कोलारस में 1 माफिया का ट्रैक्टर पकड़ा और फिर छोड़ दिया, अब मामला दबाने की कोशिश | kolaras News

शिवपुरी।  खबर जिले के कोलारस अनुविभाग के फोरेस्ट एरिए की है। जहां बीते रोज फोरेस्ट की टीम ने जंगल की कटाई कर भरकर ले जाए जा रहे एक ट्रेक्टर को पकडा। इतना ही नहीं टीम इस ट्रेक्टर को पकडकर अपने साथ ले गई और इसे 5 किमी दूर ले जाकर एक युवक के फार्म हाउस पर खाली कर बिना कार्यवाही के ही छोड दिया। बताया जा रहा है कि उक्त मामले में फोरेस्ट के कर्मचारीयों ने 75 हजार रूपए में सौंदा तय कर मामले को रफा दफा किया गया है।

जानकारी के अनुसार कोलारस कस्बे और आसपास के जंगलों में रोजाना तेजी के साथ जंगलों की कटाई की जा रही है। जिससे जंगल में हरे-भरे पौधों की संख्या में लगातार कमी आ रही है। पेड़ों की कटाई के कारण वन परिक्षेत्र कम होता जा रहा है। 15 साल पहले जंगल काफी हरे-भरे हुआ करते थे, लेकिन इसमें आज कमी आ चुकी है।

बीते दिनों डिप्टी रेंजर एवं फॉरेस्ट गार्ड द्वारा टीला के जंगल से खैर से भरी हुई लकड़ी का ट्रैक्टर पकड़ा था। जिसे 5 किलोमीटर दूर अन्यत्र स्थान पर गांव के रहने बाले युवक के फार्म हाउस डोंगरपुर पर खाली कर दिया गया एवं ट्रैक्टर को बिना कार्रवाई की है छोड़ दिया गया जो वन अधिकारियों की मंशा पर सवाल खड़े करता है।

यहां बता दे कि इन दिनों वन अधिकारियों की मिलीभगत दबंगों द्वारा जंगल की लकड़ी की अवैध कटाई की जा रही है बावजूद इसके जंगल की कटाई पर वन विभाग रोक लगाने में असमर्थ दिखाई दे रहा है। बेरोक-टोक कटाई के चलते लकड़ी माफिया जंगलों में लगातार सक्रिय बने हुए हैं। पेड़ों के अलावा वन क्षेत्र में पत्थर उत्खनन का काम भी किया जा रहा है। स्थानीय ग्रामीणों की मानें तो वन विभाग के संरक्षण में लकड़ी माफिया पनप रहा है। पिछले कई दिन से जंगल में पेड़ों की कटाई चल रही है।

बताया जा रहा है कि उक्त ट्रेक्टर को डिप्टी रैंजर रूकमणि भगत,सुदामा भार्गव,मुन्ना महाराज ने टीला के जंगलों से परसों रात्रि में पकडा था। उसके बाद उक्त ट्रेक्टर को फोरेस्ट ने जप्ती में न लेते हुए ले देकर छोड दिया।

पौधरोपरण के लिए हर साल किए जाते हैं लाखों रु. खर्च

गोरा टीला, देहरदा गणेश, के जंगलों में पौधरोपण के लिए वन विभाग अधिकारियों को टारगेट दिया जाता है। वहीं अधिकारी पौधारोपण में लाखों रुपए खर्च कर पौधे रोपे जाते हैं, लेकिन उनकी देखरेख और सुरक्षा को लेकर ध्यान नहीं दिया जाता है। इसके अलावा जंगलों में खड़े पेड़ों की देखरेख वन विभाग द्वारा की जाए तो जंगल को काफी हद तक बचाया जा सकता है।

जब ट्रैक्टर को पकड़ने को लेकर  रेंजर कृतिका शुक्ला से बात की गई तो उन्होंने कहा मैं अभी छुट्टी पर हूं एवं आप जिस की बात कर रहे हैं। यह मामला मेरे संज्ञान में नहीं है। जब उन्हें बताया गया कि आपकी रिकॉडिंग भी है जिसमें आप मामले में कार्यवाही करने की बात कह रही है। तो फिर उन्होंने कहा कि ट्रेक्टर लकडी छोडकर भाग गया है। हम लकडीयों का पी ओ आर कटवा रहे है।

अब सबाल यहां यह खडा होता है कि आखिर ऐसा कैसे संभब है कि पहले तो मैडम को इस मामले में जानकारी ही नहीं थी। उसके बाद जब पूरी जानकारी बताई तो ट्रेक्टर लकडी छोडकर भाग गया। अब अगर ट्रेक्टर चालाक को भागना ही होता तो वह लकडी लेकर भागता,उसे छोडकर भागना गले नहीं उतर रहा है।

इस मामले में सबसे अहम बात यह है कि मैडम मीडिया के पास ट्रेक्टर के मालिक को भेजने की बात कह रही थी। जब मीडिया के पास भेजने के लिए तो ट्रेक्टर मालिक उपलब्ध है। जबकि उस ट्रेक्टर पर कार्यवाही करने के लिए ट्रेक्टर मालिक नहीं है। यह समझ से परे है।

10 हजार हेक्टेयर में फैला है जंगल

कोलारस क्षेत्र के अंतर्गत जंगल में धड़ल्ले से पेड़ काट रहे हैं। करीब 10 हजार हेक्टेयर में फैली इस रेंज में लकड़ी काटने वालों को वन विभाग की कार्रवाई का डर नहीं रहता है। ऐसे में जंगल में पेड़ों के ठूंठ ही दिखाई दे रहे हैं। स्थानीय आदिवासियों का कहना है कि पेड़ कटने की शिकायतें करने पर जिम्मेदार अधिकारी से कई बार की जा चुकी हैं। लेकिन इसके बाद भी अधिकारी इस ओर कोई ध्यान नहीं देते हैं। जिससे वन माफिया के साथ रेंज के अधिकारी-कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका वनवासी समुदाय के लोगों ने जताई है।

इनका कहना है
आपके द्धारा उक्त मामला मेरे संज्ञान में लाया गया है,में इस मामले को दिखबा लेता हूं। अगर ऐसा हुआ है तो गलत है। में मामले की जांच करा लेता हूं। जो भी दोषी होगा कार्यवाही की जाएगी।
लबित भारती,डीएफओ शिवपुरी।