साल 2007-08 से शुरू होती है, जब बलारपुर माता मंदिर से संत आकाश भारती महाराज यहाँ आए। बाबा के अनुसार, उस समय यहाँ पानी की व्यवस्था नहीं थी और घना जंगल था। उन्होंने अनुभव किया कि रात्रि के समय पहाड़ी पर स्थित प्राचीन 'सिद्ध बाबा' के स्थान से अदृश्य शक्तियाँ आकर हनुमान जी की आरती करती थीं। इसी आध्यात्मिक ऊर्जा को पहचानकर बाबा आकाश भारती ने संत भैरोंदास महाराज को यहाँ आमंत्रित किया और वर्ष 2008 में पहली यज्ञ संपन्न हुई। तब से यह सिलसिला अनवरत जारी है।
11 जनवरी तक बहेगी राम कथा की अमृत धारा
यज्ञ समिति के अनुसार, 11 जनवरी तक चलने वाले इस अनुष्ठान में प्रतिदिन विविध धार्मिक कार्यक्रम होंगे:
4 जनवरी: मंडप प्रवेश एवं पंचांग पूजन।
5 जनवरी: अग्नि स्थापना के साथ यज्ञ का विधिवत प्रारंभ।
राम कथा: प्रतिदिन दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक आचार्य हरिशंकर जी द्वारा कथा का वाचन होगा और रात्रि में भव्य रामलीला का मंचन, रामायण पाठ और श्रीमद भगवत गीता का मूल पाठ।
12 जनवरी को विशाल भंडारा
आगामी 11 जनवरी को महायज्ञ की पूर्णाहुति होगी और 12 जनवरी को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। आयोजन समिति ने जिलेभर के श्रद्धालुओं से इस आध्यात्मिक समागम में शामिल होने की अपील की है।
खंडहर से सिद्ध धाम बनने की गाथा: आधी रात को आज भी सुनाई देती है दिव्य गूँज
इस स्थान का इतिहास जितना प्राचीन है, उतना ही कौतूहल पैदा करने वाला भी है। जानकारों के अनुसार, सदियों पहले यहाँ घनी बस्ती हुआ करती थी, जो कालांतर में सतनवाड़ा कला, खुर्द और श्यामपुर में विभाजित हो गई और यह मंदिर घने जंगलों के बीच सुनसान हो गया।
इस स्थान के पुनरुद्धार की कहानी साल 2007-08 से शुरू होती है, जब बलारपुर माता मंदिर से संत आकाश भारती महाराज यहाँ आए। बाबा के अनुसार, उस समय यहाँ पानी की व्यवस्था नहीं थी और घना जंगल था। उन्होंने अनुभव किया कि रात्रि के समय पहाड़ी पर स्थित प्राचीन 'सिद्ध बाबा' के स्थान से अदृश्य शक्तियाँ आकर हनुमान जी की आरती करती थीं। इसी आध्यात्मिक ऊर्जा को पहचानकर बाबा आकाश भारती ने संत भैरोंदास महाराज को यहाँ आमंत्रित किया और वर्ष 2008 में पहली यज्ञ संपन्न हुई। तब से यह सिलसिला अनवरत जारी है।
11 जनवरी तक बहेगी राम कथा की अमृत धारा
यज्ञ समिति के अनुसार, 11 जनवरी तक चलने वाले इस अनुष्ठान में प्रतिदिन विविध धार्मिक कार्यक्रम होंगे:
4 जनवरी: मंडप प्रवेश एवं पंचांग पूजन।
5 जनवरी: अग्नि स्थापना के साथ यज्ञ का विधिवत प्रारंभ।
राम कथा: प्रतिदिन दोपहर 12 से शाम 4 बजे तक आचार्य हरिशंकर जी द्वारा कथा का वाचन होगा और रात्रि में भव्य रामलीला का मंचन, रामायण पाठ और श्रीमद भगवत गीता का मूल पाठ।
12 जनवरी को विशाल भंडारा
आगामी 11 जनवरी को महायज्ञ की पूर्णाहुति होगी और 12 जनवरी को विशाल भंडारे का आयोजन किया जाएगा। आयोजन समिति ने जिलेभर के श्रद्धालुओं से इस आध्यात्मिक समागम में शामिल होने की अपील की है।
