शिवपुरी मेडिकल कॉलेज: प्रसव को बताया DNC, जिंदा को मरा हुआ बता दिया

शिवपुरी। शिवपुरी का मेडिकल अपनी सुविधाओं से अधिक विवाद के लिए जाना जाने लगा हैं,सुविधाओं से अधिक लापरवाही की की खबरों की संख्या अधिक हैं। करोड़ों रुपए की लागत से बना शिवपुरी का मेडिकल कॉलेज इसलिए बनाया गया था कि लोगों को जान बचा सके,लेकिन प्रबंधन ने अपनी लापरवाही को छुपाने के लिए जिंदा शिशु को मृत बता दिया,जब पोल खुली तो कॉलेज के अधीक्षक मीडिया को जवाब देने से बच रहे है।

यह हैं मामला: सामान्य प्रसव को DNC बता दिया,तोडा प्रोटोकॉल

ग्राम मामौनी चक निवासी रेनू पत्नी मुरारी लाल कुशवाह सात माह गर्भवती थी। इसी दौरान डॉक्टरों ने उसे टीबी होना बताया जिसका इलाज जारी था। सप्ताह भर पहले उसे प्रसव संबंधी कोई परेशानी हुई तो उसके स्वजन उसे मेडिकल कालेज लेकर आए। मेडिकल कालेज में प्रसूता को उपचार के लिए भर्ती किया गया, लेकिन रेनू को टीबी होने के कारण उसे गायनिक वार्ड में भर्ती करने की बजाय मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया।

बुधवार को प्रसव पीड़ा होने पर उसे न तो ओटी में ले गए और न ही लेबल रूम में। जिसके बाद मेडिकल वार्ड में ही असुरक्षित प्रसव हो गया। मेडिकल कालेज में के डाक्टरों की इस लापरवाही पर जब मेडिकल कालेज प्रबंधन से बात की गई तो मेडिकल कालेज प्रबंधन ने मेडिकल वार्ड में हुए इस प्रसव को प्लांड डीएनसी करार दिया। इसके अलावा बच्चे को मृत बताया। जबकि ऐसा नहीं है। प्रसूता ने प्री-मैच्योर बच्ची को जन्म दिया है जो एसएनसीयू में भर्ती है।

पहले वार्ड इंफेक्टेड हो रहा था अब नहीं...

एक दिन पहले मेडिकल कालेज प्रबंधन ने यह कहा था कि प्रसूता को मेडिकल संबंधी परेशानी होने के कारण मेडिकल वार्ड में भर्ती किया गया था। जबकि प्रसूता के अनुसार वह वास्तविकता में प्रसव संबंधी परेशानी से वहां भर्ती हुई थी। शिफ्ट न करने के पीछे इंफेक्शन का खतरा बताया गया था। शिवपुरी की मीडिया द्वारा इस मामले को उठाने के बाद प्रसूता को प्रसूति वार्ड में भर्ती कर दिया गया। विचारणीय पहलू यह है कि क्या अब वार्ड में इंफेक्शन नहीं फैलेगा?

प्रोटोकॉल के साथ-साथ मानव अधिकारों का भी हनन

इस पूरे मामले में वरिष्ठ अभिभाषक संजीव बिलगैया का कहना है कि किसी भी मरीज को उसकी गंभीर बीमारी या संक्रमित बीमारी के आधार पर उपचार से वंचित नहीं किया जा सकता है। इसके अलावा जिस तरह से लापरवाही को छिपाने के लिए झूठी जानकारी दी गई है, यह आपराधिक कृत्य की श्रेणी में आता है। इसके अलावा जिस तरह से मेडिकल वार्ड में पलंग पर प्रसव कराया गया, यह भी प्रोटोकॉल का उल्लंघन है। इस मामले में न सिर्फ विभागीय जांच की जानी चाहिए बल्कि मानव अधिकार के उल्लंघन की कार्रवाई भी होनी चाहिए।

इनका कहना है..
मेडिकल कॉलेज के डीन डॉ अक्षय निगम से बात की गई तो उनका कहना था कि इस मामले की जानकारी अधीक्षक डॉ केबी वर्मा देंगे। जब डा वर्मा को फोन लगाए गए तो उन्होंने फोन अटेंड नहीं किया।