SHIVPURI NEWS - ​सड़क में 19 लाख का भ्रष्टाचार कलेक्टर ने दिया था सहायक यंत्री को नोटिस, जवाब तक नहीं दिया

Bhopal Samachar

बदरवास। बदरवास जनपद सीईओ अरविंद शर्मा ने जिला पंचायत सीईओ को पत्र लिखकर सहायक यंत्री रोहन शर्मा द्वारा टीएस पंजी नहीं देने पर कार्रवाई प्रस्तावित की है। सहायक यंत्री रोहन शर्मा द्वारा प्रभार से हटाए जाने के बाद टीएस पंजी प्रभार में नहीं दी गई जिससे उनके कार्यकाल के दौरान जारी हुई तकनीकी स्वीकृतियों की समीक्षा नहीं हो पा रही है। उल्लेखनीय है कि सहायक यंत्री रोहन शर्मा पर फर्जी टीएस जारी करने का आरोप भी है।

जनपद सीईओ अरविंद शर्मा ने पत्र में उल्लेख किया है कि जनपद पंचायत बदरवास की साधारण सभा की बैठक विभाग 28 फरवरी को हुई थी जिसमें तकनीकी स्वीकृति पंजी वर्ष 2022-23 एवं 2023-24 की समीक्षा की जाना थी। दिनेश दीक्षित सहायक यंत्री मनरेगा द्वारा बैठक में अपने कार्यकाल की टीएस पंजी की समीक्षा कराई गई एवं अवगत कराया गया कि रोहन शर्मा पूर्व सहायक यंत्री द्वारा टीएस पंजी प्रभार में नहीं दी गई।

जिससे रोहन शर्मा तत्कालीन सहायक यंत्री के कार्यकाल में जारी टीएस की समीक्षा नहीं हो पाई। इसे लेकर सदस्यों ने असंतोष व्यक्त करते हुए आगामी बैठक में पंजी प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। राेहन शर्मा को निर्देशित करने का कष्ट करें कि टीएस पंजी शीघ्र अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी मनरेगा एनके शर्मा को उपलब्ध कराएं। अभिलेख अभी तक प्रभार में न सौंपे जाने का दोषी मानकर इनके विरूद्ध कार्रवाई करने का कष्ट करें।

पंचायत और आरईएस में लगातार सामने आ रहे घोटालों में अधिकारी पत्राचार तो खूब कर रहे हैं, लेकिन कार्रवाई को जांच के नाम पर लटकाए हुए हैं। सहायक यंत्री रोहन शर्मा को तीन सड़क निर्माण कार्यों में कलेक्टर भी नोटिस जारी कर चुके हैं। कलेक्टर ने मार्च में नोटिस जारी किया था जिसका 14 मार्च तक जवाब नहीं मिलने पर एक पक्षीय कार्रवाई के लिए लिखा था, लेकिन अब तक कार्रवाई नहीं हुई।

नोटिस में ग्राम पंचायत बारौद, बिजरानैनी में एप्रोच रोड, पुलिया निर्माण और बामौर खुर्द में सड़क निर्माण की शिकायत मिलने पर जांच समिति गठित की थी। इसमें प्राक्कलन अनुसार राशि और पोर्टल पर दर्ज राशि में अंतर आया। जांच में करीब 19 लाख रुपये की अंतर राशि आई। इस पर कलेक्टर नोटिस दिया और इसे लापरवाही, अनुशासनहीनता व स्वेच्छाचारिता बताते हुए कारण बताओ नोटिस दिया कि क्यों न उक्त निर्माण कार्यों की अंतर राशि आपसे से वसूली जाए।
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