जुलाई 2021: गुरूपूर्णिमा, देवशयनी एकादशी, मासिक शिवरात्रि सहित यह हैं प्रमुख व्रत और त्यौहार - Shivpuri News

शिवपुरी। हिन्दू संस्कृति में गुरू का स्थान भगवान से पूज्यनीय हैं। कबीरदास जी का एक दोहा गुरू गोविंद दोउ खड़े काके लागू पाय,बलिहारी गुरू आपने गोविंद दियो बताए अर्थात जीवन में कभी ऐसी परिस्थिति आ जाये की जब गुरु और गोविन्द (ईश्वर) एक साथ खड़े मिलें तब पहले किन्हें प्रणाम करना चाहिए।

ऐसा माना जाता हैं जो मनुष्य सनातक संस्कृति के हिन्दू धर्म में आस्था रखता हैं वह अपना आध्यत्मिक गुरू अवश्य बनाता हैं। वैसे तो पूरे भारत वर्ष में गुरूपूर्णिमा का त्यौहार बडी ही धूमधाम से मनाया जाता है। इस दिन लोग अपने गुरूओ की पूजा करत हैं।

इस वर्ष जुलाई माह की 24 तारिख को गुरूपूर्णिमा का दिन हैं। इस दिन को क्यो मनाते है और क्या महत्व हैं गुरू पूर्णिमा का आईए जानते हैं। शास्त्रो के अनुसार आषाढ़ मास की पूर्णिमा को गुरु पूर्णिमा कहते हैं। इस दिन गुरु की पूजा की जाती है। साधारण भाषा में गुरु वह व्यक्ति हैं जो ज्ञान की गंगा बहाते हैं और हमें अंधकार से प्रकाश की ओर ले जाते हैं। पूरे भारत में यह पर्व बड़ी श्रद्धा के साथ मनाया जाता है।

वेदव्यास ऋषि पराशर के पुत्र थे। हिन्दू धर्म शास्त्रों के अनुसार महर्षि व्यास तीनों कालों के ज्ञाता थे। उन्होंने अपनी दिव्य दृष्टि से देख कर यह जान लिया था कि कलियुग में धर्म के प्रति लोगों की रुचि कम हो जाएगी। धर्म में रुचि कम होने के कारण मनुष्य ईश्वर में विश्वास न रखने वाला, कर्तव्य से विमुख और कम आयु वाला हो जाएगा।

एक बड़े और सम्पूर्ण वेद का अध्ययन करना उसके बस की बात नहीं होगी। इसीलिये महर्षि व्यास ने वेद को चार भागों में बाँट दिया जिससे कि अल्प बुद्धि और अल्प स्मरण शक्ति रखने वाले लोग भी वेदों का अध्ययन करके लाभ उठा सकें।

जुलाई 2021 में यह व्रत और त्योहार हैंं

5 सोमवार योगिनी एकादशी
7 बुधवार प्रदोष व्रत (कृष्ण)
8 गुरुवार मासिक शिवरात्रि
9 शुक्रवार आषाढ़ अमावस्या
12 सोमवार जगन्नाथ रथ यात्रा
16 शुक्रवार कर्क संक्रांति
20 मंगलवार देवशयनी एकादशी , अषाढ़ी एकादशी
21 बुधवार प्रदोष व्रत (शुक्ल)
24 शनिवार गुरु-पूर्णिमा , आषाढ़ पूर्णिमा व्रत
27 मंगलवार संकष्टी चतुर्थी