SHIVPURI NEWS - वन भूमि पर हो रही है खेती, स्थानीय स्तर पर अधिकारियों का साइलेंट पार्टनरशिप, पढिए

Bhopal Samachar
मोहन सिंह @ शिवपुरी जिले की करैरा तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम सानोगी में स्थित वन भूमि पर लगभग 70 बीघा शासकीय जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर भूमि को जोत कर फसल की जा रही है। जिसकी जानकारी स्थानीय वन अमले से लेकर करेरा रेंजर अनुराग तिवारी को होने के बाद भी शासकीय भूमि पर खेती करने वालों के खिलाफ आज तक कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।

इससे साफ जाहिर होता है कि कहीं न कहीं वन अमले की भी खुले तौर पर मिली भगत दिखाई दे रही हैं। एक तरफ सरकार प्रदेश सरकार वृक्षारोपण कराकर पर्यावरण को संतुलित बनाने में लगी हुई हैं, लेकिन वन अमला अपने वृक्षों और नर्सरी की जमीन पर खेती कराने में नजर आ रहा है।

स्थानीय ग्रामीण ने एक शिकायती आवेदन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई है कि वन भूमि पर लगभग 70 बीघा भूमि पर अवैध रूप से खेती की जा रही है। वर्तमान में उक्त लोगों ने मूंगफली की फसल खड़ी हुई है।

शिकायती आवेदन में बताया गया है कि सानोगी गांव में कैलाश, मैहरवान, रमेश, हईलाल पुत्र सिरनाम गडरिया ने पिछले कई सालो से वन विभाग की लगभग 70 बीघा जमीन पर कब्जा किया हुआ है और खेती की जा रही है।

यहां भी है वन विभाग की जमीन पर कब्जा
जिले की पिछोर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम वीरा के पास स्थित वन भूमि पर लगभग 150 बीघा शासकीय जमीन पर अवैध रूप से कब्जा कर दबंग खेती कर रहे है जब अखबारों में विभाग के मामले प्रकाश होते है तो विभाग देखने दिखाने कार्यवाही कर देता है लेकिन कार्यवाही के कुछ दिन बाद ही दबंग फिर से खेती करते लगते है। और फिर विभाग चुप बैठकर जमीन के हरे भरे पेड़ों को कटता देखता रहता है।

स्थानीय ग्रामीणों ने एक शिकायती आवेदन के माध्यम से शिकायत दर्ज कराई थी कि लगभग 150 बीघा जमीन पर तलैया क्षेत्र,अचार वाला डांढा एवं बेरघाट वाला क्षेत्र पर अवैध रूप से ग्राम के दबंग एवं राजनैतिक प्रभाव वाले व्यक्तियों द्वारा कब्जा कर वन भूमि को जोत कर फसल की जा रही हैं।

खेती से इस तरह होती है। विभाग के अधिकारियों की जेब गर्म
विन विभाग की भूमि पर पहले गांव के दबंग कब्जा करते है इसके बाद उस भूमि के पेड़ पौधों को काट देते है। और फिर जमीन को ट्रैक्टर से जोत लेते है इसके बाद उसे हिटेची से समतल करते है और फिर उसमें फसल की जाती है जिससे फसल करने वाले को तो फायदा होता ही है। साथ ही वह अधिकारियों की भी भरपूर जेब गर्म कर देता है जिससे हर साल वह उस जमीन पर खेती कर सके और फिर विभाग उस जमीन पर हो रही खेती को नुकसान पहुंचा सके और ना ही उसे कब्जा मुक्त करा सके।
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