लोक अदालत में घरेलू हिंसा के 27 प्रकरणों में हुई सुलह,खुशी-खुशी डाली बरमाला और एक हुए परिवार

शिवपुरी। नेशनल लोक अदालत के तहत कुटुम्ब न्यायालय शिवपुरी के प्रधान न्यायाधीश श्री पी.के.शर्मा की खण्डपीठ में घरेलू हिंसा के 27 प्रकरणों में समझौता एवं आपसी सुलह कराकर प्रकरणों का निराकरण किया गया।

इस मौके पर न्यायाधीश पी.के.शर्मा के समक्ष ग्राम धुवानी तहसील शिवपुरी निवासी प्रमोद जाटव पुत्र प्रहलाद जाटव और ग्राम सिरसौद निवासी लक्ष्मी जाटव पुत्री प्रमोद जाटव के बीच आपसी सुलह एवं समझौता कराकर प्रकरणों का निराकरण कर दम्पति को खुशी-खुशी अपने घर वापस भेजा। इस मौके पर दम्पत्ति द्वारा वरमाला डालकर खुशी जाहिर की और एक साथ रहने की शपथ भी ली।

वर्ष 2020 की पहली लोक अदालत का शुभारंभ 8 फरवरी को किया गया। राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के निर्देशानुसार जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्री अवनीश कुमार वर्मा के मार्गदर्शन में नेशनल लोक अदालत का आयोजन किया गया।

जिला न्यायालय एडीआर भवन में जिला न्यायाधीश अवनीश कुमार वर्मा ने दीप प्रज्वलित कर नेशनल लोक अदालत का शुभारंभ किया। उन्होंने कहा लोक अदालत के आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों को त्वरित न्याय उपलब्ध कराना है। लोक अदालत में पक्षकारों के मध्य आपसी समझौते के आधार पर विवादों का निराकरण किया जाता है।

नेशनल लोक अदालत में कई मामले आए जिनका निराकरण किया गया

इसमें सम्पत्ति-कर, जल-कर एवं अन्य करों के अधिभार पर निर्धारित शर्तों के अधीन छूट दी गयी। सम्पत्ति-कर के ऐसे प्रकरण, जिनमें कर तथा अधिभार की राशि 50 हजार रुपये तक बकाया थी, जल-कर के ऐसे प्रकरण, जिनमें कर तथा अधिभार की राशि 10 हजार रुपये तक बकाया, उनमें अधिभार में 100 प्रतिशत तक की छूट दी गयी। सम्पत्ति-कर के ऐसे प्रकरण, जिनमें कर तथा अधिभार की राशि 50 हजार से अधिक तथा एक लाख के बीच बकाया थी।

उनमें अधिभार में 50 प्रतिशत तक की छूट, जल-कर के ऐसे प्रकरण, जिनमें कर तथा अधिभार की राशि 10 हजार से 50 हजार तक है उनमें अधिभार में 75 प्रतिशत की छूट दी गयी। सम्पत्ति-कर के ऐसे प्रकरण, जिनमें कर तथा अधिभार की राशि एक लाख से अधिक बकाया थी।

उनमें अधिभार में 25 प्रतिशत तक की छूट, जल-कर के ऐसे प्रकरण, जिनमें कर तथा अधिभार की राशि 50 हजार से अधिक बकाया थी, उनमें अधिभार में 50 प्रतिशत की छूट दी रखी गयी थी। जिला स्तर पर लोक अदालत के आयोजन के साथ ही तहसील स्तर पर भी लोक अदालत लगाई गई। जिसमें पक्षकारों के प्रकरणों का निराकरण किया गया और कई प्रकरणों में करो में छूट दी गई।