जिले में जो ब्लैक फंगस के मरीज मिले हैं उन्होंने कराया था झोलाछापो से इलाज, कोरोना से हुई मौतों में इनका भी हाथ - Shivpuri News



शिवपुरी। जिले में कोरोना से मौते हुई हैं,इनमें से कुछ मरीजो की मौत गलत इलाज होने के कारण हालत बिगडने से हुई हैं। यह सब मरीज ग्रामीण क्षेत्रो से है ओर इनका प्राथमिक इलाज झोलाछाप डॉक्टरो ने किया है।

स्वास्थ्य विभाग द्वारा मरीजों की मौत के बाद उनकी केस हिस्ट्री में इस हकीकत से पर्दा उठा है। केस हिस्ट्री में सामने आया कि झोलाछापों ने टाइफाइड की बगैर जांच कराए अनावश्यक स्टेरॉयड दिए जबकि यह मरीज कोरोना संक्रमित थे।

कोलारस अनुविभाग के ग्रामीण क्षेत्र में जिन मरीजो की मौत हुई हैं उनमें 7 मरीजो की इलाज हिस्ट्री से चौकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। बुखार आने पर इन मरीजों ने स्थानीय स्तर पर झोलाछाप डॉक्टरो से अपना इलाज कराया। बताया जा रहा है कि इन सभी मरीजो को आय बुखार (टाइफाइड) बताकर उनको स्टेरॉयड, डेकाडोन सहित अन्य हैवी डोज दिए।

आरएमपी डॉक्टर द्वारा उनका 5-10 दिन तक इलाज करना पाया गया। इस पड़ताल के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जिले के आरएमपी डॉक्टरों को सिर्फ हिदायत देकर छोड़ दिया है। मरीजों का गलत इलाज कर मौत के मुंह में धकलेने वालों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है।

करैरा क्षेत्र में डेढ़ महीने के भीतर चार मरीजों की मौत इनमें गुड्डी राय उम्र 45 वर्ष पत्नी जीवनलाल की दिल का दौरा, जसरथराम उम्र 55 वर्ष पुत्र नाथूराम और रामनाथ जाटव उम्र 50 वर्ष निवासी टीला की बुखार के बाद मौत हाेना बताई जा रही है। जबकि एक अन्य बुजुर्ग की मौत को परिजन सामान्य बता रहे हैं। संबंधित मरीजों का गांव के झोलाछाप के यहां इलाज हुआ था।

टाइफाइड बताकर इलाज किया,गलत दवाए देने से हुआ ब्लैक फंगस

करैरा के टीला निवासी जगदीश राय को ब्लैक फंगस का संदिग्ध मरीज बताकर 18 मई को जीएमसी ग्वालियर रेफर किया था। यहां बमुश्किल बेड मिला। बेटे प्रवीण राय ने बताया कि डॉक्टरों ने जांच में ब्लैक फंगस बताया है।

पिता जगदीश राय का टीला गांव में एक झोलाछाप के यहां इलाज कराया था। उसने बिना जांच के टाइफाइड बताकर इलाज कर दिया था। जिससे पिता की हालत बिगड़ गई थी। हम झांसी भी ले गए थे, जहां कोई फायदा नहीं हुआ। करैरा के सरकारी अस्पताल लेकर गए तो ब्लैक फंगस बताया। समय पर इलाज मिलने से जगदीश की हालत ठीक है।

करैरा ब्लॉक के हामिद खान को प्रारंभिक जांच में ब्लैक फंगस जैसे लक्षण बताकर ग्वालियर भेजा गयाा। केस हिस्ट्री से पता चला है कि आरएमपी डॉक्टर ने लगातार 5 से 7 दिन तक दो बार स्टोरॉइड्स मरीज को दिए। इस कारण उनका शुगर लेवल बढ़ता गया, ड्रिप भी लगा दी। डेकाडोन भी दिया। नतीजा यह हुआ कि वह ब्लैक फंगस जैसी बीमारी का शिकार हो गए।

कोलारस के जगतपुर निवासी रवि गोस्वामी (21) की ग्वालियर में इलाज के दौरान 19 मई काे मौत हो गई है। भाई जंचल गोस्वामी ने बताया कि उल्टियां होने पर धाकड़ डॉक्टर के क्लीनिक पर भाई को ले गया था। बिना जांच किए मौखिक रूप से टाइफाइड बताकर गोलियां दे दी थीं। गोली खाने के बाद भाई की हालत ज्यादा बिगड़ गई।

मुझे पकड़कर गाड़ी में बिठाना पड़ा था। भाई की हालत बिगड़ने पर मुंहबाद भी हुआ था। कोलारस हॉस्पिटल लाए तो यहां जांच में डॉक्टर ने सब नॉर्मल बताया था। ऑक्सीजन लेवल 80 पहुंचने पर कंसंट्रेटर पर रखा था। फिर शिवपुरी के निजी हॉस्पिटल और बाद में ग्वालियर ले गए थे।