अपने स्कूल को बचाने की जिद: सरकार ने नहीं सुनी तो ग्राम-सरकार ने ही बना डाली 100x200 फुट के कैंपस की बाउंड्री वॉल - Pohri News

संतोष शर्मा शिवपुरी। ग्रामीण क्षेत्रो में विकास का दम भरने वाली सरकार की दाबे जमीन स्तर पर धरासाई हो रहे हैं। एक ऐसा मामला सामने आया है जिसमें सरकार ने नही सुनी तो ग्राम-सरकार ने खुद ही निर्णय लेकर अपने गांव के स्कूल को बचाने की जिद में अपने ही स्कूल के कैंपस की 100 बाई 200 की बाउंड्री वॉल का निर्माण कर डालाा।

मामला पोहरी ब्लॉक की नौन्हेटा ग्राम पंचायत के पटपरी प्राथमिक स्कूल का है जहां गांव के ही बच्चे पढ़ने आते हैं, वर्षों से बाउंड्री वॉल की मांग को लेकर ग्रामीणों द्वारा ग्राम पंचायत में ठहराव प्रस्ताव भी डाला गया एवं अधिकारियों से मांग भी की गई परंतु जब कोई सुनवाई नहीं की गई तो ग्रामीणों ने मिलकर खुद ही दीवार बना डाली जिसमें ब्लॉक में सामाजिक विषयों पर काम कर रही संस्था विकास संवाद ने इसमें सहयोग किया

ग्राम पटपरी आदिवासी बाहुल्य स्कूल हैं,इस स्कूल के परिसर की बाउंड्री वॉल न होने के कारण स्कूल की सुरक्षा पर सवाल खडे होते थे। सुरक्षा के इंतजाम ने होने के कारण मवेशी स्कुल तक पहुंच जाते थे और प्रतिदिन गंदगी करते थे और साथ में स्कूल के गेटो को क्षतिग्रस्त करते थे। ग्रामीणो ने इस स्कूल को अपने बच्चो का स्कूल माना और इसकी सुरक्षा को लेकर समुदाय के साथ बैठक की।

बैठक में समुदाय द्वारा स्कूल की बाउंड्री वॉल करने पर बात की गई। तेज सिंह आदिवासी ने कहा कि कि हमने इस स्कूल की बाउंड्री वॉल के लिए ग्राम सभा की बैठकों भी प्रस्ताव रखे हैं और अधिकारियां को भी बताया है, परन्तु आज तक यह बाउंड्री वॉल नही हुई है। अब इसके लिए हमको ही आगे आने की जरूरत है, क्योंकि स्कूल में हमारे ही बच्चे पढ़ते हैं। इस पर पूरे समुदाय की सहमति बनी और गांव के पास से एक नाला निकला है, उसमें से पत्थर खोदकर स्कूल की बाउंड्री वॉल करने का निर्णय लिया गया।

जब तय कर लिया तो इसकी नापातौली की गई तो स्कूल का परिसर 100 बाई 200 का निकला एंव 2 फुट चौडाई और लगभग 3 फुट उंचाई की बाउन्ड्री वॉल बनाने का निर्णय लिया गया। लगभग 40 से 50 ट्रॉली खंडे समीप से निकले नाले से निकाले गए।

इस काम के लिए बाउन्ड्री वॉल बनाने का काम उन्ही ग्रामीणो का सौंपा गया जो इसमें दक्ष थे। बाकी ग्रामीण केवल पत्थर तोडने और पत्थर के परिवहन के लिए लगाया गया। इस बॉन्ड्री के अंदर जाने के लिए समुदाय के ही कारीगर द्वारा लकडी की किवाई बनाई गई है। जिससे अंदर जा सके और कोई पशु अंदर न जा सके। तथा बॉन्ड्री के अंदर वृक्षारोपण और पोषण वाटिका भी लगाया जाएगा। पोषण वाटिका से बच्चों को मिलने बाले मध्यान्ह भोजन में सब्जी इसी पोषण वाटिका से मिले जो बिना कीटनाशक दवाओं की होगी जिसकी जिम्मेदारी समुदाय ने ली है।

विकास संवाद के अजय यादव ने बताया कि इस काम के लिए सामाजिक संस्था गूंज ने भी मदद की है। जिन लोगों ने इस काम में सहयोग दिया है उन पचास परिवारों को 50 परिवारों को गरिमा के साथ पोषण खाद्यान्यान किट दी जाएगी। इस किट में दस किलो आटा तीन लीटर तेल, तीन किलो तुअर दाल, एक किलो मूंगफली, एक किलो गुड़, शामिल है। यह हमारे काम को एक मॉडल है जिससे कि लोगों की खादय सुरक्षा भी सुनिष्चित होती है, और सामुदायिक जगहों से लोगों का जुड़ाव बनता है।