कोतवाली पुलिस के गाल पर तमाचा: पुलिस लाईन में आरक्षक, SP ऑफिस से लगे ट्रेजरी के चटकाए ताले

शिवपुरी। इन दिनों कोतवाली पुलिस की कार्यप्रणाली पर सांबलियां निशान लगातार लगते जा रहे है। आज फिर कोतवाली पुलिस के गाल पर चोरों ने उस समय तमाचा जडा जब पुलिस लाईन में एक पुलिस आरक्षक के घर को ही चोरों ने निशाना बनाते हुए चोरी की बारदात को अंजाम दिया है। इतना ही नहीं चोरी की बारदात के समय उक्त पुलिसकर्मी ड्यूटी से लौटकर आ गया था। जिसे देखकर पुलिस कर्मी ने चोरों का पीछा भी किया। परंतु चोर चकमा देकर भाग गए।

चोरों के हौसले की बात करें तो दूसरी बारदात एसपी ऑफिस के पास की ही है। जहां ट्रेजरी कार्यालय को निशाना बनाते हुए चोरों ने कार्यालय में रखे कागजों को पार कर दिया है। चोरों के हौसले इतने बुलंद है कि वह शासकीय कार्यालयों को ही निशाना बनाने से बाज नहीं आ रहे है। शिवपुरी जिले के ट्रेजरी कार्यालय का ताला किसी असामाजिक तत्वों द्वारा तोड़ दिया। ताला तोडऩे के पीछे अवांछनीय तत्वों का उद्देश्य तो क्लियर नहीं हुआ है,पर सूत्रों के हवाले से पता चला है कि ट्रेजरी में उपस्थित तमाम कागजों को तितर बितर किया गया है, जो कि गंभीर अपराध की तरफ इशारा करता है, सूत्र यह भी बताते हैं कि ताला तोड़ ने का उद्देश्य पेंशनरों की पेंशन में घोटाले का भी हो सकता है।

पहली बारदात में चोरों ने पुलिस लाईन में पदस्थ आरक्षक राजकमल शाक्य के सूने घर को निशाना बनाते हुए घर में रखे डेढ लाख के गहने पार कर दिए। इस घटना के दौरान रात्रि में आरक्षक ड्यूटी से लौटकर आया तो उसने देखा कि उसके घर में कुछ लोग है। जिसपर उसने उक्त लोगों को ललकारा। आरोपी पुलिस कर्मी को देखकर पीछे से भागने लगे। पुलिस कर्मी कुछ दूर तक उन आरोपीयों के पीछे भागा। परंतु चोर अपना काम कर भाग चुके थे। गनीमत यह रही कि उक्त आरक्षक के 6 लाख के गहने जो खुले में रखे हुए थे उन पर चोरों की नजर नहीं पडी।

वही दूसरी बारदात की बात करें तो ट्रेजरी कार्यालय में चोरी की बारदात ने पुलिस को सरेआम चुनौती दी है। परंतु पुलिस की कार्यप्रणाली को देखकर लग रहा है कि जिले में पुलिसिंग पूरी तरह से फैल हो गई है।कुल मिलाकर जिले में पिछले कुछ समय से ट्रेजरी कार्यालय द्वारा पेंशन घोटाले को लेकर कई तरह की चर्चाएं सामने आईं थी। 

हालांकि इस घटना के पीछे क्या सच्चाई है ये तो पुलिस के द्वारा जांच के बाद ही पता चलेगा कि मामला कितना संगीन है। फिलहाल देखना ये है कि इस घटना की रिपोर्ट ट्रेजरी ऑफिसर द्वारा लिखाई गई। सबसे बड़ा सवाल यह उठता हैं कि जब जिले में शासकीय दफ्तर ही सुरक्षित नहीं जहां दो-दो तीन-तीन चपरासी तैनात रहते हैं और पुलिस अधीक्षक कार्यालय पास में हैं जहां रात दिन लोग भ्रमण करते हुए देखे जा सकते हैं।