शिक्षक समाचार: शिक्षको के ऐरियर की राशि भुगतान पर भारी ठप्पा और टोकन का भार- Shivpuri News

संतोष शर्मा, शिवपुरी।
बहुप्रतिक्षित सातवें वेतनमान के लिए शिक्षकवर्ग काफी लम्बे समय से संघर्षरत रहा है परंतु जब सरकार द्वारा वेतनमान स्वीकृत किया जा चुका है वित्त विभाग ने भी आदइेश जारी कर दिया उसके बाद भी जिले के पचास प्रतिशत से अधिक शिक्षकों को एरियर राशि की प्रथम किश्त का भुगतान आज तक उनके खातों में न पहुंचना एक रहस्य बना हुआ था, आज हम आपकों बताते हैं कि आखिर भुगतान क्यों नहीं किया गया और क्यों आधे से अधिक शिक्षक एरियर राशि से मोहताज हैं।

वित्त विभाग भोपाल से जारी आदेश -

राज्य सरकार के आदेश के बाद भी शिक्षकों को नवम्बर माह में प्रदान किए जाने वाले ऐरियर की 50 प्रतिशत राशि का भुगतान आज दिनांक तक नहीं किया जा सका हैं। जबकि वरिष्ठ अधिकारियों एवं राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल के स्पष्ट निर्देश दिए जा चुके थे कि बिना किसी लापरवाही के ऐरियर की प्रथम किस्त का भुगतान नवम्बर माह में होना था।

जानकारी के अनुसार  मध्य प्रदेश शासन वित्त विभाग बल्लभभवन भोपाल से जारी पत्र क्रमांक 1879/1072/ नियम/चार/भोपाल दिनांक 22 अक्टूबर 2021में समस्त विभागाध्यक्षों  को यह आदेशित किया गया था कि अक्टूबर माह की वेतन के साथ प्रथम किस्त का भुगतान नवम्बर 2021 में किया जाना हैं और जो कर्मचारी 1 मार्च 2022 से पहले सेवानिवृत्त हो रहे हैं उन्हें एक मुश्त ऐरियर की राशि का भुगतान किया जाए। परन्तु शिक्षा विभाग का ढुलमुल एवं लापरवाही पूर्ण रवैया ने शिक्षकों की होने वाले ऐरियर के भुगतान पर लालच का अंकुश लगा दिया हैं।

राज्य कर्मचारी संघ के जिलाध्यक्ष धर्मेन्द्र रघुवंशी ने जानकारी देते हुए बताया कि जिले के दो दर्जन के करीब शंकुल केन्द्रों पर लगभग 50 प्रतिशत से अधिक शिक्षकों का ऐरियर की प्रथम किस्त के भुगतान जारी नहीं किए गए हैं। जिसका कारण कई स्थानों पर शिक्षकों से अवैध बसूली किया जाना भी सामने आ रहा हैं।

उन्होंने बताया कि शिक्षा विभाग में आजकल ठप्पा एवं टोकन के दो शब्द प्रचलन में आ गये हैं जैसे कि ठप्पा लगवाने के लिए टोकन अनिवार्य हो गया है, कुछ दलाल किश्म के लोग जगह-जगह सक्रीय हैं जो शिक्षकों से ठप्पा लगाने के नाम पर टोकन की मांग करते नजर आ रहे हैं।

इसके खिलाफ राज्य कर्मचारी संघ जिला शिवपुरी के तत्वाधान में दिनांक 2 नवम्बर 2021 को जिला शिक्षा अधिकारी को सौंपे पत्र में स्पष्ट उल्लेख किया था कि जिले के अधिकांश संकुल केन्द्रों खुलेआम 7 वें वेतन मान की किस्त का भुगतान करने के एवज में  शिक्षकों से रिश्वत के रूप में 1500 से 2000 रूपए की राशि की मांग की जा रही हैं। जिन लोगों ने सुविधा शुल्क जमा कर दी हैं उनका 7 वेतन मान की किस्त निकाल दी गई हैं, लेकिन जिन कर्मचारियों ने सुविधा शुल्क नहीं दी हैं उनकी राशि आज भी लटकी हुई हैं।