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सूरत कोचिंग हादसा: सुरक्षा मानकों का होगा मूल्यांकन, घटना से सबक लें संस्थान | SHIVPURI NEWS

शिवपुरी। छात्र-छात्राओं को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराना शैक्षणिक संस्थान का कर्तव्य है। बालक बालिकाओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता पर होना चाहिये। हर संस्थान में अग्नि शमन यंत्र, उपचारित पेयजल, हवा, प्रकाश एवं बालक-बालिकाओं के लिये अलग-अलग शौचालय होना अनिवार्य है। उल्लेखनीय है कि शुक्रवार को शाम 4 बजे गुजरात के सूरत शहर में तक्षशिला कॉम्प्लेक्स में संचालित कोचिंग संस्थान की इमारत में आग लगने से बच्चों ने इमारत चौथी मंजिल की खिड़कियों से कूदकर जान बचाने की कोशिश की जिसमें 15 से भी अधिक बच्चों की मौत हुई तथा अनेक बच्चे गंभीर रूप से घायल हो गए।

बाल संरक्षण अधिकारी राघवेन्द्र शर्मा ने कहा कि सूरत की घटना से सबक लेते हुए समस्त शैक्षणिक संस्थानों को ऐसे कमरों में कक्षाओं का संचालन करना चाहिए जिसमें दो दरवाजे हों, ताकि आपात स्थितियों में उन्हें जोखिमों का सामना न करना पड़े। सूरत का दर्दनाक दिल दहला देने वाला हादसा प्रथम द्रष्टया प्रवंधन की लापरवाही को उजागर करता है। जिले के सभी कोचिंग संस्थानों एवं विद्यालय संचालकों को सुरक्षा मापदण्डों को पूरा करना चाहिये।

असुरक्षित स्थलों पर संचालन या सुरक्षा मानक पूर्ण न होने पर भी संचालन मानव जीवन को जोखिम में डालने वाला कृत्य है।असुरक्षित स्थलों पर कक्षाओं के संचालन, सुरक्षा मानकों का पूर्ण न होना  सेवा में कमी का परिचायक है। जिले में संचालित सभी संस्थानों के सुरक्षा मानकों एवं मूलभूत सुविधाओं का  मूल्यांकन किया जाएगा। बच्चों की सुरक्षा में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। सुरक्षा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता का विषय है।