SHIVPURI NEWS - आहार नली में अटका 5 रूपए का सिक्का, मुंह से खून आने लगा,डॉक्टरों ने निकाला

Bhopal Samachar

शिवपुरी। खेल-खेल में दो वर्षीय मासूम बच्चे ने 5 रूपए का सिक्का निगल लिया। जब सांस लेने और निगलने में दिक्कत हुई और उसके परिजनों को इसकी जानकारी मिली तो उनके होश उड़ गए। आनन-फानन में मासूम को इलाज के लिए श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय शिवपुरी लेकर आए, जहां कैजुअल्टी ड्यूटी डॉक्टर द्वारा वरिष्ठ चिकित्सक नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. मेघा प्रभाकर को फोन कर बच्चे की हालत के बारे में बताया।

यहा नाक कान गला रोग विशेषज्ञ डॉ. मेघा प्रभाकर ने एक्सरा कराया और रविवार की कल सुबह एंडोस्कोपी की मदद से आहार नली में फंसे सिक्के की स्थिति देखी। इसके पश्चात् ऑपरेशन कर उसे बाहर निकाल लिया गया है। बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ्य है।

सांस लेने में होने लगी दिक्कत

दिव्यांश पुत्र जितेन्द्र जाटव 2 वर्ष निवासी ककरवाया शनिवार  की शाम के आसपास 5 रूपए का सिक्का निगल लिया, जिसकी जानकारी लगने पर परिजनों ने उसे उपचार के लिए  श्रीमंत राजमाता विजयाराजे सिंधिया चिकित्सा महाविद्यालय एवं चिकित्सालय शिवपुरी लेकर पहुंचे। बच्चे को सांस लेने तथा निगलने में दिक्कत आ रही थी, बच्चे का एक्स-रे करवाया। बाद में डॉक्टर मेघा प्रभाकर, एस आर डॉक्टर मीनाक्षी गर्ग,एनएसथीसिया की एस आर डॉक्टर साक्षी ने ओटी में एंडोस्कोपी की मदद से आहार नली तथा सांस नली के मध्य फंसे 5 रुपे के सिक्के को पतली चिपटी का सहारा लेकर सफलतापूर्वक निकाला गया।

इस दौरान बच्चे को बेहोश किया गया था ताकि किसी प्रकार की गंभीर स्थिति निर्मित न हो। सफलता के साथ चंद मिनटों के भीतर ही आहार नली तथा सांस नली के मध्य फंसे सिक्के को निकालने में सफलता मिलने पर ओटी में उपस्थित सभी चिकित्सक, स्टाफ तथा परिजनों ने राहत की सांस ली।

ईएनटी रोग विशेषज्ञ डॉ. मेघा प्रभाकर ने बताया कि बच्चे की हालत बहुत ही नाजुक थी इसकी सूचना हमने अपने कॉलेज अधिष्ठाता डॉक्टर के.बी. वर्मा, अधीक्षक डॉक्टर आशुतोष चौऋषि सर को बताया और अधिष्ठाता के निर्देशन में रविवार की सुबह हमारी डॉक्टर की टीम द्वारा सिक्के को बहार निकाल दिया है अब वह स्वस्थ है।

मां पिंकी बोली इकलौता है मेरा मासूम अगर इसे कुछ हो जाता तो मैं भी नहीं जी पाती मेरे बच्चे ने खेल खेल में सिक्के को निगला और उसके बाद उसके मुंह से खून आना शुरू हो गया था मैं तो घबरा ही गई थी,अपने बच्चों को तत्काल मेडिकल कॉलेज लेकर आई डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने एक्सरा कराया और ऑपरेशन कर सिक्के को बाहर निकाला। अब जाकर मेरी जान में जान आई है डॉक्टर ने भगवान बनकर मेरे मासूम की जान बचाई है।
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