ई-अटेंडेंस में शिवपुरी फिसड्डी:शिक्षक नहीं मान रहे नियम,प्रदेश में 21वें नंबर पर पहुंचा जिला

शिवपुरी। शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए और शिक्षक स्कूलों में पर पहुंचे और बच्चों की नियमित रूप से क्लास ले इस कारण मध्यप्रदेश सरकार ने शिवपुरी जिले में  एक जुलाई 2025 से अटेंडेंस सिस्टम शुरू किया है। इस सिस्टम में सभी शिक्षकों को 3.0 पोर्टल पर अपनी ई-अटेंडेंस लगाना होती है। लेकिन 5 माह पूरे होने के बाद भी 100 फीसदी शिक्षक इस पोर्टल में उपस्थिति दर्ज नहीं करा पा रहे हैं। औसतन 79 फीसदी शिक्षक ही इसमें नियम का पालन कर रहे हैं, जबकि 21 फीसदी शिक्षक इसे नियम को नहीं मान रहे हैं।

हालांकि नियमित शिक्षकों की तुलना में अतिथि शिक्षकों की ई-अटेंडेंस के मामले में 90 फीसदी उपस्थिति दर्ज करा रहे हैं। उसको पीछे सीधा कारण यह है कि अतिथि शिक्षकों का वेतन ई-अटेंडेंस पोर्टल से ही जनरेट करना दिया जा रहा है। वर्तमान में ई-अटेंडेंस के मामले में शिवपुरी जिला प्रदेश में 21 वें नंबर पर है और हालात बहुत अच्छे नहीं हैं।

2 सैकड़ा शिक्षकों के नाम 3.0 पोर्टल पर दर्ज नहीं
बताया जा रहा है कि नियमित शिक्षकों में से करीब दो सैकड़ा ऐसे शिक्षक हैं जिनका नाम 3.0 पोर्टल पर ई-रजिस्ट्रेशन नहीं है। ऐसे शिक्षकों में कुछ नए शिक्षक व कुछ अनुकंपा नियुक्ति वाले शिक्षक शामिल हैं। विभाग का कहना है कि जिन शिक्षकों के नाम पोर्टल में कुछ तकनीकी कमी के कारण नहीं जुड़ पाए और कुछ शिक्षकों ने इस पोर्टल पर अपना नाम जोड़ने के लिए सूचना पत्र भी नहीं दिए। इसलिए यह 2 सैकड़ा शिक्षक इस ई-अटेंडेंस प्रणाली से अछूते हैं।

डीईओ का आदेश जारी
वैसे तो डीईओ शुक्रवार सुबह मात्र ई-अटेंडेंस में सुधार लाने के लिए कई बार नोटिस जारी कर चुके हैं, लेकिन उन नोटिसों का कोई खास फर्क पड़ नहीं पा रहा है। लापरवाही से तंग होकर डीईओ ने ई-अटेंडेंस न लगाने वाले शिक्षकों की वेतन काटने की कार्रवाई शुरू हुई तो पूर्व में शिक्षक संगठनों ने विरोध व्यक्त कर दिया तो कार्रवाई नहीं हो सकी। इसी का लाभ उठाकर अपने ही विभाग का यह नियम मानने में कोताही बरत रहे हैं।

अब शुक्रवार को फिर से डीईओ विवेक श्रीवास्तव ने एक आदेश जारी किया है, जिसमें उल्लेख किया गया है कि सभी शिक्षकों को ई-अटेंडेंस पर अपनी उपस्थिति दर्ज करानी है, बाकी जो शिक्षक ऐसा नहीं करेगा तो हर हाल में वेतन में अंतर कोई वित्तीय या रुकावट होती है तो उसके लिए संबंधित शिक्षक ही जिम्मेदार होगा।

नियमित में 2650 प्राथमिक व मिडिल और 220 हायर सेकेंडरी स्कूल हैं जिनमें 7877 नियमित शिक्षक ई-अटेंडेंस लगा रहे हैं। इससे जुलाई से जब यह ई-अटेंडेंस प्रणाली शुरू हुई, तब से लेकर अभी तक इस नियम के तहत ई-अटेंडेंस न लगाने वाले शिक्षकों पर किसी तरह की कोई कार्रवाई नहीं हुई। तभी तो बार-बार डीईओ ने केवल नोटिस जारी किए हैं और जो शिक्षक स्कूल नहीं जाते, उन पर इन नोटिसों का कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। ऐसे में हालात सुधारना मुश्किल है।

हालांकि कुछ शिक्षकों का कहना है कि उनके स्कूल जहाँ है, वहां पर मोबाइल नेटवर्क सही से नहीं आते या फिर आते ही नहीं हैं, जिसके चलते ई-अटेंडेंस नहीं लगा पाते। जबकि हकीकत यह है कि जिन मात्र 4 या 5 स्कूल ऐसे हैं, जहां पर मोबाइल नेटवर्क की दिक्कत है। शेष स्कूलों में शिक्षक नहीं रहे हैं और ई-अटेंडेंस भी नहीं लगा रहे हैं।

यह बोले जिला शिक्षा अधिकारी
अभी शासन से कोई आदेश नहीं है कि ई-अटेंडेंस न लगाने वाले शिक्षक की वेतन रोकी जाए या काटी जाए। बाकी जब समय-समय पर इस संबंध में नोटिस दे रहे हैं। अभी लगभग नौ जिले प्रदेश में 21 वें नंबर पर है। मैंने शुक्रवार को भी एक आदेश जारी कर कहा है कि अगर कोई शिक्षक ई-अटेंडेंस नहीं लगाता तो उसके वेतन आहरण से संबंधित कोई रुकावट आएगी तो शिक्षक स्वयं जिम्मेदार होगा।