22 साल बाद सरकारी अस्पताल में फिर खून के सौदागर सिस्टम पर हावी, वीडियो वायरल - Shivpuri News

शिवपुरी। जिला अस्पताल शिवपुरी की लापरवाही की खबरे अक्सर समाचार पत्रो में प्रकाशित होती रहती हैं,लकिन इस खबर का विषय पूरे 22 साल बाद प्रकट हुआ हैं,यह शर्मसार खबर खून की खरीद फरोक्त से जुडी हुई हैं,रक्त दान किसी को जीवन दान की प्रेरणा को लकर शहर के कई लोग ब्लड डोनेट करते हैं और कई लोग इस ब्लड का सौदा भी कर रहे हैं,लेकिन सबसे बडी हैरानी वाली बात यह है कि अस्पताल प्रबधंन को इसकी भनक तक नही हैं।

शिवपुरी की सोशल पर 3 वीडियो वायरल हो रही हैं, और यह वीडियो जिला अस्तपाल के बताए जा रहे हैं।
पहला वीडियोः साफ दिख रहा है कि एक व्यक्ति पैसे लेकर ब्लड दिलवाने की बात कर रहा है। डोनर को बुलाकर बात करवाने की बात कहकर वह बाहर निकल जाता है।
दूसरा वीडियोः वीडियो में दिख रहा व्यक्ति ब्लड मुहैया कराने की बात करता हुआ कह रहा है कि आपको कब चाहिए ब्लड व्यबस्था हो जाएगी। इस बीच वह अपने आपको पाक साफ़ बताते हुए कहता है कि मुझे कुछ नहीं चाहिए। आप ब्लड डोनेट करने वाले से बात कर लेना कि कितने रुपये लगेंगे।
तीसरा वीडियोः जो व्यक्ति पहले वीडियो में खून दिलाने की बात कह रहा था वह एक महिला से भी बात कर रहा था। जब उस महिला से बात की गई तो उसने कहा कि मैंने उसी से खून खरीदा है। अब जो पैसे लगेंगे वो हम उसे दे देंगे।

बताया जा रहा हैं कि शिवपुरी के अस्पताल में ब्लड को बेचने का काम बडी ही सफाई से किया जा जाता हैं,पूरा का पूरा गैंग सक्रिय हैं। यह गैंग ग्रामीण क्षेत्रो से ब्लड बेचने में अधिक इंट्रेस्ट रहेत हैं क्यो कि जिला अस्तपाल में ग्रामीण क्षेत्रो के मरीज अधिक भर्ती होते हैं,इनमें से जिस भी मरीज को ब्लड की आवश्यकता होती हैं,चूकि शहर में उनकी अधिक जान पहचान नही होती है ओर उनको ब्लड डोनर नही मिलता इस कारण उनकी मजबूरी हैं अपने मरीज की जान बचाना इस कारण वह तत्कला सौदा कर लेते हैं।

खून के सौदे में अस्पताल प्रबंधन का वह धडा मिला हुआ हैं जो आउटसोर्स कर्मचारी हैं। इन कर्मचारियो को ज्ञान होता है कि इस मरीज को ब्लड की आवश्यकता हैं। वह इस गैंग को लोगो की इसकी सूचना देते हैं कि इस मरीज को खून की आवश्यकता हैं। गैंग का सदस्य इस मरीज के परिजन से मिलता हैं और बातो बातो में बता देता हैं कि अगर आपके पास ब्लड डोनर नही है तो वह पैसो से ब्लड की व्यवस्था करा सकता हैं,मुझे कुछ नही चाहिए मै तो सिर्फ मानवता के कारण आपकी मदद कर रहा हूं।

गैंग का मार्केटिंग वाला दलाल रक्तदाता और मरीज के स्वजन की सीधी डील करा देता है। रक्त के बदले में मरीज के स्वजन से दो से तीन हजार रुपये एक यूनिट के लिए जाते हैं। मरीज की जान संकट में होती है इसलिए मजबूर ग्रामीण रुपयों की व्यवस्था कर अपने स्वजन की जान बचाते हैं।

वीडियो में ऑपरेशन थियेटर के पास माौजूद एक व्यक्ति खून दिलाने की बात कह रहा है। वह वीडियो में साफ कहता हुआ सुनाई दे रहा है कि आप बताओ रक्तदाता बाहर आ जाएगा। उससे ही बात कर लेना ढाई या तीन हजार में जो तय हो जाए। उल्लेखनीय है कि दो दशक पहले जिला अस्पताल में ऐसा ही बड़ा गिरोह पकड़ाया था जिस पर कार्रवाई भी हुई थी। इस मामले में जिला अस्पताल प्रबंधन पुलिस कार्रवाई कराने की बात कह रहा है।

गर्भवती महिलाओं को होती है ज्यादा जरूरत

खून की सबसे ज्यादा जरूरत उन गर्भवती महिलाओं को होती हैं जिनके शरीर में प्रसव प्रक्रिया के दौरान खून की कमी हो जाती हैं। प्रसूता को तत्काल खून चढ़ाए जाने की आवश्यकता होती है। जैसे ही खून की मांग आती हैं वैसे ही तत्काल गिरोह के लोग सक्रिय हो जाते हैं और खुद व खुद आगे बढ़कर प्रसूता के स्वजनों से संपर्क करके उन्हें यह भरोसा दिला देते हैं कि तुम्हारे मरीज की जान बच जाएगी। जच्चा-बच्चा की जान बचाने स्वजन भी खून खरीदने तैयार हो जाते हैं।

22 साल बाद फिर उजागर ब्लड की खरीद फरोख्त

22 साल पहले शिवपुरी जिला चिकित्सालय ब्लड की खरीद फरोख्त के लिए बड़ा बदनाम था। उस समय ब्लड बैंक के प्रभारी डॉ. छागला थे जो ब्लड बेचने का काम खुलेआम खुद के संरक्षण में कराते थे। उस समय श्रीधर नाम का एक व्यक्ति सामने आया था जिसने 100 रुपये में खून खरीदने की बात स्वीकार की थी। इसके बाद डॉ. छागला भी यह कहते हुए सुनाई दिए कि बेचा तो बेचा कोई क्या कर लेगा। मामला उजागर होते ही इस मामले में मजिस्ट्रियल जांच (एसडीएम स्तर) बैठी जिसमें श्रीधर और अन्य लोगों के बयान लिए गए। इस मामले में जिम्मेदारों के खिलाफ कार्यवाही भी की गई। 22 साल बाद फिर खून की खरीद फरोख्त उजागर हुई हैं।

इनका कहना है...
पहले भी इस तरह का गैंग एक्टिव हुआ था जिसके बाद उन पर कोतवाली पुलिस ने कार्रवाई की थी। अब फिर से इसकी शिकायत पुलिस में की जा रही है। ऐसा काम करने वालों को किसी भी हाल में नहीं छोड़ा जाएगा।
डॉ. राजकुमार ऋषिश्वर, सिविल सर्जन।

इसका वीडियो मेरे संज्ञान में आया था जिस पर सिविल सर्जन को निर्देश किए हैं कि इसकी पूरी जांच कर अवगत कराएं। इसमें यदि कोई विभागीय कर्मचारी शामिल हुआ तो उस पर भी कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यदि पुलिस की सहायता लगी तो कानूनी कार्रवाई भी कराएंगे।
डॉ. पवन जैन, सीएमएचओ।