फिर संकट में मडीखेडा योजना: इंटेकवेल की छत लीकेज,घुसा मशीनो के पैनलो में पानी,खराब हुए पैनल

शिवपुरी। शहर के प्यासे कंठो की प्यास बुझाने वाली योजना लगातार संकट के बादल मंडराते रहते हैं। इस योजना से जुडी एक खबर आ रही हैं कि करोडो की लागत से बना मडिखेडा पर इंटेकवेल की छत लीक हो गई हैं,जिससे बारिश का पानी इंटेकवैल की छत से गुजरता हुआ मशीनो के पैनलो में पहुंच गया। जिससे मशीनरी खराब होने की खबर आ रही हैं।

इस घटनाक्रम से स्पष्ट है कि इस प्रोजेक्ट की मूल ड्रायंग और इंजीनियरिंग पर सवाल खडे हो गए हैं,कि पानी में डूबे ओर चारो से पानी में घिरे रहने वाले इंटेंकवेल की वाटरपुफ्रिंग नही कराई गई हैं। इसे देखकर ऐसा लगता हैं कि इस प्रोजेक्ट को डिजीयन करने वाले पढे लिखे न होकर अनुकंपा नियुक्त वाले हो। इस समस्या से कैसे छुटकरा मिलेंगा यह तो भगवान जाने लेकिन छत लीकेज होने के कारण यह प्रोजेक्ट डूबने के कगार पर आ गया है।

इस प्रोजेक्ट पर जब से काम शुरू हो हुआ हैं। खत्म होने का नाम ही नही ले रहा हैं। नपा ओर पीएचई के इंजीनियर इतने टैक्निकल नही हैं जो प्रोजेक्ट पर काम करी ऐंजेंसीयो की गुणवत्ता पर ध्यान दे सके। इस प्रोजेक्ट को लेट व बिगडने को लेकर सरकारी अमले के साथ—साथ नेताओ को भी कम दोष नही हैं इस प्रोजेक्ट को डूबाने में।

पीएचई ऐजेंसी हैं इस इंटेकवेल के निर्माण की
मड़ीखेड़ा डैम पर बना इंटेकवेल का निर्माण एजेंसी पीएचई थी। उसने इसका निर्माण इंदौर की माहेश्वरी नामक फर्म से करवाया था। शुरूआती दौर से ही इसके निर्माण में खामियां सामने आई थीं। गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े हुए थे। जल भराव क्षेत्र में इंटेकवेल की सबसे निचली मंजिल में गेट ही नहीं लगाए गए थे, जिससे ये भाग सिल्ट भरने से उपयोगहीन हो गया।

नतीजे में पंप को ऊपर रखने की नौबत आई, इसके लिए लोहे के गाटर लगाकर पंप जैसे तैसे स्थापित किए गए। इन खामियों के बीच नया मामला अब सामने आया है, जब घटिया निर्माण के चलते इंटेकवेल की छत लीक हो गई। छत से होकर पानी नीचे लगे पैनल पर पहुंच गया। इससे पैनल खराब हो गया है। अब पानी सप्लाई की मोटर चालू नहीं हो पा रही।

नवनिर्मित इंटेकवेल में खामियों के बाद कराना पड़ा था लाखों का काम
इंटेकवेल का निर्माण शुरूआती दौर से ही विवादों में रहा। करीब दो साल पहले जब यहां से पानी छोड़ने की बात आई तो एक के बाद एक कई तकनीकि खामियां इंटेकवेल के निर्माण में उजागर हुईं थीं। यहां इन खामियां दूर करने के लिए नए सिरे से लाखों रुपए का बजट खर्च कर निर्माण कराना पड़ा था। गाटर डालकर व पुरानी संरचना में तोड़फोड़ कर नए प्रयोग करने पड़े थे। ऐसे में अब छत लीक होने से समस्या फिर शून्य पर पहुंच गई है।


स्पेयर पंप बजट के इंतजार में दो माह से गाजियाबाद में
पूरी योजना में लापरवाही का आलम यह है कि इंटेकवेल पर तीन बड़े पंप स्थापित किए गए थे, जबकि ताकि एक साथ दो पंप चलाए जा सके। उन्हें रेस्ट देने के लिए वैकल्पिक तौर पर तीसरा पंप मुस्तैद रहे, लेकिन यहां एक पंप पिछले दो माह से खराब होने के बाद गाजियाबाद में सुधरने के लिए क्लोमोर कंपनी के पास पड़ा है, लेकिन इसको दुरुस्त कराने के लिए 15 लाख का भुगतान कंपनी को किया जाना है, पर शिवपुरी में योजना से जुड़ी ओम कंस्ट्रक्शन कंपनी हाथ खड़े कर चुकी है। उसे पहले ही करीब ढाई करोड़ रुपए का भुगतान उसे नपा से लेना है। उसके पास पंप उठाने के लिए पैसा नहीं है।

बिजली का नहीं हुआ कनेक्शन, दो पंप एक साथ नहीं चलते
डैम से फिल्टर प्लांट तक एक साथ दो पंप चलाए जाने की आवश्यकता रहती है, जिससे तेजी से पानी सप्लाई किया जा सके, लेकिन अब तक बिजली की हैवी लाइन से कनेक्शन नहीं हो सका है। इसके नतीजे में एक साथ दो पंप नहीं चल पा रहे। जहां तक पुरानी लाइन से दो पंप की सप्लाई पर सवाल उठ रहे हैं।

उसे लेकर ओम कंस्ट्रक्शन कंपनी के महेश मिश्रा का कहना है कि लाइन से दो पंप चलाने पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा, वह आराम से चल पाएंगे, लेकिन उसके पहले बिजली कनेक्शन तो हो। नपा हमारा ढाई करोड़ से ज्यादा का भुगतान नहीं कर रही। ऐसे में कंपनी की हालत खराब हो गई है। हम आगे काम कैसे करें।

नपा और कंपनी के बीच विरोधाभास, नपा को पैनल की जानकारी ही नहीं
योजना को लेकर नपा कितनी गंभीर है, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि ओम कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रबंधक महेश मिश्रा स्वीकारते हैं कि इंटेकवेल की छत से लीक होने के कारण पैनल में पानी गया और खराब हो गया, जिससे मोटर नहीं चल पा रहीं।

जबकि नपा के इंजीनियर और योजना का काम देख रहे सचिन चौहान नींद में हैं, उनसे जब पूछा गया कि तीन दिन से सप्लाई क्यों बंद हैं तो उनका कहना था कि लाइन लीकेज है, जिसे दुरुस्त करा रहे हैं। जब उनसे कहा गया कि पैनल पानी जाने से खराब हो गया है तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं हैं, फिर भी मैं दिखवाता हूं। मेरी जहां तक जानकारी है, लाइन इंटेकवेल के पास लीकेज हो गई है, इस वजह से सप्लाई नहीं आ रही।