अहंकार का प्रतीक हैं बकरा, इसलिए दक्ष प्रजापति को लगाया बकरे सिर: पाराशर - Badarwas News

बदरवास। बदरवास में भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह में सती कथा का बखान करते हुए कथाचार्य डॉ श्याम सुंदर पाराशर जी ने कहा कि जब दक्ष प्रजापति ने अपनी पुत्री सती का अपमान किया और भगवान शिव के प्रति तिरस्कार भाव प्रकट किया तो सती दुखी हुई।

बदरवास जैन कालोनी परिसर में चल रहे श्रीमद् भागवत ज्ञान यज्ञ सप्ताह में तृतीय दिन कथाचार्य डॉ श्याम सुंदर पाराशर जी ने सती कथा का बखान करते हुए कहा कि जब दक्ष प्रजापति ने अपनी पुत्री सती का अपमान किया और भगवान शिव के प्रति तिरस्कार भाव प्रकट किया तो सती दुखी हुई। उन्होंने योगमाया के द्वारा अपने देह का त्याग किया।

सती के देह त्याग के बाद यज्ञ स्थल में खलबली मच गई। जब खबर भगवान भोलेनाथ को मिली तो वे दुखी हुए और क्रोध में आकर वीरभद्र को प्रकट किया। वीरभद्र ने दक्ष प्रजापति का सिर काटकर यज्ञ का विध्वंस किया।

भगवान शिव यज्ञ स्थल पर पहुंचे और सती के वियोग में शोकाकुल हो गए। उपस्थित देव गणों ने भगवान शिव से यज्ञ पूर्ण करने के लिए दक्ष प्रजापति को पुनर्जीवित करने का अनुरोध किया। इस पर भगवान भोलेनाथ ने उन्हें बकरे का सिर लगाकर जीवित किया। इसके बाद यज्ञ पूर्ण हुआ।

सही मायने में बकरा हमेशा मैं मैं करता है इसलिए उसे अहंकार का प्रतीक बताया गया है। दक्ष प्रजापति भी अहंकार के वशीभूत हो गए थे। जिसके कारण उसे बकरे का सिर लगाकर उनके अहंकार को दूर किया गया। इसके बाद दक्ष प्रजापति भगवान शिव का गुणगान करने लगे।अंत प्रहलाद की कथा भी सुनाई अतः में श्रीमद्भागवत कथा की आरती कर समापन किया गया।