शिवपुरी की 6 प्रतिभाए बनी सिविल जज, असफलता को बनाया सफलता की सीढ़ी, पढिए इनका संघर्ष

Bhopal Samachar
शिवपुरी। शिवपुरी छह साल लगातार सिविल जज की परीक्षा दी और प्री मेंस के साथ तीसरी कड़ी इंटरव्यू तक भी पहुंची लेकिन हर बार असफल रही प्रियंका ने हिम्मत नहीं हारी। अंततः लगातार अभ्यास से बैंक मैनेजर मां की बेटी प्रियंका ने सफलता हासिल कर सिविल जज बनने का लक्ष्य पा लिया। खास बात यह है कि सभी प्रतिभागियों की जजमेंट राइटिंग में पिछली कमियां रहीं जिन्हें सुधार कर उन्होंने सफलता का लक्ष्य हासिल किया। वह कोलारस के बीजरी गांव की निवासी है। और उन्होंने 51 वी रैंक हासिल की।

जिला जज पिता की प्रेरणा ले मृदुल ने दूसरे प्रयास में पाई सफलता

शहर के कोर्ट रोड निवासी जिला न्यायाधीश राकेश जैन सन 2000 में सिविल जज बने थे। उनकी प्रेरणा से बेटे मृदुल जैन ने लॉ ग्रेजुएट होने के बाद एलएलएम में किया और फिर सिविल जज की परीक्षा दी पहले प्रयास में वह जजमेंट राइटिंग में पीछे रह गए थे जिसे अभ्यास के साथ उन्होंने दूर किया। मृदुल को 14 वीं रैंक हासिल हुई।

प्रोफेसर पदमा शर्मा के बेटे शशांक ने हासिल की 8वीं बैंक

श्रीमंत माधवराव सिंधिया शासकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय में हिंदी की प्रोफेसर रही पदमा शर्मा और स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत मृगांक ढेंगुला के में सफलता हासिल कर ली उनकी 8वीं रैंक आई। जजमेंट राइटिंग के साथ-साथ उन्होंने सब्जेक्ट पर फोकस किया इस वजह से वह सफल रहे।

शुभम का दूसरा प्रयास और हासिल की 71वीं रैंक

शुभम द्विवेदी ने बताया कि उन्हें दूसरे प्रयास में सफलता मिली है और उनकी 71 वी रैंक है। शुभम के पिता मुन्नालाल पीएचई विभाग मैं पदस्थ रहे है। वही शिवपुरी की नेहा परिहार ने भी सिविल जज परीक्षा में सफलता हासिल की है। और उन्हें 35 वीं रैंक हासिल हुई है।

शुभम को मॉक इंटरव्यू प्रैक्टिस से मिली सफलता

राजस्व विभाग में कार्यरत देवेंद्र जैन और नीरजा जैन के बेटे शुभम जैन ने अपने दूसरे प्रयास में 33 वी रैंक हासिल की है। शुभम ने बताया कि आंसर राइटिंग के साथ मॉक इंटरव्यू प्रैक्टिस से सफलता मिल गई।
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