शिवपुरी। इस साल की होली के रंग में ज्योतिषीय गणनाओ और परंपराओं के बीच उलझ गया। इस बार होलिका दहन के बाद रंगों के उडने पर 24 घंटे का ब्रेक लग गया। शिवपुरी शहर में सोमवार की देर रात तक लगभग 1 सैकड़ा स्थानों पर होलिका दहन हुआ,लेकिन होलिका दहन के बाद रंगों का उडना शुरू हो जाता है लेकिन मंगलवार को चंद्रग्रहण के कारण होली के रंगों पर ब्रेक लग गया।
आज मंगलवार को सामान्य नहीं रहा,बाजार के हाल चाल रविवार जैसे रहे,कुल मिलाकर बाजार भी आधा खुला रहा। आज चंद्रग्रहण के कारण मंदिरों के पट नही खोले गए, आज सुबह 6:20 बजे से चंद्रग्रहण का सूतक काल प्रारंभ हो गया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल में शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।
देर शाम तक मंदिरों में पट खुलेंगे और पूजा आरती होगी
शिवपुरी में सोमवार रात ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में होलिका दहन किया गया। यह सिलसिला देर रात करीब 12 बजे तक चला। लोगों ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। कई स्थानों पर युवाओं ने डीजे की धुन पर नृत्य किया और रंग-गुलाल उड़ाकर एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। शहर में सौ से अधिक जगहों पर होलिका दहन हुआ। पुलिस प्रशासन ने पूरे आयोजन के दौरान सतर्कता बरती और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
चंद्रग्रहण समाप्त होने बाद खेला जाएगा रंग
इसी कारण रंग-गुलाल से होली खेलने का कार्यक्रम एक दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। अब बुधवार, 4 मार्च को चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद रंगों की होली धूमधाम से मनाई जाएगी। इसके बाद 5 मार्च को दूज पर्व मनाया जाएगा, जिसमें बहनें भाइयों को तिलक कर उनके मंगल की कामना करेंगी। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे रंगों की होली शांति, सौहार्द और भाईचारे के साथ मनाएं। साथ ही, प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दें।
सोमवार को होलिका दहन से पहले शहर में पुलिस ने फ्लैग मार्च निकाला। फ्लैग मार्च में पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़, एडिशनल एसपी संजीव मुले सहित कोतवाली, फिजिकल आदि थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ शामिल रहे। यह मार्च शहर के प्रमुख मागों, मुख्य बाजारों और संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरा।
शहरीकरण और स्टेटस लेवल सहित गोबर की कमी के चलते हजारों परिवार पारंपरिक
रूप से बनने वाली गोबर की गुलईयों नहीं बना पाते हैं। ऐसे में ग्रामीण अंचल से जुड़े लोगों ने इसे भी व्यापार का रूप दे दिया। आत शहर में गोबर की गुलईयों की कई दुकानें लगी देखी गई। शहरवासियों परंपरा का निर्वहन करने के लिए यह गुलईयां भी खूब खरीदी गई।
आज मंगलवार को सामान्य नहीं रहा,बाजार के हाल चाल रविवार जैसे रहे,कुल मिलाकर बाजार भी आधा खुला रहा। आज चंद्रग्रहण के कारण मंदिरों के पट नही खोले गए, आज सुबह 6:20 बजे से चंद्रग्रहण का सूतक काल प्रारंभ हो गया था। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, सूतक काल में शुभ और मांगलिक कार्य वर्जित होते हैं।
देर शाम तक मंदिरों में पट खुलेंगे और पूजा आरती होगी
शिवपुरी में सोमवार रात ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में होलिका दहन किया गया। यह सिलसिला देर रात करीब 12 बजे तक चला। लोगों ने पारंपरिक विधि-विधान से पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। कई स्थानों पर युवाओं ने डीजे की धुन पर नृत्य किया और रंग-गुलाल उड़ाकर एक-दूसरे को होली की शुभकामनाएं दीं। शहर में सौ से अधिक जगहों पर होलिका दहन हुआ। पुलिस प्रशासन ने पूरे आयोजन के दौरान सतर्कता बरती और संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी रखी, जिससे कार्यक्रम शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ।
चंद्रग्रहण समाप्त होने बाद खेला जाएगा रंग
इसी कारण रंग-गुलाल से होली खेलने का कार्यक्रम एक दिन के लिए स्थगित कर दिया गया। अब बुधवार, 4 मार्च को चंद्रग्रहण समाप्त होने के बाद रंगों की होली धूमधाम से मनाई जाएगी। इसके बाद 5 मार्च को दूज पर्व मनाया जाएगा, जिसमें बहनें भाइयों को तिलक कर उनके मंगल की कामना करेंगी। प्रशासन ने नागरिकों से अपील की है कि वे रंगों की होली शांति, सौहार्द और भाईचारे के साथ मनाएं। साथ ही, प्राकृतिक रंगों का उपयोग कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दें।
सोमवार को होलिका दहन से पहले शहर में पुलिस ने फ्लैग मार्च निकाला। फ्लैग मार्च में पुलिस अधीक्षक अमन सिंह राठौड़, एडिशनल एसपी संजीव मुले सहित कोतवाली, फिजिकल आदि थाना प्रभारी पुलिस बल के साथ शामिल रहे। यह मार्च शहर के प्रमुख मागों, मुख्य बाजारों और संवेदनशील क्षेत्रों से होकर गुजरा।
शहरीकरण और स्टेटस लेवल सहित गोबर की कमी के चलते हजारों परिवार पारंपरिक
रूप से बनने वाली गोबर की गुलईयों नहीं बना पाते हैं। ऐसे में ग्रामीण अंचल से जुड़े लोगों ने इसे भी व्यापार का रूप दे दिया। आत शहर में गोबर की गुलईयों की कई दुकानें लगी देखी गई। शहरवासियों परंपरा का निर्वहन करने के लिए यह गुलईयां भी खूब खरीदी गई।