जनसुनवाई में शिक्षक को एडीएम ने हडकाया, गार्ड ने बाहर का रास्ता दिखाया - Shivpuri News

शिवपुरी। मंगलवार को कलेक्ट्रेट में हुई जनसुनवाई में आम दिनों के मुकाबले कम लोग पहुंचे, लेकिन फिर भी गहमागहमी वाली स्थिति रही। एक शिक्षक ने सर्विस बुक और सातवें वेतनमान न मिलने के कारण तीखे अंदाज में अधिकारियों से बात की। तो दूसरी और फांसी लगाकर आत्महत्या करने वाले शिक्षा विभाग के बाबू वृंदावन शर्मा के बेटे ने भी जांच पूरी न होने को लेकर अधिकारियों को खरी-खरी सुनाई।

जनसुनवाई में पहुंचे शिक्षक हरिवंश शरण दुबे ने आरोप लगाए कि संकुल प्राचार्य अरविंद त्रिपाठी उनके ईर्ष्या रखते हैं और उनका सातवां वेतनमान सहित सर्विस बुक की फोटोकॉपी नहीं दे रहे हैं। दुबे ने बताया कि 2016 में वेतन वृद्धि लगना थी, लेकिन नहीं लगाई गई। 2019 से डीए नहीं दिया जा रहा है।

आवास दिया नहीं और आवास भत्ता काट लिया। हरिवंश ने बताया कि 16 अक्टूबर 2020 को वचन पत्र भी दे दिए गए है लेकिन उसे परेशान करने की नियत से वचन पत्र पर हस्ताक्षर न होने का बहना बना रहे हैं। जबकि उसने हस्ताक्षर किए थे। वहीं निलंबन अवधि भी स्पष्ट नहीं कर रहे हैं। माह जुलाई 2017 का भी वेतन नहीं दिया गया।

सर्विस बुक की फोटोकॉपी लेने के लिए भी सीएम हेल्पलाइन से लेकर कई बार आरटीआइ लगा चुका हूं लेकिन कुछ नहीं हुआ। शिक्षक दुबे का स्वर थोड़ा ऊंचा था और अधिकारी उनकी समस्या सुनने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे थे। अधिकारियों ने कलेक्टर के आदेश का हवाला दिया तो दुबे ने कहा कि कलेक्टर हमारे अधिकारी नहीं हैं, हमारा अधिकारी डीईओ है। इसके बाद एडीएम के सुरक्षाकर्मी ने शिक्षक को पकड़कर जनसुनवाई कक्ष से बाहर कर दिया।

मेरे पिता निर्दोष फिर भी जान चली गई, उनके गुनेहगार अब भी बाहर घूम रहे

जनसुनवाई में लिपिक स्व. वृंदावन शर्मा की पत्नी व बच्चे पहुंचे। वृंदावन शर्मा की पत्नी ने बताया कि गणक के पद पर पदस्थ वृंदावन शर्मा एवं कलेक्टर कार्यालय में पदस्थ बसंत पवार को न्यायालयीन प्रकरण में लापरवाही एवं अनुशासनहीनता के कारण निलंबित कर दिया गया था।

मामले को लेकर कलेक्टर कार्यालय के आदेश पर विभागीय जांच के आदेश दिए गए थे जबकि विभागीय जांच के आदेश से पूर्व स्वर्गीय वृंदावन शर्मा द्वारा आरोप पत्र का जवाब दिया जा चुका था। इसको तत्कालीन जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा नजरअंदाज कर दिया गया और निर्दोष होने के बाद भी उनको आरोपी माना गया।

उन्होंने कर्मचारियों द्वारा जांच के नाम पर रिश्वत लेने के आरोप भी लगाए। वृंदावन शर्मा के बेटे ने कहा कि पिता के अंतिम आत्महत्या लेख में तीनों आरोपितों के विरुद्ध कार्रवाई करने की बात कही गई थी। 16 ऑडियो क्लिप भी पेन ड्राइव भी जमा कराई थी क्योंकि आत्महत्या लेख और पेन ड्राइव में वित्तीय घोटाले स्पष्ट साक्ष्य थे। इस कारण विभागीय जांच को गुमराह कर बंद कर दिया गया। उसने कहा कि मेरे पिता निर्दोष होते हुए भी मर गए और उनके आरोपित अभी भी खुले में घूम रहे हैं।