सांख्य सागर झील: 73 प्रजाति के पक्षी 19 प्रजाति की मछली,होगा शोध,मिलेगा यूनेस्को से फंड

शिवपुरी। माधव नेशनल पार्क अब शिवपुरी के लिए वरदान की भूमिका निभाने वाला है। टाइगर सफारी की स्वीकृति पार्क को मिल चुकी है,फ्री रेंज टाइगर लाने की तैयारी भी शुरू हो चुकी है,इसी क्रम में नेशनल पार्क की सीमा में आने वाली सांख्य सागर झील को रामसर साइट वेटलैंड दर्जा मिल चुका है। यह मप्र की दूसरी झील है।

सांख्य सागर झील को रामसर साइट का दर्जा मिलने से शिवपुरी की पहचान अब अंतरराष्ट्रीय नक्शे पर बन चुकी है। झील में जैव विविधता को कारण सांख्य सागर झील को यह दर्जा मिला हैं,अब यह झील अंतरराष्ट्रीय धरोहर हैं इसके संरक्षण के लिए यूनेस्को से फंडिंग होगी। इस झील की अंतरराष्ट्रीय पहचान से पर्यटकों की संख्या तो बढ़ेगी साथ ही  ही यह शोध के नए केंद्र के रूप में भी उभरेगा। पर्यावरण व पक्षी विज्ञानी शोध के लिए ऐसे स्थानों का चयन करते हैं जहां पर जैव विविधता अधिक हो।

पक्षियों के साथ वहां पर सरीसृपों की संख्या भी पर्याप्त हो। इसके लिए रामसर साइट सबसे बेहतर लोकेशन होती है क्योंकि इसके चयन का पैमाना ही जैव विविधता होती है। ऐसे में अब यहां पर देशभर के पर्यावरण व जीव विज्ञानी आकर शोध कर सकेंगे।

चूंकि यह भोपाल के भोजताल के बाद प्रदेश की दूसरी ही वेटलैंड है इसलिए यहां पर अधिक शोधार्थियों के आने की संभावना है। इसके लिए नेशनल पार्क प्रबंधन भी उन्हें सुविधाएं देने योजना तैयार करेगा। दूसरी ओर अब इस झील के संरक्षण के लिए माधव राष्ट्रीय उद्यान को यूनेस्को से फंड भी मिलेगा क्योंकि अब यह अंतरराष्ट्रीय धरोहर बन चुकी है। अधिकारियों के अनुसार यह स्पष्ट नहीं है कि अभी कितना फंड सालाना मिलेगा। इस फंड से झील के संवर्धन के लिए काम किया जा सकेगा।

प्रदेश में पहली वेटलैंड साइट भोपाल के भोजताल को यह दर्जा वर्ष 2002 में मिला था। इसके वेटलैंड में शामिल होने के पीछे यहां की जैव विविधता कारण थी। इंटरनेट मीडिया से प्राप्त जानकारी के अनुसार यहां पर सफेद सारस, काली गर्दन वाला सारस जैसे कई दुर्लभ पक्षी देखे जाते थे। यह शोधार्थियों के बीच भी आकर्षण का केंद्र होते थे। वेटलैंड बनने के बाद झील के संवर्धन के लिए भी काफी काम किया गया।

यहां आसपास जंगल तब बसाए गए ताकि अंतरराष्ट्रीय महत्व की यह धरोहर सुरक्षित रह सके। अब ऐसे ही प्रयास सांख्य सागर के लिए किए जाएंगे। भोपाल और शिवपुरी के बीच करीब 320 किमी की दूरी है। ऐसे में जो शोधार्थी भोपाल आएंगे वे शिवपुरी भी आ सकते हैं।

73 पक्षी और 19 मछलियों की प्रजाति
157 हेक्टेयर में फैली सांख्य सागर झील में 73 प्रजाति के पक्षी और 19 प्रजाति मछलियों की पाई जाती हैं। यहां पर बार हेडेड गोस, सौरस क्रेन, कामन पोकार्ड, इंडियन स्कीमर, रिवर टेर्न आदि खासतौर पर पाए जाते हैं। हर साल यहां पर बड़ी संख्या में प्रवासी पक्षी भी आते हैं।

सीसीएफ सीएस निनामा का कहना है कि रामसर साइट का दर्जा मिलने के बाद यहां गतिविधियां बढ़ेंगी। यदि शोधार्थी आते हैं तो उन्हें यहां शोध के लिए सुविधाएं भी दी जाएंगी।