शिवपुरी जिले की सबसे चर्चित लवस्टोरी, अपनी प्रेमिका से मिलने पेटू ने लगाई थी 40 फ़ुट उंची छलाग

ललित मुदगल,शिवपुरी। आज 14 फरवरी हैं और वेलेनटाईन डे हैं। आज मीडिया में हजारो लव स्टोरी प्रकाशित होंगी। आज शिवपुरी समाचार, शिवपुरी की ऐसी लवस्टोरी का याद करेगा। जो कभी मीडिया की सुर्खियो में रही है। टीनऐजर के लिए यह लवस्टोरी बहुत खास होगी क्यो की वह इस लब स्टोरी को पहली बार पढ रहे होंगें। हम बात कर रहे हैं शिवपुरी के तारा पेटू की लव स्टोरी। लव इतना की लोहे के मजबूत सरिए भी उसे नही रोक पाते थे।

हम स्टोरी के नायक ओर नायिका से पहले आपका परिचय कराते हैं। इस स्टोरी के नायक थे माधव नेशनल पार्क शिवपुरी के एक शेर जिसका नाम था पेटू,वही इस लवस्टोरी की नायिका हैं इस पार्क में रहने वाले शेरनी तारा। तात्कालिन मीडिया की खबरो में यह लवस्टोरी के तौर पर कभी प्रकाशित नही की गई थी लेकिन घटनात्मक प्रकाशित की गई थी।

साल तो सही याद नही हैं लेकिन लगभग 20 से अधिक साल पहले जब माधव नेशनल पार्क में शेर भी हुआ करते थे। इन्ही एक शेर और शेरनी के जोडे का नाम था तारा और पेटू। बताया जाता हैं कि शायद विश्व के इतिहास में पहली बार हुआ होगा कि इस जोडे की नसबंदी प्रशासन को करानी पडी थी। कारण था इनकी प्रजनन क्षमता अधिक थी, इस जोडे के कई बच्चे हुए।

प्रजनन क्षमता के कारण माधव नेशनल पार्क ने इस जोडे अलग करने का प्लान बनाया। शेरनी तारा के रहने के लिए  एक वाडा बनाया गया। जिसके चारो ओर गहरे गडडे खोदे गए उसमें आरसीसी के पिलर बनाए गए और चारो ओर से लोहे का मजबूत जाल से उसे कवर किया गया उसे में शेरनी को बंद कर दिया गया।


वही पेटू ज्यादा ही आक्रमक था उसके रहने के लिए जमीन को खोदा गया लगभग 20 फुट गहरी खाई बनाई गई और इस खाई के उपर मजबूत लोहे के तारो का जाल बनाया गया,गहरी खोदी गई खाई की जमीन से तारो के जाल की उंचाई लगभग 40 फुट होगी।

तारा और पेटू की प्रेम कहानी में माधव नेशनल पार्क प्रबधन जब विलेन बन गया तो अपने प्रेमी से जुदा हुई तारा ने खाना छोड दिया और उधर पेटू उदास न होकर हिसंक होने लगा किसी भी तरह वह अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए तारो के जाल का पार करने का प्रयास करता रहता था। वन्य प्राणी विशेषज्ञ हैं उनके अनुसार कि एक शेर कभी भी 30 फुट से अधिक उंची छलांग नही लगा सकता हैं इस कारण ही पेटू को जिस जगह रखा गया उसको पार करने के लिए उसे 40 फुट उंचाई क्रॉश करनी थी।

बताया जाता रहा हैं कि एक सुबह पार्क प्रबंधन को सूचना मिली कि पेटू तारा के बाडे में आ गया। यह खबर मीडिया की सुर्खिया बनी। लोग अपने अपने व्यू दे रहे थे कि पेटू ने अपना वाडा ऐसे पार किया होगा,लेकिन यह संभव भी नही था कि कोई भी शेर 40 फुट उंची छलाग लगा ले। प्रबंधन आज भी क्लीयर नही कर सका हैं कि पेटू ने 40 फुट उंची छलांग कैसे लगाई होगी और वह किस तरह से अपनी प्रेमिका के पास पहुंचा।

इसके बाद पार्क प्रबंधन फिर पेटू को तारा से अलग करते हुए उसे पुन:वापस उसकी वाडे में भेज दिया। तारा ने अपने प्रेमी के विछोह में खाने का त्याग कर दिया। किसी भी स्थिती में वह कुछ भी खाने को तैयार नही थी,उधर पेटू ने गुस्से में आकर वाडे में लगे लोहे के पिलरो को पूरा का पूरा हिलाकर रख दिया और तोड फोड करने लगा।

प्रबंधन ने सोचा कि तारा भूखी न मर जाए और पेटू हिसंक होकर अपने आप को नुकासन न पहुंचाए तो पुन:दोनो को एक साथ कर दिया। यह प्रेमी कहानी उस समय मीडिया का सबसे पसंदीदा सब्जेक्ट था। बताया जाता है कि पेटू बीमार रहने लगा उचित ईलाज के लिए पेटू का ट्रांसफर जबलपुर के चिडियाघर मे कर दिया गया। फिर इस विछोह में तारा ने खाने का त्याग कर दिया और पेटू भी उदास रहने लगा और उसने जबलपुर चिडिया घर मे अपनी तारा की याद में प्राण त्याग दिए।