रक्षक बने भक्षकः खुलेआम कट रहे है जंगल, बैलगाड़ी से सप्लाई कर रहे है माफिया - kolaras News

अरविंद तोमर,फरहान काजी@ रन्नौद। इन दिनों पूरा जिला भ्रष्टाचार का गढ बना हुआ है। यहां सरकारी महकमें में उपर से नीचे तक भ्रष्ट कर्ताधर्ताओं की मनमानी से खुलेआम भ्रष्टाचार का खेल खेला जा रहा है। हालात यह है कि वनों की कटाई को रोकने के लिए जो वनकर्मी नियुक्ति किए है वह ही इन जंगलों की कटाई में जुटे हुए है।

जिले में वन विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत और लापरवाही के चलते माफिया द्वारा जंगलों में पत्थरों का अवैध उत्खनन और पेड़ काटने का कारोबार जोर-शोर से चल रहा है। माफिया द्वारा खोदे जा रहे पत्थरों से जहां पूरा जंगल खोखला होता जा रहा है।

अंधाधुंध पेड़ों की कटाई से जंगल साफ होता जा रहा है। हालांकि जंगलों में माफियाओं द्वारा निकाले जा रहे पत्थरों और पेड़ों की कटाई को रोकने के लिए पूर्व में डीएफओ लवित भारती ने माफिया के खिलाफ कार्रवाई करने की बात कही थी।

परंतु जंगल में सक्रिय माफिया पर अंकुश लगाने के लिए अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो सकी है। वन विभाग के आला अधिकारियों की यह चुप्पी माफिया और वन विभाग के अधिकारियों की आपसी साठगांठ की ओर इशारा कर रही है।

विदित हो कि जिले के बेहद घने और आकर्षक दिखने वाले जंगल पिछले लंबे समय से अंदर ही अंदर खोखले होते जा रहे हैं। वन माफिया बेखौफ होकर पेड़ों की अंधाधुंध कटाई कर पत्थरों का उत्खनन कर रहे हैं।

वन विभाग द्वारा बरती जा रही लापरवाही के कारण वन माफिया के हौंसले बुलंद बने हुए हैं और वह तेजी के साथ जंगल के हरे-पेड़ों को धराशायी कर वन को उजाड़ रहे हैं।

वन माफिया की यह कारगुजारी जिला मुख्यालय के जंगल से लेकर कोलारस तथा पिछोर रेंज के जंगल में खुलेआम देखी जा सकती है। क्षेत्र के जंगलों में पत्थर की अवैध खदान पर रात के समय लाखों रुपये के पत्थरों का उत्खनन किया जा रहा है दिन-रात पत्थरों की कटाई मशीनों की आवाज साफ सुनाई देती है।

वहीं हरे-भरे पेड़ों की कटाई भी जोर शोर से चल रही है। कोलारस व पिछोर वन परिक्षेत्र के अलग-अलग क्षेत्रों में जहां पड़ताल की गई तो पता चला कि माफिया बैलगाड़ियों की मदद से लकड़ी की सप्लाई कर रहे हैं।

अंधाधुंध काटे जा रहे हरे-भरे पेड़

विभागीय अधिकारियों की अनदेखी के कारण पिछोर रेंज के कई इलाकों में वन माफिया अंधाधुंध होकर हरे-भरे पेड़ों की बलि ले रहे हैं। क्षेत्र के करमई, अमोला, रूपेपुर, राउतोड़ा से लेकर अन्य वन क्षेत्रों में लोगों ने पेड़ों को काटकर खेती कर रहे है।

पेड़ काटे जाने के बाद लकड़ी तस्कर बैलगाड़ी और तड़बो गाड़ी से खुलेआम आम लकड़ी लेकर निकल रहे हैं और बाजार में बेच रहे हैं। परंतु वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारियों द्वारा उन पर आज तक कार्रवाई नहीं की है।

चैखट तथा कोलू घाट पर चल रहा पत्थरों का अवैध उत्खनन

बताया जाता है, कि वन भूमि से 500 मीटर के दायरे में खदान आदि की लीज नहीं दी जाती, लेकिन पिछोर वन परिक्षेत्र के खोड़ , राजापुर, बूधोन राजापुर सहित अन्य इलाकों में वन भूमि के भीतर पत्थरों की अवैध खदानें खुलेआम संचालित की जा रही हैं।

लोगों के द्वारा बताया गया कि राजापुर तथा खोड़ इलाके में तो वन विभाग की बाउंड्रीवॉल के पत्थरों को ही वन माफिया के लोग ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर लंबे समय से बाजारों में बेचने का काम कर रहे हैं।

लोगों का कहना है कि वनों की सुरक्षा जिन अधिकारी-कर्मचारियों को दे रखी है। वह निगरानी करने की बजाय रेंज कार्यालय में बैठे रहते हैं। ऐसी स्थिति में सिर्फ चैकीदार ही वनों की रखवाली की जिम्मेदारी है। वन माफिया उन्हें डरा-धमकाकर चुप करा देते हैं और अवैध कारोबार करते हुए वनों का विनाश कर रहे हैं।

यहां बता दे कि पिछोर रेंज क्षेत्र में अबैध खनन तो जारी है साथ ही अंचल भर में पेड़ो पर जमकर कुल्हाड़ी की बर्षा हो रही जिम्मेदार ने नही ली जंगल की सुध,

ऐसा ही नजारा है कोलारस वन परिक्षेत्र के वन चैकी करौंदी क्षेत्र के डुमेला, पठकोइ, भिलारी ,स्तवरी, में भी है।

एक नजर टीला कला व सुनाज पर देखा जाए तो वहां भी जंगल सफाये के साथ ही करमई ,पाठखो, में 12 महीने चलता है अबैध खनन जिम्मेदार अपने हिस्से लेने के बाद कार्यवाई को ठंडे बस्ते में डाल देते है।