SHIVPURI में प्रवासी पक्षी नहीं आए, खतरे का संकेत, नेशनल पार्क मैनेजमेंट परेशान - Shivpuri News

शिवपुरी की चांदपाठा झील  को हाल ही में रामसर साइट का दर्जा प्राप्त हुआ है। इसका अर्थ होता है कि यह झील प्राकृतिक है जहां पर पशु पक्षी अपना जीवन तलाशते हैं। इसी के कारण शिवपुरी में 100 साल से प्रवासी पक्षी आ रहे थे परंतु इस साल नहीं आए। यह एक खतरे का संकेत है। 

हर साल सर्दियों के मौसम में प्रवासी पक्षियों का डेरा शिवपुरी की चांदपाठा झील में रहता था, लेकिन इस बार जनवरी माह आधा निकलने के बाद भी यह पक्षी नहीं आए। माधव नेशनल पार्क प्रबंधन भी इस बार प्रवासी पक्षियों के न आने के कारण ढूंढ रहा है, वहीं चांदपाठा झील में प्रवासी पक्षियों की अठखेलियां न होने से वहां पर भी वीरानी सी पसरी हुई है। प्रवासी पक्षियों के शिवपुरी न आने के पीछे कई कारण होने की बात सीसीएफ स्वीकार रहे हैं।

शीत काल शुरू होते ही शिवपुरी के आसमान में कतारबद्ध होकर प्रवासी पक्षी उड़ते नजर आते थे, लेकिन इस बार जनवरी माह आधा गुजरने के बाद भी न तो यह पक्षी आसमान में नजर आए और न हीं यह माधव नेशनल पार्क में स्थित चांदपाठा झील या आसपास के तालाबों में नजर आ रहे। चूंकि चांदपाठा झील बड़े क्षेत्र में विस्तृत है, जिसके अलग-अलग किनारों पर यह प्रवासी पक्षी सुबह से शाम तक न केवल नजर आते थे. बल्कि आसपास के वातावरण को भी अपनी चहचहाहट से गुंजायमान करते थे। इस बार कुछ देशी बगले ही झील में नजर आ रहे हैं, जबकि हर साल साइबेरियन डक से लेकर कई तरह के विदेशी पक्षी शिवपुरी आया करते थे।

झील हुई प्रदूषित, जलकुंभी के कारण पानी नजर नहीं आ रहा हैं

माधव नेशनल पार्क में मौजूद चांदपाठा झील में शहर के नालों से होकर जाने वाली सीवर की गंदगी के चलते न केवल यह झील प्रदूषित हो रही है, बल्कि इसमें तेजी से फैल रही जलकुंभी की वजह से अब इसमें पानी भी नजर नहीं आ रहा। चूंकि प्रवासी पक्षियों को बहुत ऊंचाई से पानी नजर आने पर वे वहां उतरते हैं, लेकिन शिवपुरी की चांदपाठा झील में अब हर तरफ जलकुंभी होने की वजह से पानी नजर नहीं आता। चूंकि झील के सभी किनारों पर जलकुंभी फैली हुई है, इसलिए प्रवासी पक्षियों के तैरते हुए किनारों पर निकलने को भी जगह नहीं बची है। यही वजह है कि इस बार शिवपुरी में प्रवासी पक्षियों ने अपनी आमद दर्ज नहीं कराई।

शिवपुरी की चांदपाठा झील में साइबेरियन पक्षियों के अलावा सुर्खाब का जोड़ा भी यहां पर देखा जा चुका है। जबकि यह जोड़ा दुर्लभ पक्षियों की श्रेणी में होने की वजह से यदा-कदा ही नजर आता है। लेकिन शिवपुरी की आबोहवा व चांदपाठा झील उस समय तक इतनी साफ-सुथरी हुआ करती थी कि प्रवासी पक्षी यहां पर अपना डेरा डालते थे।

इनका कहना हैं
प्रवासी पक्षियों के शिवपुरी न आने के पीछे कई कारण हो सकते हैं, उनमें जलकुंभी भी एक कारण हो सकता है। चूंकि झील के सभी किनारों पर जलकुंभी है, इसलिए पक्षियों के तैरते हुए झील से बाहर निकलने को भी कहीं जगह नहीं है।
उत्तम शर्मा, सीसीएफ, माधव नेशनल पार्क शिवपुरी