देश की जनसंख्या को कंट्रोल कर रही है, आशा-उषा कार्यकर्ता, काम बंद- हड़ताल शुरू- Shivpuri News

NEWS ROOM
शिवपुरी।
जिले के संविदा स्वास्थ्य कर्मी अपनी 2 सूत्रीय मांगों को लेकर पिछले 15 दिन से हड़ताल पर है। संविदा स्वास्थ्य कर्मी ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य की रीड मानी जाती हैं इनके हड़ताल पर जाने के कारण ग्रामीण क्षेत्रो में स्वास्थ्य सेवाएं चरमरा गई। अब ग्रामीण क्षेत्र में कार्य करने वाली आशा उषा कार्यकर्ता और आशा सुपरवाईजर भी हड़ताल पर चली गई हैं।

शिवपुरी जिले की लगभग दो हजार आशा.उषा एवं ढाई सौ के लगभग आशा सुपरवाइजर कलमबंद हड़ताल पर चली गई हैं। शुक्रवार को सैड़कों आशा उषा कलेक्ट्रेट कार्यालय पर एकत्रित हुईं। जहां से उन्होंने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए एक माह की कलम बंद हड़ताल की शुरुआत की।

आशा-उषा कार्यकर्ताओं का कहना है कि मध्यप्रदेश सरकार हमारी समस्याओं की ओर ध्यान नहीं दे रही हैए जबकि आशा उषा कार्यकर्ताओं ने जी तोड़ मेहनत की है। मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्यु की दर में काफी कमी आई है। इसके अतिरिक्त जनसंख्या नियंत्रण में भी आशा उषा कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके बावजूद सरकार आशा कार्यकर्ताओं को हो रही परेशानियों की ओर ध्यान नहीं दे रही है।

कोविड के दौरान भी आशा कार्यकर्ताओं ने जिले में वैक्सीनेशन में काम किया था। परंतु इसका भुगतान अब तक उन्हें नहीं मिल सका है। जिले में आयुष्मान कार्ड बनाने के आशा उषा कार्यकर्ताओं ने आंगनबाड़ी केंद्रों पर क्षेत्र की जनता को बुलाकर आयुष्मान कार्ड बनवाए थे। इसके परिणाम भी सरकार को आंकड़ों में बेहतर मिले थेए परंतु जिन महिलाओं के आयुष्मान कार्ड बनवाए गए थे। उन तक आयुष्मान कार्ड नहीं पहुंच सके हैंए जिससे लोगों के मन में आशा उषा कार्यकर्ताओं की विश्वास कम हुआ। इस समस्या का भी निपटारा आज दिनांक तक जिला प्रशासन के द्वारा नहीं करवाया गया है।

यह है प्रमुख मांगें

आशा उषा एवं आशा सुपरवाइजर को स्वास्थ्य विभाग का कर्मचारी घोषित किया जाए। आशा उषा कार्यकर्ताओं को दस हजार रुपए और आशा पर्यवेक्षकों को बीस हजार रुपए निश्चित मानदेय किया जाए। आशा ऊषा कार्यकर्ताओं को आरोग्य केंद्र संचालित करने के लिए अलग से कक्ष दिया जाए। आशा उषा कार्यकर्ताओं की समय सीमा निर्धारित की जाए। आशा उषा कार्यकर्ताओं को एंड्राइड मोबाइल उपलब्ध कराया जाए। आशा उषा कार्यकर्ताओं को शहरी एवं ग्रामीण दोनों को समान वेतन दिया जाए। आशा उषा पर्यवेक्षक को आकस्मिक आपदा होने पर दस लाख रुपए का अनुदान दिया जाए।